Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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102 कुंडलियां मई 2021

[01/05, 11:48 AM] Ravi Prakash: *पराजित की बीमारी (कुंडलिया)*
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*बीमारी छाई हुई , नभ में है अति घोर*
*अस्पताल मरघट चिता ,क्रम दिखता चहँ ओर*
*क्रम दिखता चहुँ ओर ,जहर से भरी हवाएँ*
*ज्यों ही दिखा शिकार ,दबोचें झट से खाएँ*
*कहते रवि कविराय ,सजग ने जंग न हारी*
*लिए शांत मुस्कान , पराजित की बीमारी*
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नभ = आसमान ,आकाश
मरघट = शमशान
सजग = सतर्क ,सावधान
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/05, 12:30 PM] Ravi Prakash: *हाथों का व्यायाम (हास्य कुंडलिया)*
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बर्तन फिर से मांजना ,झाड़ू फिर से काम
मस्ती में दिन कट रहे ,लेकर प्रभु का नाम
लेकर प्रभु का नाम ,लगाते प्रतिदिन पोछा
बिना प्रेस के वस्त्र ,पहनना लगा न ओछा
कहते रवि कविराय ,जिंदगी करती नर्तन
हाथों का व्यायाम ,मांजते फिर से बर्तन
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[02/05, 1:15 PM] Ravi Prakash: *महामारी (चार कुंडलियाँ)*
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*(1)बच जाए बस जान*
ऐसा मौसम चल रहा ,छूटा सारा मोह
सांसें तन से कर रहीं , रोजाना विद्रोह
रोजाना विद्रोह ,जान लगती बस प्यारी
कहते हैं जन आम ,धनिक कहते अधिकारी
कहते रवि कविराय ,लुभाता अब कब पैसा
बच जाए बस जान ,सभी का चिंतन ऐसा

*(2)सबसे सस्ती इन दिनों*
सबसे सस्ती इन दिनों ,लगती केवल जान
ऑक्सीजन मिलती नहीं ,बिना जान-पहचान
बिना जान – पहचान , बेड पर मारामारी
समझो एक अनार ,जनों को सौ बीमारी
कहते रवि कविराय , लोग भूले सब मस्ती
महंगी है मुस्कान , रुलाई सबसे सस्ती

*(3)बंधु मत निकलो घर से*
घर से निकले बेवजह ,मिस्टर अफलातून
सबसे बातें खूब की ,आदत से बातून
आदत से बातून ,मास्क कब ठीक लगाया
दुष्ट दानवी रोग , नाक में घुस – घुस आया
कहते रवि कविराय ,चढ़ा है पानी सर से
बिना जरूरी काम ,बंधु मत निकलो घर से

*(4) प्रभु जी बस यह चाह*
लेना सांसें कष्टप्रद ,आफत में है जान
क्या बीमारी भेज दी ,तुमने हे भगवान
तुमने हे भगवान ,कौन सी हवा चलाई
गला सूखता तेज ,सांस में दिक्कत आई
कहते रवि कविराय ,न सोना चांदी देना
प्रभु जी बस यह चाह ,चैन से सांसे लेना
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[02/05, 7:41 PM] Ravi Prakash: *हारे नंदीग्राम (कुंडलिया)*
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सेनापति हारा हुआ ,विजित किंतु संग्राम
जीत लिया बंगाल पर , हारे नंदीग्राम
हारे नंदीग्राम , अनोखा युद्ध कहाया
करुण अरे दुर्योग ,किसी ने कहीं न पाया
कहते रवि कविराय ,जीत कर भी अँधियारा
रोता देखो प्रात , कहा सेनापति हारा
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[02/05, 10:01 PM] Ravi Prakash: *नेपथ्य (कुंडलिया)*
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रहते हैं नेपथ्य में , जिनके सुंदर काम
नींवों के पत्थर सदृश ,उनको कोटि प्रणाम
उनको कोटि प्रणाम ,चेहरा पर कब दीखा
निरभिमानता भाव ,जगत ने उनसे सीखा
कहते रवि कविराय ,सदा गुमनामी सहते
धन्य – धन्य गुणवान , छिपे पर्दे में रहते
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नेपथ्य = रंगमंच पर पर्दे के पीछे का स्थान

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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[02/05, 11:05 PM] Ravi Prakash: *जीतीं ई वी एम बहन (कुंडलिया)*
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जीतीं ईवीएम बहन ,करो जीत स्वीकार
गीत तुम्हारे गा रहा ,अब विपक्ष शत बार
अब विपक्ष शत बार ,मलाई तुमसे पाई
तुम हो सत्ता स्रोत ,परम देवी सुखदाई
कहते रवि कविराय ,अन्यथा तुम विष पीतीं
धन्य तुम्हारा भाग्य ,धन्य दीदी तुम जीतीं
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘”
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[03/05, 9:48 AM] Ravi Prakash: *प्रधानपति (हास्य कुंडलिया)*
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बेचारी पत्नी बनी , लड़कर ग्राम – प्रधान
यों प्रधानपति बन गए ,श्री पतिदेव महान
श्री पतिदेव महान ,मिला पति का पद प्यारा
हस्ताक्षर को छोड़ ,इन्हीं का जलवा सारा
कहते रवि कविराय ,जीत की माला भारी
पहने श्री पतिदेव , श्रीमती जी बेचारी
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*जलवा* = रौनक , तड़क-भड़क
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[03/05, 12:31 PM] Ravi Prakash: *मटकी ( कुंडलिया )*
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मटकी – भर हड्डी बची , बोरी भरकर राख
सबकी यह बाकी रही ,शमशानों में साख
शमशानों में साख ,जलाए सब जन जाते
एक घाट पर लोग ,धनी-निर्धन सब आते
कहते रवि कविराय ,साँस धन-पद में अटकी
मर कर एक समान , हैसियत सब की मटकी
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मटकी = सामान्यतः मिट्टी का एक पात्र
जिसमें दाह-संस्कार के उपरांत मृतक की
अस्थियाँ या हड्डियाँ इकट्ठी की जाती हैं।
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[04/05, 11:10 AM] Ravi Prakash: *पैतृक एलबम (कुंडलिया)*
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रखता पैतृक एलबम , पावन पुत्र सँभाल
पुरखों की यादें जुड़ीं ,उनके चित्र विशाल
उनके चित्र विशाल ,कहाती स्मृति – मंजूषा
इससे मिलता ओज,खिलखिलाती ज्यों ऊषा
कहते रवि कविराय , दिव्य-रस मानो चखता
यादों को अनमोल , वस्तु के जैसे रखता
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
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*पैतृक* = पिता दादा परदादा से संबंधित, पुरखों से संबंधित माता पिता ताऊ चाचा आदि से संबंधित
*मंजूषा* = पिटारी , संदूक
*ऊषा* = सूरज निकलने से पहले का समय ,प्रभात ,सुबह
[04/05, 11:53 AM] Ravi Prakash: *पाजामा जिंदाबाद (हास्य कुंडलिया)*
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पाजामा-बनियान की ,फिर से जिंदाबाद
लगा लॉकडाउन जहां ,पैंट-शर्ट कब याद
पैंट-शर्ट कब याद ,शेव अब कौन बनाए
चप्पल जय-जयकार ,काम में टूटी आए
कहते रवि कविराय ,बंद हैं घर में मामा
करते टेलीफोन ,पहन दिन-भर पाजामा
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*रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
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[04/05, 1:42 PM] Ravi Prakash: *प्रीत (कुंडलिया)*
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दो अक्षर का शब्द है , सबसे सुंदर प्रीत
साथी सहयात्री मधुर ,कहलाते हैं मीत
कहलाते हैं मीत , उगा सविता ले आते
अंधकार के दौर , न छू उनको फिर पाते
कहते रवि कविराय ,नहीं क्षय उनके घर का
बसा हुआ है प्रीत ,जहाँ पर दो अक्षर का
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प्रीत = प्रेम ,प्यार ,दोस्ती ,मोहब्बत
सविता = सूर्य
मीत = मित्र ,दोस्त
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[04/05, 6:03 PM] Ravi Prakash: *बढ़ती जनसंख्या ( कुंडलिया )*
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बढ़ती जनसंख्या सुनो ,दुख का कारण एक
संसाधन छोटे पड़े , विपदा का अतिरेक
विपदा का अतिरेक , महामारी बेकाबू
किंकर्तव्यविमूढ़ , सभी अधिकारी बाबू
कहते रवि कविराय ,समस्या सर पर चढ़ती
रोको बच्चे आठ ,रोज आफत यह बढ़ती
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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विपदा = मुसीबत , परेशानी
अतिरेक = आवश्यकता से अधिक होना
किंकर्तव्यविमूढ़ = कुछ समझ में ही नहीं आना ,दुविधा में पड़ जाना ,भौचक्का या अवाक रह जाना
[04/05, 8:40 PM] Ravi Prakash: *करिए स्वयं बचाव (कुंडलिया)*
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बीमारी से आजकल ,करिए स्वयं बचाव
बाढ़ नदी में आ चुकी ,क्या कर लेगी नाव
क्या कर लेगी नाव ,सभी संसाधन छोटे
परेशान सब लोग , भले पतलू या मोटे
कहते रवि कविराय ,चार दिन की लाचारी
रखो धैर्य कुछ रोज ,रहा कब स्वेच्छाचारी
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[04/05, 10:25 PM] Ravi Prakash: *काश भिंडी बिक जाएँ (कुंडलिया)*
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ढोता है मजबूरियां ,तन ही तन का भार
गठरी को सर पर रखे ,चलने को तैयार
चलने को तैयार ,काश ! भिंडी बिक जाएँ
दो पैसे की आय , जेब में लेकर आएँ
कहते रवि कविराय ,वृद्ध बदकिस्मत रोता
किंतु हाय असहाय ,देह जर्जर को ढोता
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[05/05, 5:23 PM] Ravi Prakash: *चला असुर सम्राट (कुंडलिया)*
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बदला लेने चल पड़ा ,असुर शक्ति का रूप
बोला केवल पूज्य मैं ,मैं धरती का भूप
मैं धरती का भूप ,बना नर – सुर संहारी
बही रक्त की धार , भयंकर मारामारी
कहते रवि कविराय ,कष्ट सज्जन को देने
चला असुर सम्राट ,खड्ग ले बदला लेने
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
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🌿रचना तिथि : 5 मई 2021🌿
[06/05, 10:50 AM] Ravi Prakash: *शव अर्थी शमशान (कुंडलिया)*
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जाते हैं संसार से , जब सब मानव छोड़
कैसे फिर रह पाएँगे , हम – तुम बैठे जोड़
हम-तुम बैठे जोड़ , एक दिन होगा जाना
शव अर्थी शमशान , पुराना क्रम रोजाना
कहते रवि कविराय ,मृत्यु सब जन हैं पाते
किसकी रही विभूति ,छोड़ सब जग से जाते
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*विभूति* = वैभव ,ऐश्वर्य ,धन-संपत्ति ,प्रभुता
दिव्य-शक्ति ,समृद्धि ,महत्ता-बड़प्पन
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_रचयिता_ : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[06/05, 11:04 AM] Ravi Prakash: *मिला सुपरिचित शून्य (कुंडलिया)*
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आए प्रभु करके कृपा , इतने दिन के बाद
रोज निरंतर कर रहा , तुमको ही था याद
तुमको ही था याद ,धन्य जो तुमको पाया
मिला तुम्हारा प्यार ,ध्यान की अद्भुत माया
कहते रवि कविराय ,अलौकिक सुख फिर पाए
मिला सुपरिचित शून्य ,धन्य प्रभु जी तुम आए
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
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[06/05, 9:05 PM] Ravi Prakash: *तीसरी लहर (कुंडलिया)*
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डर लगता है सोचकर ,होगा क्या अंजाम
लहर चलेगी तीसरी , सुनते हैं जब नाम
सुनते हैं जब नाम ,स्वस्थ क्या रह पाएंगे
अस्पताल सु-प्रबंध , हाथ में क्या आएंगे
कहते रवि कविराय ,भाग्य बैरी है ठगता
कृपा करो हे नाथ ,खबर सुनकर डर लगता
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[07/05, 2:09 PM] Ravi Prakash: *नेता पागल हो गया (कुंडलिया)*
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नेता पागल हो गया ,लिए हुए तलवार
निर्दोषों का कर रहा ,निर्मम जनसंहार
निर्मम जनसंहार , विरोधी मारे जाते
लोकतंत्र असहाय ,बुद्धिजीवी चुप पाते
कहते रवि कविराय ,दुष्ट दारुण दुख देता
कर दो इसका अंत ,न मानो इसको नेता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[07/05, 10:05 PM] Ravi Prakash: *उच्छ्रंखलता (कुंडलिया)*
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उच्छ्रंखलता बढ़ रही ,बढ़ी हुई तकरार
झगड़ा समझो शीर्ष पर ,केंद्र-राज्य सरकार
केंद्र – राज्य सरकार ,अदालत की मनमानी
सत्ता और विपक्ष , कर रहे खींचातानी
कहते रवि कविराय ,न अंकुश कोई चलता
हुआ अराजक दृश्य , देश में उच्छ्रंखलता
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*रचयिता* : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 9997615451
[08/05, 1:39 PM] Ravi Prakash: *हुआ रोग विकराल (कुंडलिया)*
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कम हैं बेड-दवाइयां ,लगी हुई है आग
कालाबाजारी चरम , मानवता पर दाग
मानवता पर दाग ,दुखी जन मारे फिरते
हुआ रोग विकराल ,चक्र में यम के घिरते
कहते रवि कविराय ,नेत्र मरघट के नम हैं
लाशों के अंबार ,घाट जलने के कम हैं
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[08/05, 2:29 PM] Ravi Prakash: *गिद्ध जाति के लोग [कुंडलिया]*
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टपकाते लारें मिले ,गिद्ध-जाति के लोग
बोले पौ-बारह हुई ,लगा देश को रोग
लगा देश को रोग ,चलो अब खूब कमाएँ
कर दें किल्लत झूठ ,उपद्रव महा मचाएँ
कहते रवि कविराय ,दुष्ट लंबे दिख जाते
ऊंचे पद पर बैठ ,लार अपनी टपकाते
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रचयिता: रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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पौ बारह होना = खुशी मनाना
किल्लत = वस्तु की कमी
गिद्ध = एक पक्षी जो मुर्दा को खाता है
अतः जिसे लाशें देखना प्रिय होता है
[08/05, 8:34 PM] Ravi Prakash: *श्वेत कमल दिवस (कुंडलिया)*
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*आई आठ मई दुखद , एक आठ नौ एक*
*श्वेत कमल पावन दिवस ,यादों भरा अनेक*
*यादों भरा अनेक , ब्रह्मविद्या अभ्यासी*
*ब्लेवेट्स्की तुम धन्य ,ईश-दर्शन की प्यासी*
*कहते रवि कविराय ,थियोसॉफी अनुयाई*
*करते तुम्हें प्रणाम , चेतना तुमसे आई*
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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*मैडम हेलेना पेट्रोवना ब्लेवेट्स्की :* ( 12 अगस्त 1831 रूस – 8 मई 1891 लंदन )
आप अलौकिक चेतना संपन्न थीं। आपका संपर्क दिव्य महात्माओं से आया। इनके बारे में आपका कहना था कि जब आप युवा थीं ,तब भी वे महात्मा युवा थे और जब आप वृद्ध हो गईं, तब भी वे महात्मा युवा ही जान पड़ते थे । इन्हीं रहस्यमय महात्माओं की प्रेरणा से आपने 1875 में *थियोसोफिकल सोसायटी* की अमेरिका में स्थापना की । आप महान भारत भक्त थीं। भारत और तिब्बत में रहकर आपने अध्यात्म को गहराई से जाना था ।
तिब्बत के बौद्ध मठों में रहकर 1869 में आपने जो गुप्त-विद्या के साधकों हेतु तिब्बती भाषा में संकेत रूप से लिखित उपदेश-लेखों को पढ़ा और समझा ,उसे 1889 में *द वॉइस ऑफ साइलेंस* पुस्तक के रूप में संसार को प्रदान किया। “सीक्रेट डॉक्टरीन” आपकी लेखन-यात्रा का सर्वोच्च शिखर माना जाता है
दिसंबर 1880 में *बनारस-यात्रा* में *ताजे गुलाब के फूलों की वर्षा* करके आपने अपनी दिव्य-शक्ति से सबको चकित कर दिया था । काशी नरेश के महल में प्रवेश-द्वार पर *सत्यान्नास्ति परो धर्मः* शब्द आपको इतने पसंद आए कि आपने उसे थियोसॉफिकल सोसायटी के प्रतीक चिन्ह में शामिल कर लिया । इसका अर्थ है कि *सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है* । सत्य की खोज ही आपका और थियोसॉफिकल सोसायटी का मिशन है । गीता का पाठ आपको प्रिय था । सफेद कमल के फूल आपको विशेष पसंद थे। (लेखक :रवि प्रकाश)
[09/05, 11:53 AM] Ravi Prakash: *घर को लौटे राम (कुंडलिया)*
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जीती लंका स्वर्णमय , पर निर्लोभी राम
स्वर्ण लुभाया कब उन्हें ,बोले माँ अभिराम
बोले माँ अभिराम , जन्मभू जननी थाती
धन्य अयोध्या धाम ,गंध ममता की आती
कहते रवि कविराय ,बजा रघुकुल का डंका
घर को लौटे राम , छोड़कर जीती लंका
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थाती = धरोहर ,संचित धन
जननी = माँ , माता
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[09/05, 3:34 PM] Ravi Prakash: *फैला रोग अजीब – सा (कुंडलिया)*
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फैला रोग अजीब – सा , हवा हुई बदरंग
साँसें भी कैसे लड़ें , जीवन की अब जंग
जीवन की अब जंग ,मास्क से ढके-ढकाए
छिपे घरों में लोग ,काल से सब डर खाए
कहते रवि कविराय ,गगन का कण-कण मैला
कुदरत का अभिशाप ,न पहले ऐसा फैला
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रचयिता: रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[09/05, 3:40 PM] Ravi Prakash: *अपनी-अपनी ढपलियाँ ( कुंडलिया )*
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अपनी-अपनी ढपलियाँ ,अपने अपने राग
कौं-कौं-कौं-कौं कर रहे , जैसे सौ-सौ काग
जैसे सौ-सौ काग ,घोर कर्कश स्वर आते
भरे गले में दम्भ ,गान अपना सब गाते
कहते रवि कविराय ,सभी को माला जपनी
अहंकार से ग्रस्त ,देश में अपनी – अपनी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[09/05, 5:32 PM] Ravi Prakash: *हम बालक नादान (कुंडलिया)*
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रखिए सबको हे प्रभो ,सदा स्वस्थ सानंद
बरसे मुख पर दिव्यतम ,मधुरिम परमानंद
मधुरिम परमानंद , रोग छू कभी न पाए
साँसों पर प्रतिबंध , न आकर दुष्ट लगाए
कहते रवि कविराय,धैर्य मत अधिक परखिए
हम बालक नादान , गोद में हमको रखिए
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर( उत्तर प्रदेश )
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[09/05, 6:23 PM] Ravi Prakash: *हे प्रभो हमें बचाना (कुंडलिया)*
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रोजाना बीमार हो ,जग से जाते लोग
जाने कैसा आ गया ,मुआ कलमुँहा रोग
मुआ कलमुँहा रोग ,हवा में ऐसा फैला
निर्जन हैं बाजार ,रूप दर्पण में मैला
कहते रवि कविराय ,हे प्रभो हमें बचाना
पड़ें न हम बीमार ,प्रार्थना है रोजाना
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[10/05, 11:14 AM] Ravi Prakash: *जिएँ सभी सौ साल (कुंडलिया)*
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मंगलमय कर दो प्रभो ,जटिल जगत की राह
सरल सहज साँसें मिलें ,हर प्राणी की चाह
हर प्राणी की चाह , श्वास से ऊर्जा आए
जाए तो विश्राम , देह में छा – छा जाए
कहते रवि कविराय ,नहीं हो जीवन का क्षय
जिएँ सभी सौ साल ,काल गति हो मंगलमय
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[10/05, 11:24 AM] Ravi Prakash: *निरोगी सबको कर दो (कुंडलिया)*
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सब को प्रभु दो स्वस्थ तन ,सबको सुख का वास
सब को ही मिलती रहे , आती – जाती श्वास
आती – जाती श्वास , चैन सब जन नित पाएँ
रहे न कोई कष्ट , नित्य मुस्काते जाएँ
कहते रवि कविराय , करें नतमस्तक रब को
रहे नहीं बीमार , निरोगी कर दो सब को
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रब =परमात्मा
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[10/05, 11:44 AM] Ravi Prakash: *केंद्र – राज्य सरकार (कुंडलिया)*
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लड़ते हर दिन आजकल ,केंद्र-राज्य सरकार
तू – तू – मैं – मैं हो रही ,सरेआम बाजार
सरेआम बाजार , कौन राजा कहलाए
किस का क्या अधिकार ,प्रश्न प्रतिदिन गहराए
कहते रवि कविराय ,रोज निज जिद पर अड़ते
जन बेबस लाचार , देखते इनको लड़ते
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[10/05, 11:50 AM] Ravi Prakash: *कहाँ गए वह लोग (कुंडलिया)*
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सेवा – भाव उदार था ,विद्यालय का मूल
जनहित की थी कामना ,केवल एक उसूल
केवल एक उसूल ,धन्य विद्यालय खोला
धन्य – धन्य उत्साह , वायुमंडल में डोला
कहते रवि कविराय ,न चाही मिश्री – मेवा
कहाँ गए वह लोग ,लक्ष्य जिनका था सेवा
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[10/05, 3:35 PM] Ravi Prakash: *लतिका (कुंडलिया)*
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वन में होती है बड़े , पेड़ों की भरमार
बढ़ती है लतिका वहीं ,लिए गात सुकुमार
लिए गात सुकुमार ,गगन तक चढ़ती जाती
अपनी जगह विशेष ,भूमि से नभ तक पाती
कहते रवि कविराय ,पेड़ से बढ़कर मन में
दर्शक कहता वाह ,देखकर लतिका वन में
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लतिका = बेल ,छोटी लता
गात = शरीर
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[11/05, 8:28 AM] Ravi Prakash: *मर्म (कुंडलिया)*
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गाथा जीवन की सदा ,गाता तन का कर्म
रक्खा क्या सिद्धांत में ,यह कब जीवन – मर्म
यह कब जीवन-मर्म ,असल जो जीवन जीता
व्यर्थ मंत्र – उच्चार ,अर्थ बिन सब कुछ रीता
कहते रवि कविराय , गर्वमय वह ही माथा
कथनी के अनुरूप ,उच्च जो जीवन-गाथा
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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मर्म = रहस्य ,भेद ,स्वरूप
[11/05, 9:47 AM] Ravi Prakash: *गोधूलि बेला (कुंडलिया)*
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बेला है गोधूलि की , सबसे अधिक पवित्र
आती गाएँ लौटकर ,खिंचता अनुपम चित्र
खिंचता अनुपम चित्र ,समय संध्या का छाता
विदा ले रहा सूर्य ,रश्मि स्वर्णिम दे जाता
कहते रवि कविराय ,उपासक चला अकेला
भरे हृदय में मोद ,अहा ! अद्भुत क्या बेला
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*गोधूलि बेला* = जब गाएँ शाम को जंगल से लौटती हैं तो उनके पैरों से धूल उड़ती है, अतः वह समय गोधूलि बेला कहलाई। विवाह आदि मंगल कार्यों तथा ध्यान के लिए यह सर्वोत्तम समय है।
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[11/05, 10:55 AM] Ravi Prakash: *आगे मोदी जी बढ़ो (कुंडलिया)*
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आगे मोदी जी बढ़ो , पीछे सारा देश
धरो धनुर्धारी छटा , या गोवर्धन वेश
या गोवर्धन वेश ,राष्ट्र के अप्रतिम प्रहरी
तुम पर है विश्वास ,लोक की निष्ठा गहरी
कहते रवि कविराय ,न तुम विपदा से भागे
धरकर अनुपम धैर्य ,बढ़ रहे आगे – आगे
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[11/05, 5:54 PM] Ravi Prakash: *मत हारो (कुंडलिया)*
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हारो कभी न धैर्य को ,रखो सदा विश्वास
विपदा हर छोटी हुई ,बड़ी हुई है आस
बड़ी हुई है आस ,विजय विपदा पर पाई
जो लड़ता संग्राम ,जीत उसके घर आई
कहते रवि कविराय ,हताशा-आलस मारो
दुर्बलता को छोड़ , रहो निर्भय मत हारो
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[11/05, 8:10 PM] Ravi Prakash: *मरण रोको दुखदाई (कुंडलिया)*
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प्रतिदिन यह क्या कर रहे ,महाकाल संहार
रोको इस विध्वंस को , मानव करे पुकार
मानव करे पुकार , मरण रोको दुखदाई
खाए कितने वृद्ध , खा चुके तुम तरुणाई
कहते रवि कविराय ,थकी हैं आँखें गिन-गिन
सुनते हैं हर प्रात ,खबर मरने की प्रतिदिन
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[12/05, 11:08 AM] Ravi Prakash: *नई आफत यह आई (कुंडलिया)*
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आई एक नई बला , महाविनाशक रोग
महाकाल करने लगा ,नया शस्त्र उपयोग
नया शस्त्र उपयोग ,वायु में विष भर लाया
मृत्युदेव का पाश , इस तरह नूतन आया
कहते रवि कविराय ,मनुजता है घबराई
पहले से सौ रोग , नई आफत यह आई
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[12/05, 11:13 AM] Ravi Prakash: *मचता हाहाकार (कुंडलिया)*
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मरते हैं निर्धन-धनिक , मरते सत्तावान
त्राहि – त्राहि अब कर रहा ,पूरा हिंदुस्तान
पूरा हिंदुस्तान , वेदना छाई भारी
सबके लेती प्राण , महापेटू बीमारी
कहते रवि कविराय ,दिखे सब रुदन करते
मचता हाहाकार , हर गली मानव मरते
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[12/05, 11:20 AM] Ravi Prakash: *बचना है तो खुद बचो (कुंडलिया)*
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बचना है तो खुद बचो ,एक उपाय बचाव
नदिया सबसे कह रही ,होगी पार न नाव
होगी पार न नाव , दूर नदिया से रहना
फिसलेगा यदि पैर ,न नदिया से कुछ कहना
कहते रवि कविराय ,सत्य मुश्किल है पचना
मरण – नदी अविराम ,बह रही इससे बचना
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[12/05, 11:27 AM] Ravi Prakash: *खोलो बंद किवाड़ (कुंडलिया)*
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खोलो दरवाजे सभी , हों गवाक्ष स्वाधीन
रोशनदान न हों जहाँ , बंधन के आधीन
बंधन के आधीन , चलो मन रहने जाएं
मन से मन की बात ,रात दिन सब बतियाएं
कहते रवि कविराय ,हृदय निज आज टटोलो
खोलो बंद किवाड़ ,दिशाएं दस सब खोलो
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
गवाक्ष = छोटी खिड़की
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
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[12/05, 11:48 AM] Ravi Prakash: *लाचारी (कुंडलिया)*
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अखबारों में छप रहे ,मृतकों के कुछ चित्र
श्रद्धाँजलि का रह गया ,यह ही रूप विचित्र
यह ही रूप विचित्र ,नहीं अब शव – यात्राएँ
मरघट सब सुनसान ,न तीजा शोक सभाएँ
कहते रवि कविराय , मनुज है लाचारों में
रुदन रह गया शेष , फोन में अखबारों में
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[12/05, 4:16 PM] Ravi Prakash: *पोछे आँसू कौन ? (कुंडलिया)*
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कौन तसल्ली दे किसे , पोछे आँसू कौन
घर – घर रुदन हो रहा , घर – घर साँसें मौन
घर – घर साँसें मौन , अस्पतालों में रोते
कंधा देने हाय ! , चार भी पास न होते
कहते रवि कविराय ,लगी है घर-घर बल्ली
सब जन हैं बेहाल , किसे दे कौन तसल्ली
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*लगी है घर-घर बल्ली* = महामारी में पीड़ित घर और मोहल्लों में आवागमन अवरुद्ध करने हेतु लकड़ी की लगाई जाने वाली बल्लियाँ
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[13/05, 1:03 PM] Ravi Prakash: *शांति की खोज में चार कुंडलियाँ*
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*1️⃣शांति -प्रार्थना*
शांति – प्रदाता हे प्रभो , हो जाओ अब शांत
आदेशित नभ को करो ,छोड़ो मन का क्लांत
छोड़ो मन का क्लांत ,शांत जल-थल को कर दो
पर्वत करो उदार , काल में करुणा भर दो
कहते रवि कविराय , मधुर जोड़ो हर नाता
कृपा कृपा हे नाथ , कृपा हे शांति-प्रदाता
“”””””””””””””””””””””””””””‘”””””””'””””””””

क्लांत = क्षीणकाय ,थका हुआ ,शिथिल
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*2️⃣तुम हो अंतिम आस*
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गाते मंगल – आरती , कुशल रखो भगवान
दीर्घ आयु सबको मिले ,सबको रोग-निदान
सबको रोग-निदान ,जगत के दुख हर लाओ
अंतरिक्ष हो शुद्ध , विषैली गंध हटाओ
कहते रवि कविराय , प्राण संकट में पाते
तुम हो अंतिम आस ,तुम्हारे गुण बस गाते
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*3️⃣त्यागो रौद्र स्वरूप*
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मरने वाली आ रही ,खबरों की भरमार
महाकाल ज्यों कर रहा ,दुनिया का संहार
दुनिया का संहार ,चिता शमशान रुलाई
घर-घर हाहाकार , वेदना हर मुख छाई
कहते रवि कविराय ,अवस्था डरने वाली
त्यागो रौद्र स्वरूप ,छटा-छवि मरने वाली
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*4️⃣भीड़ को दुश्मन मानो*
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मिलने-जुलने से बचो ,करो न रुक कर बात
खा जाएगा शत्रु आ , बैठा लेकर घात
बैठा लेकर घात , समय मारक है जानो
बाहर जाना भूल ,भीड़ को दुश्मन मानो कहते रवि कविराय ,खिड़कियों के खुलने से
आएगी विष – गंध , बचो मिलने – जुलने से
🪴🪴🪴🪴🪴🪴🌱🌱🌱🌱🌱
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[13/05, 7:04 PM] Ravi Prakash: *विपक्ष (कुंडलिया)*
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अद्भुत कौशल युक्त है ,अपना भारत देश
पहने हुए विपक्ष है , हाहाकारी वेश
हाहाकारी वेश ,रोज कमियों पर रोता
यह इसमें निष्णात ,और इनसे क्या होता
कहते रवि कविराय ,दिखे आरोपों से युत
भाषण देना काम ,अनोखे नेता अद्भुत
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
_कौशल_ = कुशलतापूर्वक किसी काम को
ढंग से करने का गुण
_युत_ = युक्त ,मिला हुआ
_निष्णात_ = पारंगत
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
_रचयिता_ : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[14/05, 11:40 AM] Ravi Prakash: *बच्चे बेचारे फँसे (कुंडलिया)*
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बच्चे बेचारे फँसे , कोरोना के बीच
क्रीडा से वंचित किया ,महारोग ने नीच
महारोग ने नीच , दूर मित्रों से करता
विद्यालय हैं बंद ,हृदय हर क्षण है डरता
कहते रवि कविराय ,कह रहे मन के सच्चे
घर में कब तक कैद ,करोगे प्रभु जी बच्चे
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क्रीड़ा = खेलकूद
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[14/05, 12:44 PM] Ravi Prakash: *परशुराम (कुंडलिया)*
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लाए सत् का युग बड़ा ,सहसबाहु को मार
कामधेनु वापस मिली ,पिता पूज्य का प्यार
पिता पूज्य का प्यार , अहंकारी नृप हारे
धरती को सुख – चैन , पुनः लौटाए सारे
कहते रवि कविराय , युद्ध – पारंगत आए
नमन हे परशुराम , परशु शुभ सात्विक लाए
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परशु = फरसा ,परशुराम के हाथ में सदैव
रहने वाला शस्त्र
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
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[14/05, 1:38 PM] Ravi Prakash: *आत्मा : एक खोज (दो कुंडलियाँ)*
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*1️⃣प्रश्न शेष मैं कौन (कुंडलिया)*
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नश्वर तन में खोजिए , गहरे पानी पैठ
खोजो उस अनमोल को ,ध्यान – मार्ग में बैठ
ध्यान – मार्ग में बैठ , मिलेगी आत्मा प्यारी
आत्म – तत्व अनजान ,मरण-जन्मों से न्यारी
कहते रवि कविराय , देह हो जाती जर्जर
प्रश्न शेष मैं कौन , खोज कब पाता नश्वर
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*2️⃣तुम्हें न पाता खोज( कुंडलिया )*
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बीती जाती आयु है , रोज ढल रही देह
अब तो प्रभु कर दो कृपा ,दे दो अपना नेह
दे दो अपना नेह , आत्म को कब पाऊँगा
कब असीम की प्राप्ति , गहन तल तक जाऊँगा
कहते रवि कविराय , जिंदगी लगती रीती
तुम्हें न पाया खोज , उमरिया सारी बीती
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[15/05, 10:38 AM] Ravi Prakash: *प्रबल काल बलवान (कुंडलिया)*
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बलशाली मानो समय ,प्रबल काल बलवान
इसका सिक्का चल रहा ,इसका चला विधान
इसका चला विधान ,समय कब रोके रुकता
जहाँ हुआ विपरीत ,आदमी सम्मुख झुकता
कहते रवि कविराय ,काल-गति किसने टाली
गुजरेगा यह आप , प्रलय लाकर बलशाली
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प्रबल = बल से भरा हुआ
“”””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[15/05, 10:49 AM] Ravi Prakash: *फिर वही दिन (कुंडलिया)*
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चहकी चिड़िया फिर हँसा ,पीला सुंदर फूल
बच्चे जाते फिर दिखे , बस्ता लेकर स्कूल
बस्ता लेकर स्कूल , खुले बाजार सुहाते
खरीदार की भीड़ , भीड़ में जन मुस्काते
कहते रवि कविराय ,दिशा फिर महकी-महकी
पत्नी पति के साथ , जा रही मैके चहकी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[15/05, 11:05 AM] Ravi Prakash: *हारो मत हिम्मत रखो (कुंडलिया)*
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हारो मत हिम्मत रखो , जीतोगे संग्राम
रखो हृदय में सौम्य मति ,मधुर हँसी अभिराम
मधुर हँसी अभिराम , छँटेगा यह अंधियारा
पुनः ढलेगी रात , उगेगा सूरज प्यारा
कहते रवि कविराय , आस – विश्वास उभारो
गुजरेगा यह काल , नहीं बस इससे हारो
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[15/05, 11:16 AM] Ravi Prakash: *अग्रोहा को पूजिए (कुंडलिया)*
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अग्रोहा को पूजिए , राजा उच्च महान
गोत्र अठारह रच दिए ,मंगलमयी विधान
मंगलमयी विधान ,”एक जन”भाव जगाया
अग्रसेन का राज , अनूठा राज कहाया
कहते रवि कविराय , मानता है जग लोहा
हुए बहुत से राज्य ,राज्य कब सम अग्रोहा
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[16/05, 12:05 PM] Ravi Prakash: *गर्जन (कुंडलिया)*
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गर्जन में है क्या धरा ,गर्जन करना व्यर्थ
बरसेंगे जो मेघ तो , उनका है कुछ अर्थ
उनका है कुछ अर्थ ,धरा उनसे सुख पाती
पाकर जल की बूँद ,तृप्ति भीतर से आती
कहते रवि कविराय ,हाथ में रखिए अर्जन
तभी बनेगी बात , व्यर्थ का होता गर्जन
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गर्जन = बादलों की गड़गड़ाहट
अर्जन = कमाई
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[16/05, 12:17 PM] Ravi Prakash: *बरसात (कुंडलिया)*
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मुस्काती आती कभी , हौले से बरसात
धीरे – धीरे भीगता ,रुनझुन – रुनझुन गात
रुनझुन – रुनझुन गात ,वेग से कभी डराती
जैसे गिरी कटार , व्योम से ऐसे आती
कहते रवि कविराय ,सभी को सदा सुहाती
अद्भुत है आश्चर्य , रूप वर्षा मुस्काती
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[16/05, 10:18 PM] Ravi Prakash: *नाम बच्चों के प्यारे (कुंडलिया)*
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राजू पिंटू रसभरी , पप्पू बबलू ओम
गुड्डू गुड्डी इमरती ,रबड़ी चुनमुन सोम
रबड़ी चुनमुन सोम ,नाम बच्चों के प्यारे
अफसर सूबेदार , दरोगा ढेरों सारे
कहते रवि कविराय ,खा रहे डब्बू काजू
जग से बेपरवाह , नाचते रानी राजू
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[16/05, 10:41 PM] Ravi Prakash: *बीमारी (कुंडलिया)*
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बीमारी सबसे बुरी , हर लेती है प्राण
अगर बचे भी तो लगा ,समझो मारक बाण
समझो मारक बाण , अधमरा कर छोड़ेगी
भुर्ता बना शरीर , हड्डियों को तोड़ेगी
कहते रवि कविराय ,धनिक हो गया भिकारी
कृपा करो भगवान , नहीं आए बीमारी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[16/05, 10:48 PM] Ravi Prakash: *साँस की महिमा भारी (कुंडलिया)*
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मारी – मारी फिर रही ,अब तक थी बेकार
दिन – भर लेते – छोड़ते ,साँसें कई हजार
साँसें कई हजार , नहीं कीमत पहचानी
जब साँसें दुश्वार ,अमोलक तब यह जानी
कहते रवि कविराय ,साँस की महिमा भारी
कभी न कहना बंधु , फिर रही मारी – मारी
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[16/05, 10:58 PM] Ravi Prakash: *सदा मुस्काना सीखो (कुंडलिया)*
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होता सब चाहे रहे , बाहर में प्रतिकूल
भीतर की अपनी हँसी ,जाना मगर न भूल
जाना मगर न भूल ,सदा मुस्काना सीखो
बाधा को हर लाँघ ,अनवरत चलते दीखो
कहते रवि कविराय ,आत्म-ज्ञानी कब रोता
जग से बेपरवाह , जगत-गति से क्या होता
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[17/05, 1:16 PM] Ravi Prakash: *सरिता (कुंडलिया)*
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पर्वत से निकली हुईं ,तुम प्राकृतिक प्रवाह
अभिवादन सरिता तुम्हें ,नमन तुम्हारी राह
नमन तुम्हारी राह , धरा पावन कर जातीं
तट पर बसते गाँव , सभ्यताएँ मुस्कातीं
कहते रवि कविराय ,साधना में तुम ज्यों रत
पर्वत का मृदु रूप , धन्य है तुमसे पर्वत
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सरिता = नदी
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रचयिता ः रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[18/05, 10:48 AM] Ravi Prakash: *सुंदर कमल सामान (कुंडलिया)*
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रहकर भी जग में रहा ,सुंदर कमल समान
धन्य निरंतर साधना , साधक बना महान
साधक बना महान ,मैल से रहा अछूता
दे दे किंचित दाग , कीच का कब यह बूता
कहते रवि कविराय ,थपेड़े जग के सहकर
अनासक्त हो बंधु , गृहस्थी – घर में रहकर
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*कीच* = कीचड़
*बूता* = सामर्थ्य
*कमल* = कमल का फूल
*साधक* = किसी काम को
ठीक तरह से करने के लिए
उसका अभ्यास करने वाला व्यक्ति
*साधना* = अभ्यास करना
*अनासक्त* = आसक्ति से रहित
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[18/05, 12:31 PM] Ravi Prakash: 1️⃣ *टोपी वाला गिद्ध (कुंडलिया)*
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बेचारा शरमा रहा ,क्रूर भाव का गिद्ध
टोपीवाला हो गया , नेता ज्यादा सिद्ध
नेता ज्यादा सिद्ध ,नोच कर लाशें खाता
जहां देखता मृत्यु ,मुदित मन से हो जाता
कहते रवि कविराय , राजनेता से हारा
बिन टोपी का गिद्ध ,रो रहा है बेचारा
2️⃣ *आजकल नेता (कुंडलिया)*
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नेताजी को देखिए , मचा रहे उत्पात
महा-बतंगड़ बन रहा ,रोज बात बे-बात
रोज बात बे-बात ,कूट कर छाती रोते
जहां दिखे दो कष्ट ,मुदित भीतर से होते
कहते रवि कविराय ,हर्ष मन में भर लेता
करता हाहाकार , जोर से प्रमुदित नेता
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रचयिता: रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[18/05, 12:56 PM] Ravi Prakash: *हावी हुआ प्रचार (कुंडलिया)*
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मशहूरी ने कर दिया , ऐसे बंटाधार
काम अभागा रो रहा ,हावी हुआ प्रचार
हावी हुआ प्रचार ,चतुर फोटो खिंचवाते
विज्ञापन पर जोर ,सिर्फ खबरों में आते
कहते रवि कविराय ,कार्य से रहती दूरी
इनमें केवल स्वार्थ ,चाहते बस मशहूरी
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर ( उत्तर प्रदेश )
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[18/05, 1:13 PM] Ravi Prakash: *धन्यवाद सौ बार (कुंडलिया)*
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मरने में अचरज कहाँ ,जीने में आभार
दया रोज प्रभु कर रहे ,धन्यवाद सौ बार
धन्यवाद सौ बार , प्रात की स्वर्णिम रेखा
देखी घिरती शाम ,रात का चंदा देखा
कहते रवि कविराय ,आयु दो पूरी करने
प्रभु हों जब सौ साल ,हर्ष से जाएँ मरने
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रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
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[18/05, 2:09 PM] Ravi Prakash: *जरूरत मुस्काने की (कुंडलिया)*
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जाने की लाइन लगी ,गिनना मुश्किल काम
मरघट तक को भी नहीं ,मिल पाता आराम
मिल पाता आराम , निरंतर जली चिताएँ
सड़कें सब सुनसान ,लोग घर में डर खाएँ
कहते रवि कविराय ,जरूरत मुस्काने की
खबर करो तैयार , महामारी जाने की
🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[18/05, 8:25 PM] Ravi Prakash: *अदालत रामभरोसे (कुंडलिया)*
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔹🔹🔹
रामभरोसे चल रहा ,न्यायालय का काम
तारीखों पर पड़ रहीं , तारीखें अविराम
तारीखें अविराम , युवा बूढ़ा हो जाता
बीस साल भी बाद ,न निर्णय कोई आता
कहते रवि कविराय ,बताओ किसको कोसे
मनुज जेल में बंद ,सजा – बिन रामभरोसे
🔸🔸🔹🔹🌸🌸🔹🔹🔸🔸
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[19/05, 2:05 PM] Ravi Prakash: *लगवाएँ वैक्सीन सब (कुंडलिया)*
🔹🌸🌸🌸🔸🔸🔸🔸🔸
लगवाएँ वैक्सीन सब , इसका कार्य वितान
रोगों से रक्षा करे , नवयुग का विज्ञान
नवयुग का विज्ञान , महामारी पर भारी
जिन-जिनका यह शोध ,जगत उनका आभारी
कहते रवि कविराय ,न भ्रम में फँसें फँसाएँ
आगे आएँ बंधु , सभी टीका लगवाएँ
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
*वितान* : ऊपर से फैलाई जाने वाली चादर या तंबू

रचयिता: रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 154 51
[19/05, 3:25 PM] Ravi Prakash: *प्लेट उठाता कौन (हास्य कुंडलिया)*
🔹🔹🔹🔹🔹🌸🌸🌸🌸🌸
खाया रसगुल्ला बड़ा , एक जलेबा गर्म
हलवा दो चमचे चखा ,मालपुआ अति नर्म
मालपुआ अति नर्म , दहीभल्ले थे न्यारे
मधुर मूँग की दाल ,गोलगप्पे अति प्यारे
कहते रवि कविराय ,पेट यों भर-भर आया
प्लेट उठाता कौन ,नहीं खाना फिर खाया
🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔸
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[20/05, 11:16 AM] Ravi Prakash: *समता वाला राज (कुंडलिया)*
🌸🌸🌸🟨🟨🔸🔹🔸🔹
लाओ प्रभु जी देश में ,समता वाला राज
सभी सुखी धनवान हों ,खुशियों भरा समाज
खुशियों भरा समाज , निरोगी करो हवाएँ
दो बच्चों की नीति ,देश के शासक लाएँ
कहते रवि कविराय , एकता भाव बढ़ाओ
सँग हों पक्ष-विपक्ष ,मधुर जीवन-गति लाओ
🍃🍃🍃🍃🍃☘️☘️☘️🍂🍂
समता = बराबरी ,समानता वाला भाव

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[21/05, 8:43 PM] Ravi Prakash: *अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस : 21 मई*
🔹🔹🔹🔹🔹🔹🍃🍃🍃
*चाय (कुंडलिया)*
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🍂🍂🟣
पीते हैं आओ चलें , चलकर कप-भर चाय
मस्ती लाने का कहाँ , अच्छा और उपाय
अच्छा और उपाय ,अक्ल पीकर खुल जाती
चलता तेज दिमाग ,नई ऋतु भीतर छाती
कहते रवि कविराय , न जाने कैसे जीते
अचरज है कुछ लोग ,कभी भी चाय न पीते
🟡🟡🟡🟡🟡🟡☘️☘️☘️☘️
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[22/05, 10:58 AM] Ravi Prakash: *यामिनी (कुंडलिया)*
🟡🟡🟡🟨🟨🟨
दिन से बढ़कर यामिनी ,तारों की बारात
शीतल हँसता चंद्रमा ,रजत दिव्य सौगात
रजत दिव्य सौगात ,रश्मियाँ नभ से आतीं
हुआ प्रफुल्लित गात ,धरा पर रस बरसातीं
कहते रवि कविराय ,करे मन बातें किन से
सबके मुख विकराल ,डराते रहते दिन-से
🍃🍂🍂🍂🔹🔹🔹🔹🔹🔹
यामिनी = रात ,रात्रि
रजत = चाँदी
रश्मियाँ = किरणें
नभ = आकाश ,आसमान
धरा = धरती ,पृथ्वी
“”””””””””””””””””””””””””””””””‘”‘”””””
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[22/05, 6:19 PM] Ravi Prakash: *मुसीका (कुंडलिया)*
🟨🟨🟨🟡🟡🟡
पहन मुसीका रह रहा ,बंदी मानव आज
अभिशापित-सा हो गया जैसे पूर्ण समाज
जैसे पूर्ण समाज ,आँख ही हँसती – रोती
गायब जब से होंठ ,भाव सब यह ही ढोती
कहते रवि कविराय ,लगे प्रभु सब को टीका
तब दीखेंगे लोग ,बिना ही पहन मुसीका
☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️
मुसीका = मास्क ,मुख पर बाँधी जाने
वाली पट्टी ,मुछीका

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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[23/05, 2:19 PM] Ravi Prakash: *रहें मास्क के साथ (बाल कुंडलिया)*
🟨🟨🟨🟨🍂🍂🍂🍂🍂
हम बच्चों को चाहिए , धोते रहना हाथ
दो फिट की दूरी रखें , रहें मास्क के साथ
रहें मास्क के साथ , हरा दें यों बीमारी
चतुर और बलवान , जीतता दुनिया सारी
कहते रवि कविराय ,जिता देना सच्चों को
प्रभु दो शुभ आशीष ,जगत के हम बच्चों को
🌸🌸🌸🌸🍂🍂🍂☘️☘️☘️
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[23/05, 10:42 PM] Ravi Prakash: *मुखिया वाला भाव (कुंडलिया)*
🔹🔹🔹🔸🔸🔸🌸🌸🌸
पाए हमने धन्य हम , धीर वीर गंभीर
मोदी जी हमको मिले ,हरने वाले पीर
हरने वाले पीर , संयमित चलते जाते
मुखिया वाला भाव ,कृत्य में इनके पाते
कहते रवि कविराय ,चाल कब ओछी लाए
ऋषियों जैसा तेज ,संत – मति सुंदर पाए
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रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[24/05, 10:39 AM] Ravi Prakash: *समय का चक्र (कुंडलिया)*
🔸🔸🔸🔸🔸🍂🍂🍂
चलता रहता चक्र है ,शीत ऊष्म बरसात
कभी धूप सूरज दिखा ,कभी चाँदनी रात
कभी चाँदनी रात ,नित्य हैं सुख-दुख आते
होते कभी अमीर , कभी निर्धन हो जाते
कहते रवि कविराय ,कभी सुखदाई-खलता
सहो समय का चक्र ,निरंतर जग में चलता
🔹🔹🔹🌸🌸🌸🌸🌸🌸
ऊष्म = गर्मी ,ग्रीष्म ऋतु

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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रचना तिथि : 24 मई 2021
[24/05, 8:10 PM] Ravi Prakash: *कहो सब भारत की जय (कुंडलिया)*
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸
अतिशय भीषण आपदा ,अतिशय बढ़ा प्रकोप
लगता है जैसे खड़ी , कुदरत लेकर तोप
कुदरत लेकर तोप , लड़ाई लड़ना भारी
संसाधन कमजोर , किंतु दृढ़ इच्छा जारी
कहते रवि कविराय ,कहो सब भारत की जय
खोना कभी न एक्य ,धूर्त है दुश्मन अतिशय
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[24/05, 8:22 PM] Ravi Prakash: *भारत आगे बढ़ रहा (कुंडलिया)*
🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
रचता चाहे जो रहे , जैसा भी षड्यंत्र
भारत आगे बढ़ रहा , ले मोदी का मंत्र
ले मोदी का मंत्र , महामारी अति भारी
यह नैसर्गिक कोप ,अकल्पित यह दुश्वारी
कहते रवि कविराय ,धैर्य धारण कर बचता
जैसा दीखा रोग , दवा वैसी ही रचता
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[24/05, 8:41 PM] Ravi Prakash: *जीवन के दो रंग (दो कुंडलियाँ)*
🔸🔸🔸🔸🔹🔹🔹🔹
1️⃣सिर्फ लोक-व्यवहार (कुंडलिया)
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रोते घर के चार जन , हँसते हैं जन चार
बाकी वह जो पाँचवा ,सिर्फ लोक-व्यवहार
सिर्फ लोक-व्यवहार ,मरण-शादी सब धोखा
अपनापन भ्रम-जाल , रंग-लेपन बस चोखा
कहते रवि कविराय , कौन अपने हैं होते
खुशियों में खुश कौन , दुखों में झूठे रोते
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
2️⃣धन्य लोक-व्यवहार (कुंडलिया)
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डूबा व्यक्ति समाज में , सहता हर्ष – विषाद
किसके घर खुशियाँ हुईं ,उसको दुख सब याद
उसको दुख सब याद ,अभागा क्या कर पाता
पास बैठ कुछ देर , साथ में लग – लग जाता
कहते रवि कविराय , न जनजीवन से ऊबा
धन्य लोक – व्यवहार , धन्य जो उस में डूबा
🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🌸
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[25/05, 10:42 AM] Ravi Prakash: *भाती गोरी मेम (कुंडलिया)*
🟨🟨🟨🟡🟡🌻🌻🌻
लट्टू हैं अंग्रेज पर , भाती गोरी मेम
चमड़ी देखी हो गया , अंग्रेजन से प्रेम
अंग्रेजन से प्रेम , लगी परदेसन प्यारी
प्यारी उसकी नाव ,नदी के बीच सवारी
कहते रवि कविराय ,आज भी तोता-रट्टू
रंग गेहुँआ श्याम ,छोड़ गोरी पर लट्टू
🍃🍃🍃🍃🍃🍂🍂🍂🍂
रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[25/05, 11:01 AM] Ravi Prakash: *करतल (कुंडलिया)*
🟨🟨🟨🟨🟨🍃
करतल पर सबका लिखा ,सब भविष्य या भूत
छिपा हुआ क्या भाग्य में ,मिलना किसे अकूत
मिलना किसे अकूत , अजब रेखाएँ गातीं
सौ वर्षों का चित्र ,खींच कर रख-रख जातीं
कहते रवि कविराय ,लिखा जीवन का हर पल
छोटा – सा यह क्षेत्र , देह का अद्भुत करतल
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🔸🔸🔸🔸
करतल = हाथ की हथेली
अकूत = जिसको आँका न जा सके

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[25/05, 11:18 AM] Ravi Prakash: *सुनते हैं यह लैब से (कुंडलिया)*
🔹🔹🔹🔸🔸🔸🔹🔹🔹
सुनते हैं यह लैब से , आया घातक रोग
दुष्ट वहाँ था कर रहा , कोई एक प्रयोग
कोई एक प्रयोग , जान आफत में डाली
मरे श्वान की मौत , योजना जिसकी काली
कहते रवि कविराय ,कुटिल जन साजिश बुनते
या तो आत्म-विहीन , नहीं या इसकी सुनते
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
श्वान = कुत्ता
~~~~~~~~~`~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[25/05, 7:57 PM] Ravi Prakash: *ढीला मास्क (हास्य कुंडलिया)*
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पहना ऐसे मास्क है , आभूषण ज्यों हार
नीचे लटका नाक से , मूछों पर है भार
मूछों पर है भार , होंठ से पान चबाते
कुछ सँभाल कर लोग ,जेब में रख कर जाते
कहते रवि कविराय ,नया यह लगता गहना
धन्य धन्य आभार , जिन्होंने ढीला पहना
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/05, 10:52 AM] Ravi Prakash: *चलो चीत्कार मचाएँ (कुंडलिया)*
🍁🍁🍁🌸🌸🌸🌸🌸🌸
बीमारी पौधा बनी , लाशों की है खाद
धरा उर्वरा हो गई , दो आँसू के बाद
दो आँसू के बाद , चलो चीत्कार मचाएँ
दुखी जनों के वोट ,डाल झोली में लाएँ
कहते रवि कविराय ,भाग्य की है बलिहारी
टूटा छींका वाह , गिरी नभ से बीमारी
~~~~~~~~~~~~`~~~~~~
उर्वरा = उपजाऊ भूमि
चीत्कार = चीख-पुकार
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/05, 11:56 AM] Ravi Prakash: *दुष्ट मोबाइल (कुंडलिया)*
🟥🟥🟥🟥🟥🟨🟨
खाते मोबाइल रहे ,हम या हमको दुष्ट
बड़ा प्रश्न सम्मुख खड़ा ,अब आँखें हैं रुष्ट
अब आँखें हैं रुष्ट ,कह रहीं नाता तोड़ो
देता आँख बिगाड़ ,आज ही इसको छोड़ो
कहते रवि कविराय ,जाएगी जाते-जाते
आदत बड़ी खराब , हो गई खाते-खाते
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[26/05, 4:21 PM] Ravi Prakash: *राजशाही चिल्लाती (कुंडलिया)*
🟨🟨🟨🌸🌸🌸🌸🌸🌸
होते यदि राजा – महा , होते अगर नवाब
दे पाता तब केंद्र क्या , उनको कड़ा जवाब
उनको कड़ा जवाब , राजशाही चिल्लाती
अपनी ढपली आप , केंद्र से अलग बजाती
कहते रवि कविराय ,पाँच सौ को फिर ढोते
यदि सरदार पटेल , देश में हुए न होते
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🍃
रचयिता : रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[27/05, 1:17 PM] Ravi Prakash: *वसुधैव कुटुंबकम् (कुंडलिया)*
🍃🍃🍃🍃🍃🌸🌸🌸
कोई गैर न मानिए ,रखिए सम्यक ज्ञान
जाने सबको आत्मवत ,ज्ञानी की पहचान
ज्ञानी की पहचान ,चित्त को बड़ा बनाओ
वसुधा एक कुटुंब ,भाव उल्लास जगाओ
कहते रवि कविराय ,मनुजता रहे न सोई
हों उदार सब लोग , पराया रहे न कोई
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
वसुधैव कुटुंबकम् = धरती एक परिवार है
उल्लास = प्रसन्नता ,आनंद
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[27/05, 10:27 PM] Ravi Prakash: *वैक्सीन की दो डोज (कुंडलिया)*
👍👍
*लगवाई वैक्सीन की , जाकर दो-दो डोज*
*उन्हें सुरक्षा मिल गई , मुखमंडल पर ओज*
*मुखमंडल पर ओज , नहीं बीमारी आती*
*जनता सजग सचेत , मुक्ति रोगों से पाती*
*कहते रवि कविराय ,मधुर मति जिसने पाई*
*चला तोड़ भ्रम-जाल ,दौड़ जल्दी लगवाई*
🌸🌸🌸🌸🍃🍃🍃🍃🍃
*रचयिता :* रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर उ(त्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[28/05, 3:25 PM] Ravi Prakash: *देशाटन (कुंडलिया)*
🟡🟡🟡🟡🌸🌸
आओ घूमें देश के , अंचल नए अनेक
भाषा-बोली है जुदा ,पर मन सबके एक
पर मन सबके एक ,रूप-रंगत अति प्यारी
भाँति-भाँति का वेश ,बनावट घर की न्यारी
कहते रवि कविराय ,एकता – भाव बढ़ाओ
चलो चार-छह राज्य ,घूम कर थोड़ा आओ
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
देशाटन = अपने देश का भ्रमण या कई देशों का भ्रमण
अंचल = कोई क्षेत्र या स्थान
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
रचना तिथि : 28 मई 2021
[29/05, 4:22 AM] Ravi Prakash: *मक्खनबाजी (हास्य कुंडलिया)*
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मक्खनबाजी में सदा , रहो बंधु निष्णात
यह विद्या दिलवाएगी ,नवनिधि की सौगात
नवनिधि की सौगात ,मिलेगी खूब तरक्की
पद पदवी सम्मान ,लाटरी समझो पक्की
कहते रवि कविराय ,गधे को कहो पिताजी
देगी शुभ वरदान ,भैंस की मक्खन बाजी
🔹🔹🔹🔹🌸🌸🔸🔸🔸🔸🔸
निष्णात = कार्यकुशल ,परिपक्व
मक्खनबाजी = चाटुकारिता ,चापलूसी

रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/05, 9:38 AM] Ravi Prakash: *उषा (कुंडलिया)*
🟡🟡🟡🟡🟡🟨🟨🟨🟨🍂
सजधज कर आती नई , दुल्हन एक समान
मुखड़े पर लाली लिए , देखो उषा महान
देखो उषा महान , गगन कैसे मुस्काता
दिव्य ब्रह्ममय तेज ,लौट वह कभी न आता
कहते रवि कविराय ,समय यह उत्तम हरि भज
यह है काल विशेष , ईशमय लेकर सजधज
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
उषा = प्रातः काल
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/05, 11:09 AM] Ravi Prakash: *चंचल-मन (कुंडलिया)*
🔸🔹🔸🔹🔸🔹
चंचल – मन पाता कहाँ , परम-ब्रह्म का बोध
ठहरे जिसके दो कदम , करता वह ही शोध
करता वह ही शोध , गहन भीतर तक जाता
महासिंधु से खोज , कीमती मोती लाता
कहते रवि कविराय ,अमोलक पावन प्रभु-धन
लेता जन्म अनेक , नहीं पाता चंचल – मन
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🍃🍃🍃
रचयिता : रवि प्रकाश , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/05, 11:16 AM] Ravi Prakash: *आयुर्वेद (कुंडलिया)*
🍃🍃🍃🍃🪴🌱🪴🌱🪴
पाते अपने देश में , जन्मा आयुर्वेद
धूल मगर खाता रहा ,बहुत समय यह खेद
बहुत समय यह खेद ,नहीं सुधि लेता कोई
यह आयुर्विज्ञान , चमक इसने क्यों खोई
कहते रवि कविराय ,युगों से गुण तो गाते
भरे हुए क्या रत्न , शोध करते तो पाते
■■■■■■🔸🔸🔸🔹■■■
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/05, 8:05 PM] Ravi Prakash: *योग दिवस (कुंडलिया)*
🟡🟡🟨🟨🟥🔴🍁🍁🍁🍁
मनता सारे विश्व में , दिवस योग त्यौहार
मोदी जी की जय कहो , रामदेव आभार
रामदेव आभार , योग घर – घर फैलाया
भारत का विज्ञान , घूम कर जग में आया
कहते रवि कविराय ,सबल तन-मन है बनता
ऋषियों का आशीष ,हर्ष से भर-भर मनता
🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍃🍃🍃
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भारत के प्रधानमंत्री
श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 2015 से प्रतिवर्ष
21 जून को सारे विश्व में मनाया जाता है ।
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🍁🍁🍁
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[29/05, 8:32 PM] Ravi Prakash: *डोसा (कुंडलिया)*
🍃🍃🍃🍃🍂🍂🍂🍂
डोसा सब को भा रहा , चटनी-साँभर खूब
खाते भारत में सभी , मन से गहरे डूब
मन से गहरे डूब , दूर दक्षिण से आया
मोह रहा माधुर्य , ठेठ उत्तर को भाया
कहते रवि कविराय ,हर जगह गया परोसा
बालक वृद्ध जवान , हर्ष से खाते डोसा
🔸🟡🔸🟡🔸🟡🔸🟡🔸
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/05, 10:01 AM] Ravi Prakash: *सत्य (कुंडलिया)*
🎾🎾🎾🎾🎾🎾🎾🎾🏀🏀
जिसमें सच का बल भरा ,कहाँ सताती आँच
हीरे की कीमत अलग ,अलग मूल्य का काँच
अलग मूल्य का काँच ,सत्य निर्भीक विचरता
सम्मुख चाहे काल , नहीं किंचित भी डरता
कहते रवि कविराय , भला हिम्मत है किसमें
ललकारे जो सत्य , लबालब शुचिता जिसमें
🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅
*लबालब* = पूर्णतः भरा हुआ
*आँच* = आग की लपट ,गर्मी ,ताप
*शुचिता* = शुद्धता ,स्वच्छता ,पवित्रता
🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[31/05, 10:56 AM] Ravi Prakash: *परिवर्तन (कुंडलिया)*
🔸🔸🟡🔸🔸🟡🔸🔸🟡
निर्धनता ऐश्वर्य क्या , जैसे हैं दिन – रात
यह बदली ऋतुएँ कहो ,ग्रीष्म शीत बरसात
ग्रीष्म शीत बरसात ,बालपन यौवन आता
होती बूढ़ी देह , देह का बल घट जाता
कहते रवि कविराय , रंक राजा है बनता
राजा बनता रंक , कभी धन है निर्धनता
✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️
*निर्धनता* = गरीबी
*ऐश्वर्य* = धन ,वैभव
*रंक* = गरीब
🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅🥅
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[31/05, 11:09 AM] Ravi Prakash: *कठपुतली इंसान (कुंडलिया)*
🍂🟡🍂🔸🔸🍂🟡🔸🔸
हँसते – रोते कट गए , जीवन के सौ साल
उसके बाद चला मरण , कंधे पर ले डाल
कंधे पर ले डाल , काल से रहते डरते
बीते लाखों वर्ष , रोज हैं जीते – मरते
कहते रवि कविराय ,देह को पुनि- पुनि ढोते
कठपुतली इंसान , जी रहे हँसते – रोते
🔸🔸🍂🔸🔸🍂🔸🔸🍂
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[31/05, 11:45 AM] Ravi Prakash: *तंबाकू (कुंडलिया)*
🔸🔸🔸🍂🍂🔸🔸🍂🔸🍂
तंबाकू खाता रहा , जाने किस को कौन
मानव ने खाया इसे , या यह मानव मौन
या यह मानव मौन , बनाता कैंसर प्यारे
तड़प-तड़प कर मौत ,कष्टप्रद दिन फिर सारे
कहते रवि कविराय , घाव देता ज्यों चाकू
बड़ी बुरी है चीज , न प्रिय खाओ तंबाकू
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸
*विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई*
बीड़ी ,सिगरेट ,खैनी ,गुटखा आदि रूपों में तंबाकू के सेवन से फेफड़े ,मुँह व गले का कैंसर होने की संभावनाएँ बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं । जीवन नर्क के समान बन जाता है। आज ही तंबाकू छोड़ने का प्रण लीजिए। तंबाकू को जिंदगी में कभी हाथ मत लगाइए।
🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸
*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*

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