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जिंदगी के सच्चे पल #100 शब्दो की कहानी #

26 वर्ष केंद्रीय सेवा में कार्यरत रहने के दौरान अचानक ही जिंदगी ने ऐसा पड़ाव डाला जिसके चलते स्वास्थ्य की जोखिम उठानी पड़ी। फिर परिवार और कार्यालय दोनों जिम्मेदारी पूर्ण रूप से निभाने में मैं असमर्थ होने लगी और स्वास्थ्य की दृष्टि से मुझे नौकरी से त्यागपत्र देना पड़ा ।

इसके बाद तो मुझे ऐसा लगता मानो मेरी जिंदगी दिशाहीन हो गई है और मैं गुमसुम सी रहती ।
मेरे पति ने जन्म दिवस पर नया मोबाइल उपहार किया और मेरी भतीजी नमिता ने मुझे बताया कि यह बहुत ही अच्छा समूह है आंटी, बस फिर क्या था मेरी लेखनी ने लिखना शुरू किया मानों नयी स्फूर्ति आ गई और जैसे ही बच्चें हैं जिद्दी तो क्या करें यह लेख फेसबुक पर शेयर किया तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं था साथ ही मुझे खुश देख कर मेरे पति व बच्चे भी बहुत खुश हुए और मेरी लेखनी फिर शुरू हो गई , …..मैं वह दिन कभी भूल नहीं सकती । पर वो कहते है न एक राह जहां समाप्त होती है वही दूसरी राह इंतजार कर रही होती है ।

आरती अयाचित

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