Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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16 कुंडलियाँ जून 2020

[1/6/2020, 9:09 PM] Ravi Prakash: *अढ़सठ दिन लॉकडाउन ( कुंडलिया )*
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अढ़सठ दिन घर में रहे ,बिल्कुल तालाबंद
दर्ज हुईं इतिहास में , यादें यह भी चंद
यादें यह भी चंद , लॉकडाउन अलबेला
पहली – पहली बार ,लोक ने था यह झेला
कहते रवि कविराय , रहा बीमारी का हठ
अद्भुत घर में कैद ,आदमी था दिन अढ़सठ
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[2/6/2020, 9:34 AM] Ravi Prakash: *जेब में पिस्टल गोली (कुंडलिया)*
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गोली मारी कर दिया , देखो काम तमाम
राजनीति में दिख रहा ,दृश्य आजकल आम
दृश्य आजकल आम , पदों पर गुंडे भारी
उनका चलता राज , लोग जो पिस्टलधारी
कहते रवि कविराय , चली गुंडों की टोली
बोली में बदमाश , जेब में पिस्टल गोली
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*रचयिता :रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[3/6/2020, 8:41 PM] Ravi Prakash: *ग्राहक (कुंडलिया)*
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ग्राहक आया पर लगा ,जैसे आया भूत
किसे पता किसमें बसा ,घना वायरस छूत
घना वायरस छूत , नफा घाटा दे जाए
कोरोना की पीर ,भीड़ से होकर आए
कहते रवि कविराय ,लोग रोगों के वाहक
रहिए दो गज दूर , देव मत समझें ग्राहक
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 999761 5451*
[3/6/2020, 9:16 PM] Ravi Prakash: *अहंकार (कुंडलिया )*
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छाई अंतर में दिखी , अहंकार की बेल
थोपी अपनी श्रेष्ठता , अभिमानों का खेल
अभिमानों का खेल ,रोग यह जिस पर चढ़ता
खोता बुद्धि विवेक , दिग्भ्रमित जैसा बढ़ता
कहते रवि कविराय , नीति ने बात बताई
पशु के व्यक्ति समान ,उग्र मति जिस पर छाई
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*रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा* *रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99 97 61 5451*
[9/6/2020, 3:22 PM] Ravi Prakash: *शादी में पचास लोग (दो कुंडलियाँ)*
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(1)
होटल वाले रो रहे , बैंकट हॉल उदास
बारातों में रह गए , केवल लोग पचास
केवल लोग पचास , कैटरिंग वाले खाली
बग्घी बैंड बरात , दीखते आज सवाली
कहते रवि कविराय , बंद है धंधा टोटल
घर की छत पर भोज ,आजकल यह ही होटल
(2)
शादी में अब लोग हों , परमानेंट पचास
इस पर ही अब है टिकी , जनमानस की आस
जनमानस की आस ,खर्च पर रोक लगाओ
बेमतलब की शान , लोक को नहीं दिखाओ
कहते रवि कविराय ,भीड़ से है बर्बादी
अपना सत्यानाश , जेब से मँहगी शादी
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*_रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा_* *रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 999761 5451
[14/6/2020, 5:58 PM] Ravi Prakash: *संकट है भारी (कुंडलिया)*
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जारी बीमारी अभी ,रखिए खूब बचाव
डूब न जाए बीच में ,नदिया ही के नाव
नदिया ही के नाव ,भँवर नजरों में आते
चालू पार्टी मौज ,लोग अब दिखे मनाते
कहते रवि कविराय ,सुनो संकट है भारी
फैला घर- घर रोग ,मौत का तांडव जारी
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*रचयिता :रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[16/6/2020, 12:01 PM] Ravi Prakash: _चित्र पर आधारित कविता_
*डोरी खींचो तान के (कुंडलिया)*
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डोरी खींचो तान के ,पूरी ताकत साथ
फिर कुछ करना कब बचा, छोड़ो अपना हाथ
छोड़ो अपना हाथ ,तीर से लगे निशाना
यह साहस का काम ,संतुलन सीखो लाना
कहते रवि कविराय ,जिंदगी रहती कोरी
भीतर से भयभीत ,खींच पाता कब डोरी
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[17/6/2020, 12:34 PM] Ravi Prakash: चित्र पर आधारित कविता
*समय क्षणभंगुर मानो (कुंडलिया)*
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बोली घंटे की सुई , चलती मैं दिन – रात
मैं यह जानूँ क्या कहाँ , किसको कब आघात
किसको कब आघात , समय क्षणभंगुर मानो
संख्याओं का खेल , पेड़ के पत्ते जानो
कहते रवि कविराय ,मिटी अंकों की टोली
पतझड़-सी खामोश ,शून्य हो जाती बोली
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल_ 99976 15451
[23/6/2020, 3:21 PM] Ravi Prakash: _चित्र पर आधारित कविता_
*नमन सैनिक बलधारी (कुंडलिया)*
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सीमा की जो कर रहे , रक्षा उन्हें प्रणाम
चौकन्ने दिन – रात रह ,जागे जो अविराम
जागे जो अविराम ,नमन सैनिक बलधारी
तुम पर करता गर्व ,देश प्रतिपल आभारी
कहते रवि कविराय ,नहीं व्रत करना धीमा
तुमसे ही अक्षुण्ण , हिंद की पावन सीमा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 999761 5451*
[24/6/2020, 12:24 PM] Ravi Prakash: _चित्र पर आधारित कविता_
*टोकरी सिर पर लादे (कुंडलिया)*
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तपती धूप सता रही ,माँ बच्चे के साथ
जीवन-रण में चल पड़ी ,पकड़े-पकड़े हाथ
पकड़े-पकड़े हाथ ,टोकरी सिर पर लादे
सूरज उसमें बाँध ,निडर करके कुछ वादे
कहते रवि कविराय ,नाम श्रम का नित जपती
माँ का शौर्य असीम , रोज गर्मी में तपती
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर( उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 99976 15451*
[24/6/2020, 8:44 PM] Ravi Prakash: *हाथ सब खाली जाते (कुंडलिया)*
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हारा जीता कौन है ,किसके सिर पर ताज
सब मिट्टी में मिल गए ,राजा रंक समाज
राजा रंक समाज ,हाथ सब खाली जाते
किसकी रही जमीन ,महल किसके हो पाते
कहते रवि कविराय ,चार दिन का जग सारा
किसने जीता .राज , कौन है बोलो हारा
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[27/6/2020, 9:29 PM] Ravi Prakash:
*बरखा (कुंडलिया)*
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बरखा ऋतु – सी कौन है ,रानी की पहचान
मानों बूँदे कर रहीं ,छमछम – छमछम गान
छमछम- छमछम गान ,मेघ आ गीत सुनाते
हरियाली चहुँ ओर ,दृश्य नयनों को भाते
कहते रवि कविराय ,राज है जाँचा – परखा
पर अचरज की बात ,आज भी लगती बरखा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[28/6/2020, 11:22 AM] Ravi Prakash: *वर्षा (कुंडलिया)*
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वर्षा लेकर आ गई ,प्रिय की पावन याद
विरहानल में जल उठी ,विरहिन उसके बाद
विरहिन उसके बाद ,बूँद जल ताप बढ़ाती
आते काले मेघ ,आग तन में लग जाती
कहते रवि कविराय ,कौन कहता मन हर्षा
प्रिय के बिना उदास ,प्यास लाती है वर्षा
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश* )
_मोबाइल 99976 15451_
[29/6/2020, 10:21 AM] Ravi Prakash: _चित्र पर आधारित कविता_
*नारी (कुंडलिया)*
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नारी तुम गृह स्वामिनी ,तुम जीवन-आधार
तुममें बसता अर्थ है ,बसा धर्म का सार
बसा धर्म का सार ,नदी-सी निर्मल धारा
तुम प्राचीन नवीन ,सूर्य मुट्ठी में सारा
कहते रवि कविराय ,लोक की जिम्मेदारी
जग का लेकर भार ,दृढ़वती दिखती नारी
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[30/6/2020, 2:47 PM] Ravi Prakash: चित्र पर आधारित कविता
*समय नारी का आया (कुंडलिया)*
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छूने को नारी चली ,नभ को पुरुष-समान
झूले पर आ झूलती , ऊँची मुक्त उड़ान
ऊँची मुक्त उड़ान ,समय नारी का आया
हँसकर दो अधिकार ,सूर्य ने यह बतलाया
कहते रवि कविराय ,रात दिन होते दूने
लेकर लंबी पेंग ,चली सपनों को छूने
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*रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
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