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2…….कुंडलिया छंद…….?

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

October 2, 2017

1..कुंडलिया
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नववर्ष मुबारक होय,फूलो-फलो मित्रों।
फूलों से महको सभी,खुश रहो तुम मित्रों।।
खुश रहो तुम मित्रों,जीवन सफल हो भैया।
प्यार की बनी रहे,सभी पर सदैव छैया।
सुन प्रीतम की बात,जीवन में हो उत्कर्ष।
मिलजुल मनाओ सब,आया प्यारा नववर्ष।
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2..कुंडलिया
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मृग न जाने कस्तूरी,ये खता नहीं बंधु।
सबके मन में भगवान,पर पता नहीं बंधु।।
पर पता नहीं बंधु,पूजे पत्थर की मूर्ति।
अंधभक्त बन फिरे,होती न इच्छा पूर्ति।
सुन प्रीतम की बात,खोल भैया मन-दृग।
भ्रमित न बनो ऐसे,रेत को जल समझे मृग।
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3..कुंडलिया
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सोच समझकर दीजिए,चैक किसी को यार।
बाउंस अगर हो गया, जेल बने घर-बार।।
जेल बने घर-बार,इज्ज़त रहे न समाज।
छोड धोखेबाजी,बचा लीजिए तुम लाज।
सुन प्रीतम की बात,लाओ जीवन में लोच।
सुंदर रहे हरपल,देना चैक जरा सोच।
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4..कुंडलिया
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जलन मन में न राखिए,मन कमजोर होगा।
रीस सदा तुम कीजिए,हरपल भौर होगा।।
हरपल भौर होगा,सफलता पग चूमेगी।
जीवन के चमन में,हरकली मुँह खोलेगी।
सुन प्रीतम की बात,करना भैया तुम मनन।
व्यर्थ हृदय में कभी,कीजिए न भूल से जलन।
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5..कुंडलिया
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चिराग मेरे प्यार का,जलाकर देख यार।
जगमगाएगा प्यार से,आजमा देख यार।।
आजमा देख यार,जुगनू चाँद होगा रे।
तूने जो सोचा न,वह उन्माद होगा रे।
सुन प्रीतम की बात,प्यार एक मिलन विराग।
दिल खिलता चमन है,जलता हुआ है चिराग।
********राधेयश्याम बंगालिया
प्रीतम कृत****************

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