Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
Reading time: 37 minutes

122 कुंडलियाँ दिसंबर 2020

[1/12/2020, 10:35 AM] Ravi Prakash: *तरुणाई (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
आई क्रांति सदैव से , तरुणाई का काम
शौर्य हिलोरें मारता , जिसमें है अविराम
जिसमें है अविराम ,राह नित नई पकड़ता
भरा हुआ उत्साह ,तनिक देखी कब जड़ता
कहते रवि कविराय , नया परिवर्तन लाई
तरुणाई है धन्य , वृक्ष पर देखो आई
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*तरुणाई =* युवावस्था
*उद्दाम =* बंधनहीन ,स्वतंत्रता
[1/12/2020, 8:26 PM] Ravi Prakash: *किसकी रहती याद (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
जाते जग से सूरमा ,किसकी रहती याद
दो दिन से ज्यादा नहीं ,आँसू उसके बाद
आँसू उसके बाद , स्वप्न आँखों में पलते
नए दौर में लोग ,मूल्य लेकर नव चलते
कहते रवि कविराय ,वर्ष सौ केवल पाते
दिखलाते हैं खेल ,बाद में सब जन जाते
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 999761 5451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
सूरमा = योद्धा , बहादुर
[1/12/2020, 8:33 PM] Ravi Prakash: *समझो एक सराय (कुंडलिया)*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
मतलब इस संसार का ,समझो एक सराय
एक दिवस में खर्च सब ,सौ वर्षों की आय
सौ वर्षों की आय , अनिश्चितता है गहरी
अंतिम सबको ज्ञात ,पताका यम की फहरी
कहते रवि कविराय ,पता क्या मरना है कब
यह जीवन-रोमांच , जिंदगी का है मतलब
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
सराय = धर्मशाला ,मुसाफिरखाना
[2/12/2020, 4:52 PM] Ravi Prakash: *साँसों में हैं वेद (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
गीता का शुभ श्लोक या ,ऋचा वेद का मंत्र
इन में भारत का बसा ,अविरल जीवन – तंत्र
अविरल जीवन – तंत्र ,देश भारत की गाथा
यज्ञ दान तप त्याग , कर रहे ऊँचा माथा
कहते रवि कविराय ,पुरातन अब भी जीता
साँसों में . हैं वेद , उपनिषद पावन गीता
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
ऋचा = वेद का मंत्र
[2/12/2020, 9:14 PM] Ravi Prakash: *साड़ी (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■
साड़ी का पल्लू धरे , चली लजाती सास
बहू जींस पहने हुए ,दिखती उसके पास
दिखती उसके पास ,बाँध साड़ी कब पाती
सीखी सौ – सौ बार ,मगर चुन्नट कब आती
कहते रवि कविराय ,समय की चलती गाड़ी
शादी या त्यौहार , रह गई केवल साड़ी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश* )
*मोबाइल 99976 15451*
[3/12/2020, 10:58 AM] Ravi Prakash: *जाने कल क्या ठौर (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■
किसको होता है पता , आने वाला दौर
आज यहाँ है आदमी ,जाने कल किस ठौर
जाने कल किस ठौर ,नदी की ज्यों है धारा
मिट्टी बनती रेत , काल ने पलटा मारा
कहते रवि कविराय ,भाग्य कहता है खिसको
छोड़ो गाँव तुरंत ,सफर करना किस-किसको
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*ठौर =* जगह , स्थान
[3/12/2020, 11:37 AM] Ravi Prakash: *हाय मोबाइल ( कुंडलिया )*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
करिए मोबाइल सदा ,कम से कम उपयोग
अगर न चेते देह में , होंगे सौ – सौ रोग
होंगे सौ – सौ रोग , नजर कमजोर पड़ेगी
झुके – झुके थक-हार , मुड़ी गर्दन अकड़ेगी
कहते रवि कविराय ,किया जो अब तक भरिए
बीच – बीच में दूर , सदा मोबाइल करिए
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[4/12/2020, 10:49 AM] Ravi Prakash: *महाशय धर्मपाल (कुंडलिया)*
💐🌻🌱💐🌻🌱💐🌻
भागे सब कुछ छोड़कर, निज घर और दुकान
हिंदुस्तान कहाँ रहा , अब था पाकिस्तान
अब था पाकिस्तान , बने शरणार्थी आकर
एमडीएच का काम ,सराहा सब ने खाकर
कहते रवि कविराय , शून्य से सबसे आगे
धन्य महाशय आप , खूब ताँगे से भागे
🟡🟣🟡🟣🔵🟢🟡🟣🟡
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)* 9997615451
*महाशय धर्मपाल* का जन्म भारत के *सियालकोट* में *27 मार्च 1923* को हुआ था ,परंतु भारत-विभाजन के समय यह पाकिस्तान घोषित हो गया तथा महाशय जी को पाकिस्तान छोड़कर दिल्ली भागना पड़ा। सियालकोट में आपका घर तथा *महाशियाँ दी हट्टी* नाम से मसाले की दुकान थी । दिल्ली आकर प्रारंभ में *ताँगा* चलाकर घर-गृहस्थी चलाई । फिर पुश्तैनी व्यवसाय मसाले बनाना और बेचना शुरू कर दिया। ईमानदारी और परिश्रम के कारण सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते गए। *3 दिसंबर 2020* को 97 वर्ष की आयु में मृत्यु के समय आपका *एमडीएच* सर्वोत्तम ब्रांड बन चुका था। आपकी जीवन-यात्रा हमें सीख देती है कि व्यक्ति शून्य पर पहुँचने के बाद भी किस तरह ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है। आपको शत-शत नमन।।
[4/12/2020, 11:46 AM] Ravi Prakash: *समर्पित पथ के राही (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
मिलती है मंजिल उन्हें ,भरी विकलता खूब
कैसे छू लें लक्ष्य को , रहते हर क्षण डूब
रहते हर क्षण डूब , समर्पित पथ के राही
लिखते नव-अध्याय ,अमिट बनती है स्याही
कहते रवि कविराय ज्योत्स्ना नभ में खिलती
जो प्रतिज्ञ अविराम ,सफलता उनको मिलती
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*विकलता =* अधीरता ,बेचैनी ,व्याकुलता
*ज्योत्स्ना =* चाँदनी , चंद्रमा का प्रकाश
[4/12/2020, 5:01 PM] Ravi Prakash: *आभार (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
जितना धन प्रभु ने दिया ,उतने का आभार
नहीं दिया उसके लिए ,नतमस्तक शत बार
नतमस्तक शत बार ,वस्तु देकर जो छीनी
अमृत की वह बूँद ,मिली किस्मत से पीनी
कहते रवि कविराय ,न रोओ पाया कितना
मिलता उतना द्रव्य ,लिखा विधि ने है जितना
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[5/12/2020, 11:14 AM] Ravi Prakash: *जीवन-पथ में (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■
जीवन-पथ में फूल कुछ ,मिलते हैं कुछ शूल
कुछ यादें मन में बसीं ,रह जातीं कुछ भूल
रह जातीं कुछ भूल ,सफलताएँ कुछ आतीं
कुछ यादों में हार ,कसैला मुख कर जातीं
कहते रवि कविराय ,काल के जीवन-रथ में
हो सहर्ष स्वीकार ,मिले जो जीवन-पथ में
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 999761 5451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*शूल =* काँटा ,भाला ,सूली ,विकट पीड़ा ,वृक्ष की टहनियों तनों से निकले भाग जो सुई के समान होते हैं
*कसैला =* कड़वा
∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆
∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆πππ∆∆∆∆∆∆∆
*नोट :-* अकस्मात *28 अगस्त 2020* को *अमर उजाला काव्य फेसबुक पेज* पर निगाह गई । लिखा था- *आज का शब्द* तथा उसका अर्थ बताते हुए यह आग्रह किया गया था कि इस शब्द पर आप भी कोई कविता लिखें । तुरंत एक कुंडलिया बनाकर फेसबुक पेज पर भेज दी। उसी की एक प्रति अपनी फेसबुक पर भी डाल दी। फिर रोजाना अमर उजाला काव्य फेसबुक पेज देखने की आदत-सी बन गई ।
आज इसी तारतम्य में शूल का शब्द प्रयोग करके एक सौ वीं ( 100 ) कुंडलिया लिखी गई है । बहुत अच्छा लग रहा है।
[5/12/2020, 12:06 PM] Ravi Prakash: *वह महान है कौन (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
किसकी है यह भूमि सब ,किसकी कोठी कार
किसके सोने से भरे , घर दुकान भंडार
घर दुकान भंडार , हमें यौवन का दाता
किसके बल से फूल ,पेड़ के ऊपर आता
कहते रवि कविराय ,सूर्य की किरणें जिसकी
वह महान है कौन ,चंद्रिका सोचो किसकी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*चंद्रिका =* चंद्रमा का प्रकाश
[6/12/2020, 10:57 AM] Ravi Prakash: *पहले कब थी फेसबुक (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■
पहले कब थी फेसबुक ,व्हाट्सएप सौ ऐप
अगर नहीं हम सीखते ,होता कितना गैप
होता कितना गैप ,कटे दुनिया से होते
घर बैठे एकांत , अश्रु से रहते रोते
कहते रवि कविराय ,कष्ट थोड़ा-सा सह ले
नए दौर की आज , सीख विद्या ले पहले
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 99976 15451_
[6/12/2020, 12:21 PM] Ravi Prakash: *अचरज (कुंडलिया)*
■■■■■■■■■■■■■■■■■■
अचरज दुनिया में यही ,दिखता है दिन-रात
रोज मरण के हाथ से ,जीवन खाता मात
जीवन खाता मात ,रोज शव-यात्रा जाती
नश्वर तन की बात ,बुद्धि में पर कब आती
कहते रवि कविराय ,राम को रोजाना भज
राम नाम है सत्य ,भला इसमें क्या अचरज
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल 9997 615451_
●●●●●●●●●●●●●●●●
*अचरज =* आश्चर्य ,विस्मय ,अचंभा
[6/12/2020, 10:41 PM] Ravi Prakash: *जीवन की लय (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
लय में होता है निहित ,जीवन का सब सार
लय का सुर – संगीत है ,जीवन का आधार
जीवन का आधार ,इसी से गतिविधि चलती
बिगड़ी जब लय-ताल,चाल विकृत हो खलती
कहते रवि कविराय ,मनुज चाहे जिस वय में
जीवन का आनंद ,साँस की पाओ लय में
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[6/12/2020, 10:49 PM] Ravi Prakash: *आयु मानव को खाती (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
लगती दीमक काष्ठ को ,लगी लौह को जंग
दो दिन बीते हैं खिले ,उड़ा पुष्प का रंग
उड़ा पुष्प का रंग ,आयु मानव को खाती
यौवन का रस सूख , देह बूढ़ी हो जाती
कहते रवि कविराय ,काल की गति है ठगती
आता लेकर पाश ,देर फिर कितनी लगती
🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
*रचयिता : रविप्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[7/12/2020, 11:04 AM] Ravi Prakash: *कोहरा (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
छाया जग में कोहरा ,धुँधला दिखा प्रभात
निकले सूरज देवता ,पुलकित तब से गात
पुलकित तब से गात ,ऊष्णता भीतर आई
ठिठुरन हुई समाप्त ,देह ने ली अँगड़ाई
कहते रवि कविराय ,धूप ने रंग जमाया
सर्दी का युवराज ,सूर्य हर दिल पर छाया
🌿🌿🍁🌿🌿🍁🌿🌿🍁🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴
*पुलकित =* प्रेम , हर्ष आदि से गद्गद् , रोमांचित
*गात =* शरीर ,.देह
[7/12/2020, 11:37 AM] Ravi Prakash: *जीवन है मुस्कान (कुंडलिया)*
🌷🍀🌷🍀🌷🍀🌷🍀
मरने की क्या सोचना ,मरना है आसान
जीने में चातुर्य है , जीवन है मुस्कान
जीवन है मुस्कान ,कला जीने की सीखो
मंद हास-परिहास ,लिए होठों पर दीखो
कहते रवि कविराय ,यहाँ कुछ आए करने
जीने को है जन्म ,भेजते प्रभु कब मरने
🌸🌺☘️🌸🌺☘️🌸🌺☘️☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[8/12/2020, 7:39 AM] Ravi Prakash: *आज बंद (कुंडलिया)*
🍂🍂🍂🍂🍂
जाए तो जाए कहाँ ,सभी जगह है जाम
बंद सभी सड़कें हुईं , बंद सभी के काम
बंद सभी के काम ,बंद की महिमा भारी
फँसे बंद में लोग , कामकाजी नर – नारी
कहते रवि कविराय ,कौन किसको समझाए
कृपा करो हे ईश ,बंद कल से खुल जाए
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[8/12/2020, 11:12 AM] Ravi Prakash: *अलौकिक कृत्य (कुंडलिया)*
🌺☘️🌺☘️🌺☘️🌺☘️🌺☘️
रचना खुद ही गढ़ गई ,किसका बोलो काम
कहो चितेरा या उसे , कहो मुसौवर नाम
कहो मुसौवर नाम , रूप खुद चित्रित होता
चित्रकार आश्चर्य , नींद में गहरी सोता
कहते रवि कविराय ,तर्क मुश्किल है पचना
किंतु अलौकिक कृत्य ,बनी अप्रतिम हर रचना
🍃🌸🍃🌸🍃🌸🍃🌸🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर ( उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 99976 15451*
🍃🌸🍃🌸🍃🌸🍃🌸🍃🌸
*चितेरा =* चित्रकार
*मुसौवर =* चित्रकार को अरबी भाषा में मुसौवर कहते हैं
[8/12/2020, 11:58 AM] Ravi Prakash: *कल्पवृक्ष (बाल कविता/कुंडलिया)*
🍃🍂🌸🌱🍃🍂🌸🌱🍃
हम बच्चों को दो प्रभो ,कल्पवृक्ष उपहार
माँगें उससे टॉफियाँ , चूरन और अचार
चूरन और अचार , रोज गुब्बारे पाएँ
पकड़ें उसकी डोर ,व्योम में उड़-उड़ जाएँ
कहते रवि कविराय ,भेज दो हम सच्चों को
कल्पवृक्ष दो भेज ,स्वर्ग से हम बच्चों को
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*कल्पवृक्ष =* इच्छा पूरी करने वाला स्वर्ग का एक वृक्ष
*व्योम =* आकाश ,अंतरिक्ष ,आसमान
[9/12/2020, 10:53 AM] Ravi Prakash: *संत (कुंडलिया)*
🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁
करते हैं प्रभु भक्त पर ,निज उपकार अनंत
चलते – चलते राह में ,मिल जाते हैं संत
मिल जाते हैं संत ,दिशा जीवन की देते
जन्म – जन्म के पाप ,सोख भीतर से लेते
कहते रवि कविराय ,भाग्य से मानव तरते
उन्हें मिलाते संत ,कृपा प्रभु जिन पर करते
🍃🍂🍃🍂🌱🍂🍃🍂🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
*अनंत =* _जिसका अंत न हो ,असीम_
[10/12/2020, 12:19 PM] Ravi Prakash: *उच्छ्र्ंखलता (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
उच्छ्र्ंखलता बढ़ रही , सड़कें हैं भयभीत
युद्ध छिड़ा है देखिए ,किसकी होती जीत
किसकी होती जीत ,सड़क बोली मैं हारी
मेरा है नुकसान , खेलकर ऐसी पारी
कहते रवि कविराय ,दौर यह सचमुच खलता
मनमानापन आज , शस्त्र है उच्छ्रंखलता
🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
*उच्छ्रंखलता =* निरंकुशता ,उद्दंडता
[10/12/2020, 4:30 PM] Ravi Prakash: *बहते-बहते (कुंडलिया)*
🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀
बहते – बहते मिल गए ,धारा में दो फूल
आलिंगन करने लगे ,जग को सारा भूल
जग को सारा भूल ,.अरे दो क्षण बस बीते
हुआ नदारद दृश्य ,नेह से थे अब रीते
कहते रवि कविराय ,बिछड़ते जग में रहते
दो पल का संयोग ,सभी से बहते-बहते
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[10/12/2020, 4:37 PM] Ravi Prakash: *अनजाने (कुंडलिया)*
🍀☘️🍁🍀☘️🍁🍀☘️🍁🍀
अनजाने पथ पर मिले ,अनजाने कुछ लोग
भाग्य इसे चाहे कहें , जन्मों का संयोग
जन्मों का संयोग ,लोग कुछ दिल छू जाते
रहते हैं अज्ञात , किंतु अपनापन लाते
कहते रवि कविराय ,सफर लो हुए सुहाने
मिलते चलती राह ,मीत मन के अनजाने
🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[10/12/2020, 4:50 PM] Ravi Prakash: *चिट्ठियाँ बात पुरानी (कुंडलिया)*
🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁
पहले चलता सिर्फ था ,पोस्टकार्ड से काम
अब सोचो कब से नहीं ,लिखा कलम से नाम
लिखा कलम से नाम ,चिट्ठियाँ बात पुरानी
लाकर देता पत्र , डाकिया हुई कहानी
कहते रवि कविराय ,आज नहले पर दहले
व्हाट्सऐप ईमेल , वायु से पहुँचे पहले
🍀☘️🍀☘️🍀☘️🍀☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[10/12/2020, 7:55 PM] Ravi Prakash: *जन्म दिवस* *( कुंडलिया )*
🌹🌷🌹🌷🌱🌹🌷🌹🌷
आया जन्मदिवस करें ,अभिनंदन स्वीकार
उत्सव – सा यह बन गया ,खुशियों का भंडार
खुशियों का भंडार ,गगन यह कहता नीला
उगे सूर्य सौ साल , गीत गाए चमकीला
कहते रवि कविराय , रूप पेड़ों पर छाया
स्वागत दिवस महान ,दिया ईश्वर का आया
🌸🌺🌿🌸🌺🌿🌸🌺🌿🌸🌺
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
[10/12/2020, 7:55 PM] Ravi Prakash: *आना प्रिये न पास (कुंडलिया)*
🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹🍃🌹
मिलने से ज्यादा मजा ,करो प्रतीक्षा रोज
पाने से बढ़कर हुई , है अभीष्ट की खोज
है अभीष्ट की खोज ,पूर्णता कभी न पाओ
कसर रखो कुछ शेष ,तृप्ति से रह-रह जाओ
कहते रवि कविराय ,मना कर दो खिलने से
आना प्रिये न पास ,मजा जाता मिलने से
🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[11/12/2020, 1:13 PM] Ravi Prakash: *समय नित रंग बदलता (कुंडलिया)*
☘️🌻🌻☘️🌻🌻☘️🌻🌻
आता मौसम ठंड का ,ज्यों गर्मी के बाद
जीवन में आते सदा ,हर्षोल्लास – विषाद
हर्षोल्लास-विषाद ,समय नित रंग बदलता
टेढ़ी इसकी चाल ,सीध में कब यह चलता
कहते रवि कविराय ,कोहरा कभी सताता
कभी निकल कर धूप ,सुहाना दिन है आता
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*विषाद = उदासी ,गम ,निराशा ,दुख*
[12/12/2020, 12:31 PM] Ravi Prakash: *नेह से जीवन चलता (कुंडलिया)*
🍃🌻🍃🌻🍁🍃🌻🍃🌻
धरती ऊसर हो गई ,मिली न जिसको खाद
मिलते- जुलते जो नहीं ,पाते जन अवसाद
पाते जन अवसाद ,नेह से जीवन चलता
मिले मधुर मुस्कान ,इसी में छिपी सफलता
कहते रवि कविराय ,वाह की आशा करती
मधुर पुष्प से व्याप्त ,सुगंधित मधुमय धरती
🌷🌹🌷🌹☘️🍀🌹🌷🌹🌷
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
~~~~~~~~~~~~~~~~`~~`~~
ऊसर = बंजर ,जो जमीन उपजाऊ न हो
[12/12/2020, 3:09 PM] Ravi Prakash: *कोरोना : पक्ष – विपक्ष (कुंडलिया)*
🍃🍂🌱🍃🍂🌱🍃🍂🌱
कोरोना में अब कहाँ , पहले जैसी बात
बहुतेरे जन कह रहे , सबकी खाता लात
सबकी खाता लात ,कौन अब उससे डरता
जब देखो उपहास , अभागे की ही करता
कहते रवि कविराय ,मास्क नियमों का ढोना
घातक केवल रोग , अस्पताली कोरोना
🌻🌻🌻🌸🌻🌻🌻🌸🌻🌻🌻
कोरोना ने जब सुना , मेरा है उपहास
अट्टहास करने लगा , आया सब के पास
आया सबके पास , मुझे अति घातक जानो
पहुँचाता यमलोक , सत्य यह दर्प न मानो
कहते रवि कविराय,अचिंतित तनिक न होना
समझो मैं हूँ काल , नाम मेरा कोरोना
🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 9997 615451*
[12/12/2020, 6:54 PM] Ravi Prakash: *मरने के उपरांत (कुंडलिया)*
🌱☘️🌱☘️🌱☘️🌱☘️🌱
पाते जन कब देख-सुन , मरने के उपरांत
मरी देह हलचल-रहित , रहती केवल शांत
रहती केवल शांत , नहीं रुदन वह सुनती
देखे कब षड्यंत्र , कुटिलता है जो बुनती
कहते रवि कविराय ,छोड़कर जग सब जाते
किसको कितना शोक ,जान हर्गिज कब पाते
🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[12/12/2020, 7:14 PM] Ravi Prakash: *जाड़ों में बरसात (कुंडलिया)*
☔☂️💦⛈️🌧️☂️☔💦
बरसे बादल हो गई , जाड़ों में बरसात
ठिठुर – ठिठुर कर कट रही ,ठंडी – ठंडी रात
ठंडी – ठंडी रात , ओढ़कर कंबल सोओ
बाहर . जाना . भूल , बंद कमरे में खोओ
कहते रवि कविराय ,ग्रीष्म में जिस को तरसे
हाय हाय दुर्भाग्य , वही जाड़ों में बरसे
☂️☂️☂️☂️☔💦☂️☔☂️☂️
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[12/12/2020, 9:28 PM] Ravi Prakash: *आँखें (कुंडलिया)*
🌱🌸🌱🌸🌻🍀🌻🍀☘️🌺
जानो आँखों से जरा ,किसका मुखड़ा कौन
आँखें भी हैं बोलतीं ,यद्यपि दिखतीं मौन
यद्यपि दिखतीं मौन ,आँख से नेह बरसता
अगर देखतीं घात ,खून भीतर में बसता
कहते रवि कविराय ,सत्य आँखों को मानो
कहतीं तभी न झूठ ,इन्हीं की मन की जानो
🌻🌻🌻🌻🌻☘️☘️☘️☘️☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/12/2020, 11:09 AM] Ravi Prakash: *घाम (कुंडलिया)*
☘️🌻☘️🌻☘️🌻☘️🌻☘️🌻
जितनी सुंदर सर्दियाँ , उससे सुंदर घाम
आई तो ज्यों मिल गया ,परमेश्वर का धाम
परमेश्वर का धाम ,स्वर्ग का सुख सब पाते
सूरज देता ताप , मजे फोकट में आते
कहते रवि कविराय ,न पूछो अच्छी कितनी
सर्दी की सौगात , एक वर मानो जितनी
🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
घाम = धूप
फोकट = मुफ्त
[13/12/2020, 11:56 AM] Ravi Prakash: *स्वर्ग नर्क ब्रह्मांड (कुंडलिया)*
🌻🍁☘️🌻🍁☘️🌻🍁☘️
जाते हैं जग से कहाँ , जन मरने के बाद
इस पर सचमुच ही सही ,छिड़ता रहा विवाद
छिड़ता रहा विवाद ,याद कब लेकर आते
पुनर्जन्म की बात , ग्रंथ केवल बतलाते
कहते रवि कविराय ,काश ! ईश्वर दिखलाते
स्वर्ग नर्क ब्रह्मांड ,जहाँ हम मर कर जाते
🍀🌸🍀🌸🍀🌸🍀🌸🍀
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/12/2020, 12:47 PM] Ravi Prakash: *एंटीक (कुंडलिया)*
🌻🌸🌻🌸🌱🌻🌸🌻🌸
होती कब हैं वस्तुएँ ,दो दिन में एंटीक
सौ बरसों की साधना ,करनी पड़ती ठीक
करनी पड़ती ठीक ,सहेजी रखी सँवारी
इन में युग की छाप ,दिखी सुंदर-सी प्यारी
कहते रवि कविराय ,इमारत अक्सर रोती
मैं दिखलाती शान ,कद्र यदि मेरी होती
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*एंटीक =* *प्राचीन वस्तु जो सामान्यतः एक सौ वर्ष पुरानी हो*
[13/12/2020, 10:50 PM] Ravi Prakash: *सफर कोहरे बीच (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🌱🍂🍃🍂🍃🍂
भारी छाया कोहरा ,समझो रस्ता जाम
रात अँधेरी जब हुई , अच्छा है विश्राम
अच्छा है विश्राम ,धुंध में राह न दिखती
लापरवाही एक , हादसा भीषण लिखती
कहते रवि कविराय ,जिंदगी कह- कह हारी
सफर कोहरे बीच , एक गलती है भारी
🌻🌻🌻🌻🌱🌱🍁🍁🍁🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/12/2020, 11:02 PM] Ravi Prakash: *सत्य (कुंडलिया)*
🌱🌻☘️🌱🌻☘️🌱🌻☘️
मैने पूछा काल से ,सच्चा जग में कौन
उत्तर उसने कब दिया ,साधा गहरा मौन
साधा गहरा मौन ,कहा फिर सब में खामी
सब में कोई भूल ,सभी कपटी खल कामी
कहते रवि कविराय ,काल के नख हैं पैने
उसने देखा सत्य , नहीं तुमने या मैने
🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[13/12/2020, 11:06 PM] Ravi Prakash: *पल में होता हादसा (कुंडलिया)*
🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
पल में होता हादसा , पल में जाती जान
हाड़ – मांस का तन बना ,पल में काष्ठ समान
पल में काष्ठ समान,जगत यह पल का मेला
पल में निकली साँस , देह मिट्टी का ढेला
कहते रवि कविराय,मनुज हो नभ जल थल में
पकड़ेंगे यमराज , उठा लेंगे बस पल में
☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[14/12/2020, 11:07 AM] Ravi Prakash: *अरुण (कुंडलिया)*
🌻🌱🌻🌱🌻🌱
आया पूरब से अरुण ,पिघला जैसे स्वर्ण
हर्ष- मग्न होने लगे , पक्षी पौधे पर्ण
पक्षी पौधे पर्ण , लालिमा नभ में छाई
तरुणाई से दीप्त , मनुज ने ली अँगड़ाई
कहते रवि कविराय ,दृश्य अद्भुत कहलाया
उतर स्वर्ग से रूप ,धरा पर मानो आया
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*अरुण =* गहरा लाल रंग का , प्रातः कालीन सूर्य
*पर्ण =* पेड़ का पत्ता
[14/12/2020, 11:46 AM] Ravi Prakash: *पुराने गली मुहल्ले (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
गली मुहल्ले से गए , जब से चौड़ी राह
कालोनी तो मिल गई ,मुख से निकली आह
मुख से निकली आह ,छुटे सब मित्र पुराने
कई पीढ़ियाँ साथ , रोज थे आने – जाने
कहते रवि कविराय ,फ्लैट में हुए इकल्ले
आती अक्सर याद , पुराने गली मुहल्ले
☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/12/2020, 11:56 AM] Ravi Prakash: *एकाकी ( कुंडलिया )*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
एकाकी बन रह गए ,घर में वृद्ध तमाम
सूनी आँखें देखतीं ,बुझी-बुझी-सी शाम
बुझी-बुझी -सी शाम , न बेटे बहुएँ पोते
सदा सोचते काश ,साथ सब रहते होते
कहते रवि कविराय ,अभी जो साँसे बाकी
काट रही हैं कैद , जिंदगी की एकाकी
🌱🌻🌱🌻🌱🌻🌱🌻🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/12/2020, 12:09 PM] Ravi Prakash: *परिचय*
*( एक कविता : दो कुंडलियाँ )*
🌱🌻🌱🌻🌱🌻🌱🌻🌱
परिचय है इंसान का , कितने रिश्तेदार
कौन हुए माता – पिता , पत्नी पति परिवार
पत्नी पति परिवार , पढ़ाई कितनी पाई
सर्विस या व्यवसाय , हो रही कहो कमाई
कहते रवि कविराय ,मरण की तिथि सबकी तय
हुई जीवनी पूर्ण , मनुज का पूरा परिचय
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
असली परिचय में लिखो ,कितने अश्रु-प्रपात
कितने उमड़े भाव कब ,मन से कब-कब बात
मन से कब-कब बात ,आत्म से मिलना पाया
जग की छोड़ी बाँह , अकेले चलना आया
कहते रवि कविराय ,कमर किसने कब कस ली
कब भीतर का युद्ध ,कहो यह परिचय असली
🍀🌸🍀🌸🍀🌸🍀🌸🍀🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/12/2020, 4:48 PM] Ravi Prakash: *रोजाना (कुंडलिया)*
🌸🍀🌻🌸🍀🌻🌸🍀🌻🌸
रोजाना कब ग्रीष्म है ,रोजाना कब शीत
रोजाना कब नफरतें , रोजाना कब प्रीत
रोजाना कब प्रीत ,कभी उत्साह न चलता
कभी हाथ पर हाथ ,धरे रहना है खलता
कहते रवि कविराय ,रोज कब होटल खाना
बहुत हुए सौ साल , साँस लेते रोजाना
🍂🍂🍃🍂🍂🍃🍂🍂🍃🍂
*_रचयिता : रवि प्रकाश_* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/12/2020, 11:12 AM] Ravi Prakash: *मृत्यु (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🌻🍃🍂🍃
टाले से टलता कहाँ ,अटल मृत्यु का सत्य
आदिकाल से हो रहा ,जग में इसका नृत्य
जग में इसका नृत्य ,भयावह यह कहलाती
जब आती है पास ,जगत के अश्रु बहाती
कहते रवि कविराय,पता कब किसको खा ले
किस में हिम्मत बात ,कौन जो इसकी टाले
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌺🌸🌺
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
*अटल =* अचल , पक्का , दृढ़ निश्चयी
[15/12/2020, 11:51 AM] Ravi Prakash: *पिता (कुंडलिया)*
🌱🍁🌱🍁
पकड़े उँगली चल रहे ,आते दिन हैं याद
बेफिक्री का दौर वह ,कहाँ पिता के बाद
कहाँ पिता के बाद , नहीं कुछ जिम्मेदारी
खाना सोना सैर , जिंदगी प्यारी – प्यारी
कहते रवि कविराय ,आज उलझन में जकड़े
लौटेगा कब काल ,गया जो उँगली पकड़े
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/12/2020, 2:44 PM] Ravi Prakash: *कोरोना में शादियाँ*
*( एक कविता : तीन कुंडलियाँ )*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
कोरोना की शादियाँ ,आतीं अब भी याद
सब का पत्ता कट गया ,दस नंबर के बाद
दस नंबर के बाद ,बैंड कब बग्घी बाजा
बीस जनों के बीच ,सजे थे दूल्हे राजा
कहते रवि कविराय ,याद से इसे न खोना
बड़े काम की चीज ,रही सोचो कोरोना
🍃🍂🍃🍂🍃🍃🍂🍃🍂
शादी सस्ते में हुई , कोरोना का राज
कृपा रही छह माह तक ,क्यों रूठे हो आज
क्यों रूठे हो आज , वही फिर से फैलावा
होटल बैंड बरात , धनिक होने का दावा
कहते रवि कविराय ,शुरू फिर से बर्बादी
सुखी किया तुम धन्य ,कराई सस्ती शादी
🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹
कोरोना की सादगी ,वाह – वाह क्या बात
घर-घर के बस लोग थे ,घर-घर की बारात
घर – घर की बारात ,निमंत्रण – पत्र छपाई
होटल दावत शान ,किसी ने कब दिखलाई
कहते रवि कविराय ,दिखावा फिर से ढोना
फिर से बाजा- बैंड , गया नाचो कोरोना
☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[15/12/2020, 5:09 PM] Ravi Prakash: *अक्षर (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🌱🍂🍃🍂🍃
अक्षर कम मत आँकिए ,अक्षर ब्रह्म समान
इनमें जीवन बस रहा ,इनमें. बसती जान
इनमें बसती जान , शब्द अक्षर के मेले
शब्दों के संयोग , काव्य के रँग अलबेले
कहते रवि कविराय ,साधना देती अवसर
जुड़ जाता ब्रह्मांड ,श्रेय तुमको है अक्षर
🍁☘️🍁☘️🍁🌻☘️🍁☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
********************************
*अक्षर =* वर्णमाला का कोई स्वर या व्यंजन वर्ण , जिसका कभी नाश न हो
[15/12/2020, 8:02 PM] Ravi Prakash: *आँसू (कुंडलिया)*
🌻☘️🍁🌻☘️🍁🌻☘️🍁
आँसू से बढ़कर नहीं ,समझो कोई मीत
ढुलका तो फिर बन गया ,आहें भरता गीत
आहें भरता गीत ,हृदय की व्यथा सुनाता
जो भीतर की बात ,जगत तक यह पहुँचाता
कहते रवि कविराय ,ठहर जाता तो धाँसू
बन जाता चट्टान , दर्द का साथी आँसू
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/12/2020, 8:12 PM] Ravi Prakash: *अधूरी चाहतें (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
रही अधूरी चाहतें , थोड़ी सब के साथ
रोज लकीरें देखते , लेकर अपना हाथ
लेकर अपना हाथ ,भाग्य सबको कम देता
लिखकर सौ सुख रोज ,एक वापस ले लेता
कहते रवि कविराय , चाह से रहती दूरी
दो अंगुल का फर्क , भले हो रही अधूरी
🌻🌺🌻🌸🌻🌺🌻🍀🍀🌻
*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 999761 5451
[15/12/2020, 8:14 PM] Ravi Prakash: *लेखनी (कुंडलिया)*
🍂🍃🌸🍂🍃🌸🍂🍃🌸
कर में देकर लेखनी ,प्रभु ने किया कमाल
अगर न होती लेखनी ,लिखता कैसे हाल
लिखता कैसे हाल ,इधर दिनकर उग आया
उधर हृदय का भाव ,शब्द पाकर उमड़ाया
कहते रवि कविराय ,रची रचना क्षणभर में
ईश्वर तुझे प्रणाम , लेखनी सौंपी कर में
☘️🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[16/12/2020, 11:41 AM] Ravi Prakash: *उर (कुंडलिया)*
🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻
उर में देखा झाँककर , किसने अंतर्नाद
चला जगत यह यंत्रवत ,दुख के दो दिन बाद
दुख के दो दिन बाद ,रही पीड़ा अनजानी
जग ने सौंपे शब्द , सांत्वना भरी कहानी
कहते रवि कविराय ,न लौटा जीवन सुर में
जो भीतर का घाव ,लगा कब सूखा उर में
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🪶🪶🪶
*उर =* हृदय ,मन ,छाती
[16/12/2020, 4:47 PM] Ravi Prakash: *विजय दिवस (कुंडलिया)*
🇳🇪🇳🇪🇳🇪🇳🇪🇳🇪🇳🇪🇳🇪
जीता बांग्लादेश था , हारा पाकिस्तान
विजय दिवस के शौर्य की ,गाथा सुनो महान
गाथा सुनो महान ,लाख ने किया समर्पण
सन इकहत्तर वर्ष , वीर भारत का दर्पण
कहते रवि कविराय ,पाक को लगा पलीता
अद्भुत था यह युद्ध ,न कोई अब तक जीता
★★★★★★★★★★★★★★
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 999761 5451
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
*पलीता =* बत्ती के आकार का बारूद लगा हुआ छोटा सा डोरा जिस को जलाने पर पटाखे आदि जलते हैं
[17/12/2020, 11:06 AM] Ravi Prakash: *कोहरा (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
छाया गहरा कोहरा , घेरे व्योम अनंत
ढक सूरज इसने लिया,अब कब दिखा ज्वलंत
अब कब दिखा ज्वलंत ,अराजकता ज्यों फैली
सब क्रम बेतरतीब , जगत की चादर मैली
कहते रवि कविराय , कोहरा पर इतराया
बोला मेरा राज , लोक पर देखो छाया
🪶🍁🪶🍁🪶🍁🪶🍁🪶
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
ज्वलंत = चमकता हुआ ,देदीप्यमान ,स्पष्ट
व्योम = आकाश
बेतरतीब = अव्यवस्थित ,क्रमरहित
[17/12/2020, 11:42 AM] Ravi Prakash: *ओढ़े रहो लिहाफ (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🌻🍂🍃🍂🍃
मन कहता है मत उठो ,ओढ़े रहो लिहाफ
जब तक सूर्य नहीं उगे ,मौसम तनिक न साफ
मौसम तनिक न साफ ,रिटायर जीवन होता
तब तन आलसखोर ,देर तक जमकर सोता
कहते रवि कविराय ,काम पर जाना रहता
मजबूरी मन-मार , उठो ! मन-मन से कहता
🪶🍁🪶🍁🌻🍁🪶🍁🪶🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[18/12/2020, 11:04 AM] Ravi Prakash: *ज्वार (कुंडलिया)*
🌱🌸🌱🌸🌱🌸🌱🌸🌱
सागर में ही है सदा , आता भीषण ज्वार
जब यह आता जानिए ,खतरा एक अपार
खतरा एक अपार , शांत यों बारहमासी
रहते हैं निश्चिंत , पर्यटक तट के वासी
कहते रवि कविराय ,बड़ी हो कितनी गागर
क्या जाने यह ज्वार ,किस तरह लाता सागर
🍃🍁🍃🍁🍃🍁🍃🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*ज्वार =* समुद्र के जल की खूब लहराते हुए आगे बढ़ने या ऊपर उठने की अवस्था
[18/12/2020, 4:16 PM] Ravi Prakash: *धरने ( कुंडलिया )*
🍃🍂🍃🍂🍃🌱
धरने में प्रिय आजकल ,मिलते हैं अखरोट
काजू किशमिश खाइए ,सब डंके की चोट
सब डंके की चोट ,डांस डीजे हैं बजते
मखमल गद्दा खास ,कैंप सुविधामय सजते
कहते रवि कविराय ,सैर जाओ यदि करने
मत जाना कश्मीर , चलो चलते हैं धरने
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/12/2020, 10:58 AM] Ravi Prakash: *अदरक वाली चाय (कुंडलिया)*
🍃🍂🌱🍃🍂🌱🍃🍂🌱
अदरक वाली चाय की ,सबको रहती चाह
सर्दी में अच्छी लगे , पीकर कहते वाह
पीकर कहते वाह ,अरे ! क्या चाय बनाई
जाड़ों की सौगात ,ठंड क्या खूब भगाई
कहते रवि कविराय ,नहीं हो पत्ती खाली
खौलाओ प्रिय चाय ,बनाओ अदरक वाली
🍁🌻🍁🌻🍁🌻🍁🌻🍁🌻
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/12/2020, 11:36 AM] Ravi Prakash: *दिहाड़ी (कुंडलिया)*
🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻
रोजाना ही हो रही ,शिमला वाली ठंड
घर में नैनीताल का ,मिला हुआ है दंड
मिला हुआ है दंड ,शीत नित बढ़ता जाता
मैदानी हम लोग ,कहाँ मौसम यह भाता
कहते रवि कविराय ,प्रभो आदेश सुनाना
सूरज आए रोज , दिहाड़ी है रोजाना
🍃🍃🍃🍂🍃🍃🍃🍂🍃🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

दिहाड़ी = दैनिक मजदूरी ,प्रतिदिन की उपस्थिति के आधार पर दिया जाने वाला वेतन
[19/12/2020, 11:57 AM] Ravi Prakash: *इमरती चखते-चखते (हास्य कुंडलिया)*
🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿
चखते रसगुल्ला रहें , गरम जलेबी रोज
हलवा लड्डू नुकतियाँ ,मिष्ठान्नों के भोज
मिष्ठान्नों के भोज , खीर का भोग लगाएँ
मालपुए है चाह ,काश ! प्रतिदिन मिल जाएँ
कहते रवि कविराय ,यही इच्छा बस रखते
आए अंतिम साँस ,इमरती चखते – चखते
🍃🍁🍃🍁🍃🌻🍃🍁🍃🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 615451
[19/12/2020, 1:19 PM] Ravi Prakash: *कविता क्या है ? (कुंडलिया)*
🍃🍃🍁🍁🍃🍃🍁🍁🍃🍃
कविता क्या है सोचिए ,शब्दों का बस खेल
शब्द कहाँ कैसे रखें ,किसका किससे मेल
किसका किससे मेल ,शब्द अनुशासन जीते
लय में गहरे डूब , भाव की मदिरा पीते
कहते रवि कविराय , सप्तरंगी ज्यों सविता
बन जाती है धूप ,बनाते कविगण कविता
🍃🌱🍃🌱🍃🌱🍃🌱🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*सविता =* सूर्य , सूरज
[19/12/2020, 1:25 PM] Ravi Prakash: *सीधे सरल किसान (कुंडलिया)*
🌸🟡🌸🟡🌸🟡🌸🟡🌸🟡
भ्रम में डूबे आजकल ,सीधे सरल किसान
बाँट विपक्षी-दल रहे , उनको अपना ज्ञान
उनको अपना ज्ञान , बुरा बाजार बताते
मनमर्जी से माल , बेचना अनुचित पाते
कहते रवि कविराय , लगे हैं नेता श्रम में
आ जाएँ यह काश ! कृषकगण थोड़ा भ्रम में

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/12/2020, 4:58 PM] Ravi Prakash: *बोले पति कंजूस (हास्य कुंडलिया)*
🍁🪶🌿🌼🌻🌹🌺🌱🌷
आती देखी ठंड तो , बोले पति कंजूस
पत्नी जी ! खुद को करें ,शिमला में महसूस
शिमला में महसूस ,समझ लें पर्वत पर हैं
खाएँ ठंडक खूब , भूलिए अपने घर हैं
कहते रवि कविराय , मुफ्त में मस्ती छाती
करते शिमला सैर , ठंड जैसे ही आती
🔵🔵🔵🔵🟡🟡🟡🟡
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/12/2020, 5:42 PM] Ravi Prakash: *जिनसे दूर नहान (हास्य कुंडलिया)*
🍃🌿🌱🌿🍃🌱🌿🌻🌱🍃
अभिनंदन उनका करें ,आलस में जो दक्ष
सर्दी में आए नहीं , जल के कभी समक्ष
जल के कभी समक्ष ,नहाकर नियम न तोड़ा
दस से पहले रोज ,नहीं बिस्तर को छोड़ा
कहते रवि कविराय ,शीत में उनका वंदन
जिन से दूर नहान ,सभी का है अभिनंदन
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/12/2020, 10:25 PM] Ravi Prakash: *हवाएँ सर्द निगोड़ी (कुंडलिया)*
🌺🌺🌸🌸🌺🌺🌸🌸🟡
थोड़ी कमरे की झिरी ,खुली रह गई रात
तेज हवा ने कर दिया ,सर्दी का आघात
सर्दी का आघात ,काम कंबल कब आया
ओढ़ा एक लिहाफ ,बदन तब जा गरमाया
कहते रवि कविराय ,हवाएँ सर्द निगोड़ी
ले लेती हैं प्राण , अगर आ जाएँ थोड़ी
🍃🍃🍃🌹🌹🍃🍃🍃🌹
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

झिरी = छोटा सुराख ,छेद ,किवाड़ आदि बंद करने पर भी जो थोड़ी-सी जगह रह जाती है और जिससे हवा आती है
[20/12/2020, 10:17 AM] Ravi Prakash: *दो पल के संयोग (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🌻🍃🍂🍃
सपने जैसी जानिए , जीवन की हर बात
वह दिन जो अब चल रहा ,या फिर गुजरी रात
या फिर गुजरी रात ,काल सब खेल खिलाता
कुछ से हुआ बिछोह ,जुड़ा नूतन कुछ नाता
कहते रवि कविराय ,कौन इस जग में अपने
दो पल के संयोग , सभी दो पल के सपने
🌹🌺🌷🌱🌹💐🌷🌱🌻🌻
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[20/12/2020, 5:33 PM] Ravi Prakash: *वाराणसी [कुंडलिया]*
🍃🌷🍃🌷🍃🌷🍃🌷🍃
वरुणा काशी की नदी ,अस्सी पावन घाट
इनसे है वाराणसी , अद्भुत नगर विराट
अद्भुत नगर विराट ,ज्ञान का दिव्य प्रदाता
भारत का यह केंद्र ,उच्च शिक्षा से नाता
कहते रवि कविराय ,तपस्या सेवा करुणा
जागृत जीवन मूल्य ,बनारस में ज्यों वरुणा
🌹🌺🌹🌺🌱🌺🌹🌺🌹
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 615451
∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆
*करुणा =* दया ,अनुकंपा ,वह भाव जो दूसरों का कष्ट देखकर उसे दूर करने हेतु उत्पन्न होता है
*वरुणा =* बनारस के समीप गंगा में मिलने वाली नदी
*अस्सी=* बनारस का प्रसिद्ध घाट
[21/12/2020, 9:29 AM] Ravi Prakash: *मास्कमय मेले (कुंडलिया)*
🌹🌹
मेले में जनता जुड़ी ,जन आपस में पास
मास्क लगाना लग रहा , जैसे हो परिहास
जैसे हो परिहास , मास्क जेबों में रखते
वरना कैसे लोग , स्वाद रसगुल्ला चखते
कहते रवि कविराय ,लोग कब रहे अकेले
सब परिचित अनजान ,मिले जब पहुँचे मेले
🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[21/12/2020, 11:12 AM] Ravi Prakash: *विहग (कुंडलिया)*
🍁🍁
उड़ते नभ में हैं विहग ,दोनों पंख पसार
मानो जाना चाहते ,दुनिया के उस पार
दुनिया के उस पार ,सदा मस्ती में जीते
इन्हें सुहाती वायु ,घूँट – भर जल बस पीते
कहते रवि कविराय ,जिधर मनचाहा मुड़ते
मिलता गगन असीम ,दूर ऊँचे तक उड़ते
🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*विहग =* पक्षी
[21/12/2020, 9:24 PM] Ravi Prakash: *कैलेंडर ( 2 कुंडलियाँ)*
🌻🌻
बासी कैलेंडर हुआ , एक साल के बाद
क्या-क्या बीता साथ में ,आता पल-पल याद
आता पल-पल याद , हमारा यह सह-राही
रहा बताता माह ,दिवस तिथि सब मनचाही
कहते रवि कविराय , हर्ष का अंत उदासी
नश्वर काल प्रवाह , वस्तु ताजी हर बासी
🌱🌱
आया कैलेंडर नया , लिए रूप अभिराम
इतराता करने लगा , खूँटी पर आराम
खूँटी पर आराम , मुग्ध जो भी यह पाता
घर दुकान पर देख ,हर्ष से भर-भर जाता
कहते रवि कविराय ,सतत क्रम चलता पाया
नए साल में भव्य , नया कैलेंडर आया
🌸🌸🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[22/12/2020, 11:06 AM] Ravi Prakash: *अनल (कुंडलिया)*
🌿🌱
सब से ज्यादा जानिए ,हुआ अनल का ताप
भट्टी जैसे जल रही , भीतर अपने आप
भीतर अपने आप ,पेट का इंजन चलता
खाकर ईंधन – भोज ,नेह से प्रतिदिन पलता
कहते रवि कविराय ,बनी है दुनिया जब से
सब आगों में आग ,पेट की ज्यादा सब से
🍂🍁🌷
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🪶🪶🪶🪶
*अनल =* पेट की अग्नि
[22/12/2020, 11:31 AM] Ravi Prakash: *दो प्रेमी (कुंडलिया)*
🌹🌹🌱
चलना अब संभव नहीं ,आगे जलधि अथाह
शायद अगले जन्म में ,पूरी हो अब चाह
पूरी हो अब चाह ,मिले दो पग चल पाए
पहुँचे कब पर पार , अधर में गए फँसाए
कहते रवि कविराय ,रहा काँटों पर पलना
हुआ प्रेम का अंत ,जगत ने रोका चलना
🌷🌷🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🪶
*जलधि =* समुद्र
[22/12/2020, 5:25 PM] Ravi Prakash: *देह का अंत जरूरी (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂
मुश्किल होता है सदा , ढोना जर्जर देह
जब ढोना मुश्किल लगे ,करिए तनिक न नेह
करिए तनिक न नेह , देह का अंत जरूरी
दुखद देह का दाह , किंतु होती मजबूरी
कहते रवि कविराय ,सभी का रोता है दिल
अपने जाते दूर , देखना होता मुश्किल
🌱🌸🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[22/12/2020, 5:26 PM] Ravi Prakash: *जीवन के सौ साल (कुंडलिया)*
🌹🌷🌸
जीने को सबको मिले ,जीवन के सौ साल
फिर आकर खाता रहा ,निर्मम पेटू काल
निर्मम पेटू काल , सुखद दो दिवस कहानी
ढल जाती फिर शाम ,छोड़ बचपना जवानी
कहते रवि कविराय , घूँट विष के हैं पीने
सौ – सौ लगते रोग , बुढ़ापा कब दे जीने
🌿🌱🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[22/12/2020, 9:21 PM] Ravi Prakash: *जंग आंदोलन यात्रा (कुंडलिया)*
🌻🌻🌼🌻🌻🌼🌻🌻
यात्रा पर मत जाइए , राहें हैं दुश्वार
जाएँ तो हों राह में ,पिकनिक को तैयार
पिकनिक को तैयार ,साथ लें भोजन-पानी
दिन-भर के फिर बाद ,सोच लें रात बितानी
कहते रवि कविराय ,ढेर राशन की मात्रा
चलिए लेकर साथ , जंग आंदोलन यात्रा
🌸🌱🌱🌱🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[22/12/2020, 10:40 PM] Ravi Prakash: *कचौड़ी गरम सुहाती (कुंडलिया)*
🟡🔵🟣🟡🔵🟣🟡🔵🟣
खाने को क्या चाहिए ,रोटी चावल दाल
चटनी पापड़ रायता ,आकर करे कमाल
आकर करे कमाल ,कचौड़ी गरम सुहाती
जिह्वा आलू और , वाह ! गंगाफल पाती
कहते रवि कविराय ,सुखी जीवन के माने
तन हो सेहतवान ,मिले हलवा नित खाने
🍁🍃🌱🍁🍃🌱🍁🍃🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[23/12/2020, 11:28 AM] Ravi Prakash: *कुमुद (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🍂
कोई बोला यह कुमुद ,रखा कुमुदिनी नाम
खिलना केवल रात भर ,रहता मेरा काम
रहता मेरा काम ,कमल कब पुष्प कहाया
कब माना आराध्य ,पास में जो भी आया
कहते रवि कविराय ,कुमुदिनी रहती खोई
दोयम दर्जा मात्र ,पद्म कब कहता कोई
🌸🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🌱🌱
*कुमुद =* कमल के समान एक जलीय पौधा जिसमें सफेद फूल रात के समय खिलते हैं
*कुमुदिनी =* कुमुद , वह स्थान जहाँ बहुत से कुमुद हों
[23/12/2020, 1:49 PM] Ravi Prakash: *25 दिसंबर विशेष*
🍁🌻🌼🍁🌻🌼
*रवि प्रकाश की तीन कुंडलियाँ*
🌱🌻🌱🌻🌱
( *1* )
*रत्न द्वय*
माथा भारत का हुआ ,ऊँचा जिनसे और
“मालवीयजी” थे “अटल”,भारत के सिरमौर
भारत के सिरमौर , गीत भारत के गाते
हिंदी हिंदुस्तान , धर्म का ध्वज फहराते
कहते रवि कविराय ,रत्न द्वय की शुभ गाथा
धन्य – धन्य पच्चीस , दिसंबर ऊँचा माथा

( *2* )
*महामना मदन मोहन मालवीय*
गाता जिनकी कीर्ति नभ ,महामना अभिराम
हिंदू यूनीवर्सिटी , जिनका अद्भुत काम
जिनका अद्भुत काम ,देश के सच्चे प्रहरी
संस्कृति धर्म समाज ,समझ रखते थे गहरी
कहते रवि कविराय , धन्य है भारत माता
रोम – रोम अविराम ,पुत्र जिनके गुण गाता

( *3* )
*अटल बिहारी वाजपेई*
अटल बिहारी से बड़ा ,जनसेवक था कौन
सेवा एक सपूत बन , करते रहते मौन
करते रहते मौन , हिंद – हिंदी के गायक
युद्ध शांति के दौर ,सभी में प्रिय जन नायक
कहते रवि कविराय ,न कोई उन पर भारी
वक्ता थे बेजोड़ , अनूठे अटल बिहारी
🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश )*
*मोबाइल 99976 15451*
[23/12/2020, 8:39 PM] Ravi Prakash: *प्रशंसक (कुंडलिया)*
🌹🌷🌹🌷🌹🌷
रखिए पलकों पर सदा ,मधुर प्रशंसक लोग
मिलना जीवन में हुआ ,इनका मधु – संयोग
इनका मधु – संयोग , उचित उत्साह बढ़ाते
इन से मिलकर धन्य ,गुणी सज्जन हो जाते
कहते रवि कविराय ,गरल यदि कह दें चखिए
इनको करें प्रणाम ,शीश पर हरदम रखिए
🌱🌸🌱🌸🌱🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[24/12/2020, 8:57 AM] Ravi Prakash: *बच्चे (कुंडलिया)*
🍃🍂🌸🍁🌺
बच्चे यह ही चाहते , हो बच्चों का संग
खेलें कूदें मौज लें , भरें जगत में रंग
भरें जगत में रंग ,साथ कुछ नृत्य रचाएँ
कुछ आपस में हास ,तनिक झगड़े हो जाएँ
कहते रवि कविराय , उम्र के होते कच्चे
सच्चे मन के वाह , वाह ! क्या होते बच्चे
🌱🌿🌹🌱🌿🌹
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[24/12/2020, 11:30 AM] Ravi Prakash: *घनश्याम (कुंडलिया)*
🌻🌹🌻🌹🌼🌼
रट-रटकर किसको मिले ,श्री कृष्ण घनश्याम
आडंबर से पा सका , कब कोई श्री राम
कब कोई श्री राम ,हृदय कब भाषा गाता
मन में उमड़ा भाव , श्रेष्ठ पूजा बन जाता
कहते रवि कविराय , भक्त पाते हैं घटकर
खो जाते जब शब्द ,नहीं मिलते रट-रटकर
🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश*, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*घनश्याम =* कृष्ण ,काले बादल
[24/12/2020, 2:07 PM] Ravi Prakash: *रवि प्रकाश की दो हास्य कुंडलियाँ*
🌹🌷🌹🌷
( *1* )
*दूसरी शादी*
फिर से मन दूल्हा बना ,हुई आयु जब साठ
तन नर्तन करने लगा , प्रेम-गीत का पाठ
प्रेम-गीत का पाठ ,छींट की शर्ट सुहाती
दुनिया बोली शर्म ,बुढ़उ को अरे ! न आती
कहते रवि कविराय ,चढ़ा यों पानी सिर से
देकर प्रथम तलाक , रचाई शादी फिर से
🌺🌸🌺🍁🌹🌷🍁🌷🌹🌸
( *2* )
*बेचारे पतिदेव*
खाते श्री पतिदेव हैं ,पत्नी जी से डाँट
अंदर की यह बात है ,पड़ते अक्सर चाँट
पड़ते अक्सर चाँट ,चोट बेलन पहुँचाता
कर्कश रौद्र स्वरूप ,रहा हर समय डराता
कहते रवि कविराय ,सात जन्मों के नाते
बीत रहे दिन-रात ,मार पत्नी से खाते
🪶🪶🪶🪶💐🪶🪶🪶🪶
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )मोबाइल 99976 15451
[25/12/2020, 11:06 AM] Ravi Prakash: *क्रिसमस (कुंडलिया)*
🌸🌱🍁🌸🌱🍁
आओ देखें चर्च में , क्रिसमस खुशी अपार
वसुधा एक कुटुंब है , बैठें करें विचार
बैठें करें विचार , जन्म ईसा सुखदाई
सत्य प्रेम बलिदान , राह जिसने दिखलाई
कहते रवि कविराय , चलो त्यौहार मनाओ
मानवता अविभाज्य ,साथ सब मिलकर आओ
🪶🪶🍁🪶🪶🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[25/12/2020, 11:41 AM] Ravi Prakash: *आर्य (कुंडलिया)*
🌹🌷🌹🌸🌿🌸🌹🌷🌹
वेदों को फिर से पढ़ें , गाएँ गीता ज्ञान
याद करें वह आर्य जन ,जो थे शुभ्र महान
जो थे शुभ्र महान , बनें फिर उनके जैसे
ऋषियों का यह देश ,तपस्वी कैसे – कैसे
कहते रवि कविराय ,करें विस्मृत भेदों को
विश्व बनाएँ आर्य ,शीश पर धर वेदों को
🌱🌺🌱🌸🌱🌺🌱🌸🌱🌺
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🍁🍁🪶🪶🍁🍁
*आर्य =* श्रेष्ठ ,उत्तम ,पूज्य ,योग्य ,
वैदिक कालीन प्राचीन भारत आर्यावर्त के निवासी
[25/12/2020, 2:34 PM] Ravi Prakash: चंदौसी निवासी हमारे पूजनीय मौसा जी तथा मौसी जी *_श्री सोम प्रकाश अग्रवाल_* तथा *_श्रीमती कुसुम देवी अग्रवाल_* को सोने की सीढ़ी चढ़ने के उपलक्ष्य में हृदय से बधाई

*सीढ़ी सोने की (कुंडलिया)*
💐🌹🌷🌿🌷🌹💐
सोने की सीढ़ी चढ़े ,जग में लोग महान
मेरा परपोता हुआ ,अब मेरा अभिमान
अब मेरा अभिमान ,प्रथा भारत यह गाता
बेटे – पोते साथ , संग रहता सब नाता
कहते रवि कविराय ,बधाई खुश होने की
सौ – सौ बार प्रणाम ,चढ़े सीढ़ी सोने की
🌸🌿🌸🌿💐🌿🌸🌿🌸
रचयिता :रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा,रामपुर (उत्तर प्रदेश)मोबाइल 99976 15451
[25/12/2020, 11:09 PM] Ravi Prakash: 🍁 *रवि प्रकाश की* 🍁
*श्रृंगार रस की पाँच कुंडलियाँ*
🌹🌸🌿🌸🌹💐💐
( *1* )
🌹 *प्यार* 🌹
जाता जब नर लाँघकर ,सौ-सौ सागर पार
मिलता तब सौभाग्य से ,उसको कोई प्यार
उसको कोई प्यार ,नेह मुश्किल से मिलता
सुरभि भरा हो फूल ,एक जीवन में खिलता
कहते रवि कविराय ,तरंगों का यह नाता
भले दूर हो पास ,तृप्त जीवन हो जाता

( *2* )
🌹 *आँखें* 🌹

दिखलाना आँखें नहीं ,दुनिया बड़ी खराब
नेत्र तुम्हारे प्रिय जलधि ,मानो भरी शराब
मानो भरी शराब , लोग सब पीने वाले
करना मत विश्वास ,सभी हैं दिल के काले
कहते रवि कविराय ,आँख से आँख मिलाना
पलक खोलकर मस्त ,मुझे जादू दिखलाना

( *3* )
🌹 *ओ प्रिय* 🌹

काली – काली ज्यों घटा , लटके लंबे बाल
रूप सलोना मद – भरा , गोरे – गोरे गाल
गोरे – गोरे गाल , नाक में मोती गहने
सजग सुहानी चाल , पैर में पायल पहने
कहते रवि कविराय ,न आना ओ प्रिय खाली
लाना मधु मुस्कान ,शाम जब ढलती काली

( *4* )
🌹 *मन का मीत* 🌹
पाया किसने है यहाँ ,मन का चाहा मीत
जिसके सँग हँस-गा सकें ,जीवन के संगीत
जीवन के संगीत , अधर की भाषा जाने
दिल वीणा के तार , बजें तो झट पहचाने
कहते रवि कविराय , अधूरी रहती काया
आत्मा रही अपूर्ण , जन्म यह खोया पाया

( *5* )
🌹 *साथी* 🌹
साथी ईश्वर का दिया , होता है सौगात
इसके सँग जगमग हुई ,रजनी और प्रभात
रजनी और प्रभात ,मुदित जीवन महकाते
हँसते – गाते साथ , रंग यों भरते जाते
कहते रवि कविराय , मस्त ज्यों रहते हाथी
जीवन जीते झूम , सदा मस्ती में साथी
🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
*जलधि =* समुद्र
*रजनी =* रात
*प्रभात =* सुबह
[26/12/2020, 10:21 AM] Ravi Prakash: *बीत रहे दिन-रात ( कुंडलिया )*
🌱🌻🌱🌻🍂🍃🌻🌱🌻🌱
थोड़े दिन की देह है ,थोड़े दिन घर – बार
थोड़े दिन ही के लिए , मिलता यह संसार
मिलता यह संसार , सभी से थोड़ा नाता
थोड़े दिन के बाद , छोड़ हर कोई जाता
कहते रवि कविराय ,काल कब किसको छोड़े
बीत रहे दिन – रात , सोचिए थोड़े – थोड़े
🌿🌸🌿🌸🌿🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* , _बाजार सर्राफा_
_रामपुर (उत्तर प्रदेश)_
मोबाइल 99976 15451
[26/12/2020, 12:10 PM] Ravi Prakash: *सूर्य राजा (कुंडलिया)*
🌻🍁🍂🍃🍂🍁🌻
जागा सूरज खिल उठी ,मीठी – मीठी धूप
पलकों के पट ज्यों खुले ,दिखता शुभ्रा रूप
दिखता शुभ्रा रूप , कोहरा अब कब छाया
बिखरा था संगीत , गीत धरती ने गाया
कहते रवि कविराय ,चोर जाड़ा कह भागा
होकर अश्व सवार , सूर्य राजा है जागा
🌱🌼🌻🌼🌱🌿🌿🌿🌿🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🌺🪶🪶🪶🌺🪶🪶🪶🌺
*पट =* पर्दा , किवाड़ का पल्ला ,वस्त्र
[26/12/2020, 10:31 PM] Ravi Prakash: *एक जनवरी (कुंडलिया)*
🌱🌿🌸🌻🌹🌻🌸🌿🌱
आया कैलेंडर नया , सबके घर में आज
माह शुरू जब जनवरी ,घर-घर यही रिवाज
घर – घर यही रिवाज , रोजमर्रा का नाता
किस दिन क्या तारीख ,सिर्फ यह ही बतलाता
कहते रवि कविराय , वर्ष नव ऐसे भाया
गया दिसंबर माह , जनवरी हँसकर आया
🪶🪶🪶🌺🌺🪶🪶🪶
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/12/2020, 10:46 PM] Ravi Prakash: *मटर कचौड़ी (कुंडलिया)*
🌿🌱🌻🌿🌱🌻🌿🌱🌻
हुई कचौड़ी स्वादमय ,भरी मटर जब मस्त
जाड़ों में गृहणी सुघड़ ,दिखतीं इसमें व्यस्त
दिखतीं इसमें व्यस्त ,मटर का स्वाद निराला
भूना जाता तेज , मसाला जाता डाला
कहते रवि कविराय ,शीत – लहरी जब दौड़ी
घी का चढ़ा कढ़ाह , मटर की हुई कचौड़ी
🍃🍀☘️🍃🍀☘️🍃🍀☘️🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[27/12/2020, 12:16 PM] Ravi Prakash: *नीड़ ( कुंडलिया )*
🍂🍃🍂🍃🍂
पाते हैं सौभाग्य से , पक्षी अपना नीड़
मानव को कब घर मिला ,मिलती केवल भीड़
मिलती केवल भीड़ , अभागे फुटपाथों पर
रहे घुमंतू रोज , टिके रहते हाथों पर
कहते रवि कविराय , सुखी दिखने में आते
बँगले आलीशान , किंतु घर कब बन पाते
🌱🪶🌱🪶🌱🪶
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*नीड़ =* घोंसला
[27/12/2020, 7:27 PM] Ravi Prakash: *तस्वीरें बस शेष (कुंडलिया)*
🌺🌺🌺🍃🌺🌺🍃🍃
जिनके सँग बीते सभी ,जीवन-क्षण अभिराम
एक – एक कर चल दिए ,परम मोक्ष के धाम
परम मोक्ष के धाम , रह गई सिर्फ कहानी
तस्वीरें बस शेष , एलबम अब अनजानी
कहते रवि कविराय , नदी में जैसे तिनके
बहा ले गई वायु , चिन्ह जितने थे जिनके
🪶🪶🍃🪶🪶🌺
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[28/12/2020, 9:48 AM] Ravi Prakash: *दही 【कुंडलिया】*
🌼🌼🌼🌻🌼🌼🌼
खाओ रोजाना दही , सेहत का यदि ख्याल
गुणकारी यह सर्वदा , रखता ठंडा भाल
रखता ठंडा भाल , स्वाद में मस्त निराला
इससे बनता वाह ! , रायता नुकती वाला
कहते रवि कविराय ,मुदित खाकर हो जाओ
चखो दही की चाट ,दही का भल्ला खाओ
☘️🍁🍀🍁☘️🍀🍁☘️🍀🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*भाल =* माथा
[28/12/2020, 12:24 PM] Ravi Prakash: *चली सुकुमारी खोई (कुंडलिया)*
🌼🍃🍂🌿🌱🌿🍂🍃🌼
मिलने को प्रिय से चली ,लेकर सुंदर चाव
दर्शाती अंतर कहाँ , रखती गोपन भाव
रखती गोपन भाव ,नहीं पढ़ पाए कोई
मन में प्रिय की याद ,चली सुकुमारी खोई
कहते रवि कविराय ,प्रेम-रस में खिलने को
ढके पलक से नेत्र , चली गोरी मिलने को
🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🌿🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*गोपन =* छुपाने का भाव ,छिपाना ,बात छुपा कर रखना
[28/12/2020, 4:09 PM] Ravi Prakash: *रवि प्रकाश की दो हास्य कुंडलियाँ*
🍃🍂🍃🍂🍃🌻🍃🍂🍃
( *एक* )
*मैडम कितनी आयु है ?*
🌸🌺🌸🌺🌿🌸🌺🌸🌺🌸
बतलाया हरगिज़ नहीं ,कभी जन्म का साल
मैडम कितनी आयु है ? ,लगता बुरा सवाल
लगता बुरा सवाल , उम्र घट – घट कर काटी
बतलाना कम वर्ष , जिंदगी की परिपाटी
कहते रवि कविराय , रिटायर-दिन जब आया
अब सेवानिवृत्त , रजिस्टर ने बतलाया

( *दो* )
*बेचारी नमकीन*
🌹🍁🍁🌹🍁🍁🌹🍁🍁🌹
रोती जीवन भर रही , बेचारी नमकीन
हर मौके पर रह गई ,मिष्ठान्नों से हीन
मिष्ठान्नों से हीन ,खुशी का अवसर आता
लड्डू देते बाँट ,समोसा कौन खिलाता
कहते रवि कविराय ,कद्र मीठे की होती
दालमोठ बेकार ,सुअवसर पर हर रोती
🪶🪶🍃🪶🪶🍃🪶🪶🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश) मोबाइल 9997615451
[28/12/2020, 5:07 PM] Ravi Prakash: *नेतागर्दी (हास्य कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
नेतागर्दी का मजा , सुबह दोपहर शाम
चले झुंड में घूमने , रोजाना का काम
रोजाना का काम ,व्यर्थ कुछ प्रश्न उठाते
अफसर से बेबात ,बात में लड़-लड़ जाते
कहते रवि कविराय , भले हो गर्मी सर्दी
कब देखा दिन-रात , कार्य जब नेतागर्दी
🌱🌺🌻🌼🌻🌺🌱
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/12/2020, 2:31 PM] Ravi Prakash: *कृष्ण लीला (कुंडलिया)*
🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁
बच्चे मिलकर खेलते ,कंदुक लेकर खेल
कंदुक यमुना में गई ,हुआ खेल सब फेल
हुआ खेल सब फेल ,कृष्ण की लीला न्यारी
भागा कालिय नाग ,छोड़कर यमुना प्यारी
कहते रवि कविराय ,गाँव गोकुल के सच्चे
रचा एक इतिहास ,नमन द्वापर के बच्चे
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🪶🪶🪶
कंदुक = गेंद
[29/12/2020, 7:00 PM] Ravi Prakash: *रात (कुंडलिया)*
🌻🌼🌻🌼🌱🍂🌺🍁
सबसे अच्छी जानिए ,जग में होती रात
रात मधुर है इसलिए ,नित्य नींद की बात
नित्य नींद की बात ,रात का चाँद सुहाना
जगमग तारक व्योम ,रूप इसका मस्ताना
कहते रवि कविराय ,बनी है दुनिया जब से
सबको लगती रात ,जगत में प्यारी सबसे
🪶🪶🪶🍃🪶🍂🌱🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
“”””””””””‘”””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*तारक =* तारों से भरा
*व्योम =* आकाश
[29/12/2020, 7:47 PM] Ravi Prakash: *रवि प्रकाश की दो हास्य कुंडलियाँ*
🍁🌻🌱🍁🌻🌱🍁🌻🌱
( *एक* )
*कितने करें डिलीट ?*
बेगारी के हो गए , रोजाना मजदूर
प्रियजन फोटो भेजते , हम उनसे मजबूर
हम उनसे मजबूर , ढेर फोटो हैं आते
कितने करें डिलीट?,हाथ थक-थक हैं जाते
कहते रवि कविराय , समस्या गहरी भारी
दया करो हे मित्र , कराओ मत बेगारी
( *दो* )
*सोते रहो*
सोने में आता मजा , जगना है बेकार
सोओ चादर तानकर ,जब आए रविवार
जब आए रविवार ,न घर से बाहर जाना
सोते रहो अपार ,चाय बिस्तर पर पाना
कहते रवि कविराय ,नर्क बिस्तर खोने में
सुख है स्वर्ग समान ,आँख मींचे सोने में
🪶🪶🌻🌼🪶🪶
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
====€€====================
*बेगारी =* बिना वेतन दिए कराया जाने वाला काम
*डिलीट =* व्हाट्सएप पर आने वाले फोटो और वीडियो को डिलीट करने की समस्या
[29/12/2020, 8:24 PM] Ravi Prakash: *धूप (कुंडलिया)*
🍂🍃🍂🍃🌺🍃🍂🍃🍂
खाते सर्दी में सुखद , गरम सुहानी धूप
खिल-खिल जाता है बदन ,चढ़-चढ़ जाता रूप
चढ़-चढ़ जाता रूप ,स्वर्ग सुविधा ज्यों मिलती
धन्य – धन्य हैं भाग्य ,धूप जिनके घर खिलती
कहते रवि कविराय , अभागे आग जलाते
भाग्यवान हैं मस्त , धूप फोकट में खाते
🌼🌼🌼🌻🌻🌼🌼🌼
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/12/2020, 9:37 PM] Ravi Prakash: *सूर्य का जन्म-मरण (कुंडलिया)*
🌻🌻🌻🌼🌼🌼🌻🌻🌻
रोजाना होता मरण , सूरज जाता डूब
अद्भुत यह दुनिया रची ,सोचो तो क्या खूब
सोचो तो क्या खूब ,सुबह फिर पैदा होता
दिन-भर रहती धूप ,रात को फिर जग सोता
कहते रवि कविराय , सूर्य का चक्र पुराना
रोज हो रहा जन्म , मृत्यु होती रोजाना
🌺🍃🍂🌺🍃🍂🌺🍁🍁🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/12/2020, 9:46 PM] Ravi Prakash: *रोग (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂☘️🍀🌿🌱☘️
रोगों से घिरता मनुज ,तन को लगती जंग
रोगी तन होता जहाँ ,रहती कहाँ उमंग
रहती कहाँ उमंग ,हुई जब जर्जर काया
कहाँ लुभाते भोज ,व्यर्थ लगती है माया
कहते रवि कविराय , बचे रहिए भोगों से
तन वरना अभिशाप ,बोझ लगता रोगों से
🍁🌻🌺🌱🌱🌺🌻🍁🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/12/2020, 1:09 PM] Ravi Prakash: *अलि (कुंडलिया)*
🍁🍁🌻🌺🌸🌹🌷🌸🌸🌸
माना जाता है बुरा ,अलि का मस्त स्वभाव
बेचारा पर क्या करे ,कलियों का है चाव
कलियों का है चाव ,पुष्प से रहता नाता
मधुर गंध रस-युक्त ,चूमना प्रतिदिन भाता
कहते रवि कविराय ,मर्म साँसों का जाना
अलि में भरी उमंग ,मौज को जीवन माना
🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷☘️☘️
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🌺🌸🍁🍀🌿☘️
*अलि =* भौंरा
[30/12/2020, 1:40 PM] Ravi Prakash: *नश्वर 【कुंडलिया】*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
मरना सबको एक दिन ,आती सबको मौत
जीवन से इसका सदा , रिश्ता जैसे सौत
रिश्ता जैसे सौत , अचानक आ ले जाती
कभी रुग्ण कर देह , ढेर किस्तों में खाती
कहते रवि कविराय , मौत से हरदम डरना
नश्वर यह संसार , सुनिश्चित सबको मरना
🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

नश्वर =नाशवान
रुग्ण = बीमार
[30/12/2020, 2:37 PM] Ravi Prakash: *मजा सागर तरने में 【कुंडलिया】*
🍁🍀🍃🍂🍃🍂🍃🍂
करने में आता मजा ,केवल बड़ा शिकार
क्या छोटे को मारना ,क्या उससे तकरार
क्या उससे तकरार ,गजों से लड़ने जाओ
अगर वीरता-भाव ,सिंह से आँख मिलाओ
कहते रवि कविराय ,मजा सागर तरने में
छोटा – सा तालाब , पार क्या है करने में
🌸🌻🌸🌻🌸🌻🌸🌻🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️
*तरना =* नदी समुद्र आदि को पार करना
*गज =* हाथी
*तकरार =* झगड़ा
[31/12/2020, 10:15 AM] Ravi Prakash: *हँसना-रोना (कुंडलिया)*
🟡🔵🟡🔵🟣🔵🟡🔵🟡
हँसना – रोना जानिए , जैसे दिन या रात
हँसने के दो दिन मिले ,दो दिन आँसू-पात
दो दिन आँसू-पात ,समय सब खेल खिलाता
सुख के पीछे शोक ,शोक के बाद हँसाता
कहते रवि कविराय , लिखा पहले से होना
कठपुतली की भाँति , हमारा हँसना – रोना
🍁☘️🍁☘️🍁☘️🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*आँसू-पात =* अश्रु-पात ,आँसुओं का गिरना, आँसुओं का बहना
[31/12/2020, 10:18 AM] Ravi Prakash: *नया कलेंडर स्वागतम( कुंडलिया )*
🟡🟣🟡🌹🌱🟡🟣🟡
नया कलेंडर स्वागतम , देना मधुर विधान
सुख से घर भरता रहे ,आए नित मुस्कान
आए नित मुस्कान ,खुशी की खबरें लाना
रखो परस्पर मेल , हमें दिल से समझाना
कहते रवि कविराय ,प्रगति को देना नव-स्वर
विनती बारंबार , सुनो हे नया कलेंडर
🍁☘️☘️🍁🌹🌹🍁☘️☘️🍁
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर ( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[31/12/2020, 11:01 AM] Ravi Prakash: *नश्वर काया (कुंडलिया)*
🌱🌱🌺🌷🌱🌱
पाया जीवन का यही ,सरल गुह्यतम सूत्र
खाते मधुमय भोज हैं ,बनता है मल-मूत्र
बनता है मल-मूत्र , पेट है मल का थैला
बाहर उजला रूप , भरा भीतर है मैला
कहते रवि कविराय ,समझ लो नश्वर काया
दो दिन का संसार ,एक मेला ज्यों पाया
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*गुह्यतम =* अत्यंत गुप्त ,गहरा रहस्यमय
[31/12/2020, 12:13 PM] Ravi Prakash: *नैनीताल में नववर्ष (हास्य कुंडलिया)*
🍁☘️🍁🌱🌱🍁☘️🍁
सुनिए जब नव वर्ष में , बुरा हमारा हाल
किट – किट करते दाँत थे ,पहुँचे नैनीताल
पहुँचे नैनीताल , ठंड में जाकर जकड़े
रहे रूम में बंद , सिर्फ हीटर को पकड़े
कहते रवि कविराय ,करी गलती सिर धुनिए
ठिठुरे अकड़ी देह ,करुण गाथा मत सुनिए
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🪶🪶🪶🌹🌷🪶🪶
*रूम =* कमरा
*हीटर =* गर्मी /आग उत्पन्न करने वाला यंत्र
[31/12/2020, 2:26 PM] Ravi Prakash: *दैन्य ( कुंडलिया )*
🌸🌸☘️🌸🌸☘️🌸🌸☘️
मानी कब दुनिया उसे ,रहता मुखड़ा दैन्य
झुकती उसके सामने ,लिए सुसज्जित सैन्य
लिए सुसज्जित सैन्य ,शस्त्र-बल से जो भारी
जो डंके की चोट , ठोंकता दावेदारी
कहते रवि कविराय , रीति जानी – पहचानी
सागर ने कब बात ,विनय से प्रभु की मानी
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
*रचयिता : रविप्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99 97 61 5451
🪶🪶🪶🌸🪶🪶🪶
*दैन्य =* दीनता का भाव ,अपने को तुच्छ समझने का भाव ,नम्रता ,कातरता
[31/12/2020, 4:07 PM] Ravi Prakash: *घोटाले (कुंडलिया)*
🌱🌱🌸☘️☘️🌺🌿🍀
काम कराया कब गया ,पाया पर पेमेंट
फोकट में छिड़का गया ,मानो कोई सेंट
मानो कोई सेंट , वाह ! क्या हैं घोटाले
हो जाता भुगतान , व्यर्थ ही बैठे – ठाले
कहते रवि कविराय ,दौर अंधा-युग आया
फाइल बनी सबूत ,अमुक से काम कराया
🪶🪶🍁🪶🪶🍁🪶🪶
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️
सेंट = इत्र

7 Views
Copy link to share
Ravi Prakash
44 Posts · 657 Views
Follow 2 Followers
You may also like: