Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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100 कुंडलियाँ जनवरी 2021

[01/01, 11:46 AM] Ravi Prakash: *नव वर्ष (कुंडलिया)*
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आया नूतन वर्ष है , लेकर नवल प्रभात
कहता है विस्मृत करो ,विगत अँधेरी रात
विगत अँधेरी रात , एक दुःस्वप्न सरीखी
यह ऐसी खूँखार , नहीं पहले थी दीखी
कहते रवि कविराय ,चलो नव लेकर काया
लेकर नव-उत्साह ,जन्म समझो नव आया
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*रचयिता ः रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

*नवल = नया* , आकर्षक ,जवान
[01/01, 12:42 PM] Ravi Prakash: *नव वर्ष पर सुबह पाँच बजे बधाई :*
*(हास्य कुंडलिया)*
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आई प्रातः पाँच पर , मोबाइल आवाज
हमने सोचा हे प्रभो ! ,अनहोनी क्या आज
अनहोनी क्या आज , उधर से सुना “बधाई”
हम बोले हे मित्र , बंधु या कहें कसाई
कहते रवि कविराय ,कसम उनको खिलवाई
खबरदार नववर्ष , सुबह को घंटी आई

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[01/01, 1:03 PM] Ravi Prakash: *अखबार (कुंडलिया)*
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सन्नाटे को चीरता , है दैनिक अखबार
एक मिशन इसको कहो ,यद्यपि कारोबार
यद्यपि कारोबार , भूमिका सही निभाता
समाचार निष्पक्ष ,देश-भर में पहुँचाता
कहते रवि कविराय ,उठाकर चलते घाटे
साप्ताहिक अखबार , चीरते थे सन्नाटे
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997615451
[02/01, 12:35 PM] Ravi Prakash: *प्राकृतिक सौंदर्य (कुंडलिया)*
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नदियाँ सागर खाइयाँ , झरने तुंग विराट
कुदरत के सौंदर्य के , मानो खुले कपाट
मानो खुले कपाट , वृक्ष उन्नत नभ छूते
किसमें है सामर्थ्य , मूल्य जो इनका कूते
कहते रवि कविराय , हजारों बीती सदियाँ
कल-कल करती काश ! ,बहें यह कल भी नदियाँ
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*

*तुंग =* पर्वत
*कूते =* मूल्य कूतने अथवा आँकने का काम, कूतना
[02/01, 6:25 PM] Ravi Prakash: *रवि प्रकाश की दो कुंडलियाँ*
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*पैसा*
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पैसा जीवन में प्रमुख , पैसा जीवन-सार
अंटी में पैसा नहीं , तो जीवन बेकार
तो जीवन बेकार , जगत पैसे से चलता
निर्धन- जन निरुपाय ,हाथ रहता है मलता
कहते रवि कविराय ,न समझो ऐसा – वैसा
पैसा है भगवान , लोक में पुजता पैसा

*पैसे*
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वैसे तो होता महज ,यह कागज का नोट
पर जब है होता नहीं ,पड़ती गहरी चोट
पड़ती गहरी चोट ,सर्द मौसम छा जाता
जीवन बारहमास ,सिर्फ पतझड़ कहलाता
कहते रवि कविराय ,जोड़ कर रखिए पैसे
बड़े काम की चीज , न समझें ऐसे – वैसे
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[03/01, 9:34 AM] Ravi Prakash: *असूया (दो कुंडलियाँ)*
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(1)
खाता भीतर से उन्हें , जिन्हें असूया रोग
बंधन से वह मुक्त हों , बनता कब संयोग
बनता कब संयोग ,सत्य का पथ कब पाते
भीतर रहती दाह ,आग में घिर – घिर जाते
कहते रवि कविराय ,रोग यह उसका जाता
खुश होता है देख ,अन्य को हँसता-खाता

(2)
जलता रहता रात -दिन , जिसे असूया-रोग
दिखा पड़ोसी जल उठा ,करता सुख-उपभोग
करता सुख-उपभोग ,अकारण हृदय जलाता
जल-भुन कर हो राख ,रोज ही हो-हो जाता
कहते रवि कविराय ,हास औरों का खलता
उसको है अभिशाप ,चिता जाने तक जलता

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*रचयिता: रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 999761 5451*
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नोट: गीता के तीसरे अध्याय के 31 वें एवं 32 वें श्लोक में *असूया* शब्द आता है। असूया का पर्यायवाची ईर्ष्या और जलन है।
[03/01, 12:57 PM] Ravi Prakash: *मोती (कुंडलिया)*
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मोती की कीमत तभी ,जब तक उसमें ताब
आँखों की शोभा तभी ,जब तक उनमें आब
जब तक उनमें आब ,मूल्य क्षण भर में ढहते
जिनका गया चरित्र ,शिखर पर फिर कब रहते
कहते रवि कविराय ,चमक जब जिसकी खोती
सब देते दुत्कार , कौन कहता फिर मोती
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*ताब =* (फारसी का शब्द है )ताप ,सामना ,हिम्मत, चमक
*आब =* पानी ,चमक
[03/01, 1:54 PM] Ravi Prakash: *तड़ित चालक (कुंडलिया)*
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गिरती बिजली व्योम से ,करती काम तमाम
बिजली कब यह देखती ,मरा खास या आम
मरा खास या आम ,परिधि में जो भी आता
मगर बचाता यंत्र ,तड़ित चालक कहलाता
कहते रवि कविराय ,घटा जब काली घिरती
चम-चम-चम चमकार ,गरज से बिजली गिरती
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[03/01, 2:15 PM] Ravi Prakash: *जाड़ों में बरसात (दो कुंडलियाँ)*
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(1)
बरसे बादल हो गई , जाड़ों में बरसात
ठिठुर – ठिठुर कर कट रही ,ठंडी – ठंडी रात
ठंडी – ठंडी रात , ओढ़कर कंबल सोओ
बाहर . जाना . भूल , बंद कमरे में खोओ
कहते रवि कविराय ,ग्रीष्म में जिस को तरसे
हाय हाय दुर्भाग्य , वही जाड़ों में बरसे

(2)

चढ़ा करेला नीम पर ,हुआ कोढ़ में खाज
बारिश जमकर हो रही ,जाड़ों में यों आज
जाड़ों में यों आज ,बूँद पिस्टल की गोली
बरसी ताबड़तोड़ , शत्रु की जैसे टोली
कहते रवि कविराय ,दुष्ट मौसम अलबेला
गरज रहा है व्योम ,नीम पर चढ़ा करेला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[03/01, 10:06 PM] Ravi Prakash: *बुलाता है नभ नीला (कुंडलिया)*
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लगता है अक्सर फँसे ,दुनिया में बेकार
दुनिया बंधन एक है ,मरण जन्म सब भार
मरण जन्म सब भार ,बुलाता है नभ नीला
तारे चंदा श्वेत , दिव्य संगीत सुरीला
कहते रवि कविराय ,लोक यह मानो ठगता
बीते इतने साल , पराया फिर भी लगता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[04/01, 11:20 AM] Ravi Prakash: *बाजार (कुंडलिया)*
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मिलता ऊँचा मूल्य तब ,मिलता जब बाजार
जैसे दीपक को मिला , दीवट का संसार
दीवट का संसार , ज्योति सौ गुना बढ़ाता
कलाकार का नाम , दाम ऊँचा ले जाता
कहते रवि कविराय ,कला का मुखड़ा खिलता
गुण-ग्राहक का प्यार , चित्र को ढेरों मिलता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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दीवट = दीपक रखने का आधार
[04/01, 12:34 PM] Ravi Prakash: *वैक्सीन पर राजनीति (कुंडलिया)*
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शुरू सियासत हो गई ,आई ज्यों वैक्सीन
कोरोना के दौर में ,बिल्कुल बुद्धि-विहीन
बिल्कुल बुद्धि-विहीन , हुई दलबंदी हावी
सत्ता से प्रतिपक्ष , कर रहा युद्ध प्रभावी
कहते रवि कविराय ,बुरी लगती है आदत
अन्वेषण पर आज ,गलत है शुरू सियासत
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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सियासत = राजनीति
[04/01, 1:05 PM] Ravi Prakash: *विधि का लेखा (कुंडलिया)*
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लेखा जो विधि का लिखा ,ईश्वर को मंजूर
नतमस्तक हर आदमी , सम्मुख है मजबूर
सम्मुख है मजबूर , न कोई कुछ कर पाता
करता है पुरुषार्थ , भाग्य हावी हो जाता
कहते रवि कविराय , जगत में यह ही देखा
प्रबल भाग्य का लेख ,प्रबल है विधि का लेखा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿¿
विधि का लेखा = भाग्य में विधाता द्वारा लिखा गया
[04/01, 4:20 PM] Ravi Prakash: *नीरज जी (कुंडलिया)*
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गाते जीवन भर रहे , सरल सलोने गीत
नीरज जी दिल में बसे ,बनकर प्यारे मीत
बनकर प्यारे मीत , कंठ अद्भुत था पाया
वह रस वह आह्लाद ,नहीं वापस फिर आया
कहते रवि कविराय , याद अब भी हैं आते
कवियों के सिरमौर , मधुर नीरज जी गाते
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[05/01, 11:17 AM] Ravi Prakash: 🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️
*सरकारी शमशान (कुंडलिया)*
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सरकारी लिंटर गिरा , सरकारी शमशान
रेते में रेता मिला , ठेकेदार महान
ठेकेदार महान , किया गड़बड़ – घोटाला
एक चिता का योग ,गुणा पच्चिस कर डाला
कहते रवि कविराय , हर तरफ भ्रष्टाचारी
हुआ नाम बदनाम , काम ऐसे सरकारी
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[05/01, 12:07 PM] Ravi Prakash: *अभ्र (कुंडलिया)*
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आया सूरज छँट गया ,नभ से अभ्र – समाज
दुष्ट सताता अब कहाँ , गया शीत का राज
गया शीत का राज ,अभ्र – सी धूप चहकती
बनकर मानो अभ्र , गगन में रही महकती
कहते रवि कविराय ,प्रफुल्लित मन से काया
खुला दिखा माहौल , उत्तरायण लो आया
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*अभ्र =* बादल ,सोना ,कपूर

*अभ्र-समाज =* फैले हुए बादल
*अभ्र-सी धूप =* सोने जैसी धूप
*बनकर मानो अभ्र =* कपूर के समान बनकर
[05/01, 4:42 PM] Ravi Prakash: शातिर चोर पाँच मिनट में फेसबुक पर प्रकाशित आपकी कविता को चुराने में माहिर होते हैं । इनकी ही तारीफ में लिखी गई है यह कुंडलिया :-

*शातिर चोर (कुंडलिया)*
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लिखते खुद हरगिज नहीं , देते अपना नाम
चोरी का श्रम सर्वदा , गुण यह धन्य प्रणाम
गुण यह धन्य प्रणाम , नाम से अपना गाते
अपना कहकर काव्य , पत्रिका में छपवाते
कहते रवि कविराय ,वाह ! क्या शातिर दिखते
पाँच मिनट में माल , चुराकर अपना लिखते
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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शातिर = मक्कार ,चालबाज ,परम धूर्त
[05/01, 5:43 PM] Ravi Prakash: *पर्वतारोही (कुंडलिया)*
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आरोही चढ़ता रहा , छूने पर्वत श्रंग
देखा जिसने दृश्य यह ,हुआ देखकर दंग
हुआ देखकर दंग , विजय पर्वत पर पाई
टिका-टिका कर पाँव ,काम करती चतुराई
कहते रवि कविराय ,कठिन पर्वत – विद्रोही
चढ़ते दृढ़ संकल्प , जुझारू बस आरोही
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[06/01, 7:16 AM] Ravi Prakash: *मेरे प्रिय कवि श्याम नारायण पांडेय*
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कक्षा पाँच में कोर्स में *चेतक* नामक एक कविता पढ़ी थी । रचयिता थे कविवर *श्याम नारायण पांडेय* । यह *हल्दीघाटी* महाकाव्य का छोटा सा अंश थी । कविता पढ़ी और याद हो गई । अभी तक छह पंक्तियाँ याद हैं:-
रण बीच चौकड़ी भर-भर कर चेतक बन गया निराला था
राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था
गिरता न कभी चेतन तन पर राणा प्रताप का कोड़ा था
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर या आसमान पर घोड़ा था
जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था
राणा की पुतली फिरी नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था
बचपन की उन्हीं यादों के साथ कविवर श्याम नारायण पांडेय और उनके हल्दीघाटी महाकाव्य के अंश चेतक कविता को एक कुंडलिया के माध्यम से प्रणाम कर रहा हूँ :-
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*हल्दीघाटी महाकाव्य (कुंडलिया)*
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हल्दीघाटी था पढ़ा , कक्षा थी तब पाँच
अब तक है कंठस्थ सब ,आई तनिक न आँच
आई तनिक न आँच ,याद चेतक की गाथा
चेतक का बलिदान , उच्च करता है माथा
कहते रवि कविराय , वीरता की परिपाटी
धन्य – धन्य पान्डेय , धन्य है हल्दीघाटी
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर उ. प्र.मोबाइल 99976 15451
[06/01, 12:04 PM] Ravi Prakash: *रोको कोई युद्ध (कुंडलिया)*
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बहती शोणित की अरे ,सदियों से है धार
निर्णय भालों ने किया ,निर्णायक तलवार
निर्णायक तलवार , कौन है जीता – हारा
साँसें किसकी शेष ,मृत्यु ने सब को मारा
कहते रवि कविराय ,मनुजता सबसे कहती
रोको कोई युद्ध , रक्त की धारा बहती
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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शोणित = खून ,सिंदूर ,लाल
[07/01, 11:26 AM] Ravi Prakash: *सुजान (कुंडलिया)*
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मिली सफलता बस उन्हें ,जो हैं लोग सुजान
मूरख को ठगते मिले , सब जाने – अनजान
सब जाने – अनजान , ज्ञान से तरती नौका
धोखेबाज जहान , ढूँढती रहती मौका
कहते रवि कविराय ,काम कौशल से चलता
जो हैं दुनियादार , उन्हीं को मिली सफलता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997615451
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*सुजान =* चतुर , कुशल
*जहान =* दुनिया
[07/01, 1:20 PM] Ravi Prakash: *मामूली आदमी (कुंडलिया)*
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मामूली खाते रहें, मामूली घर – द्वार
मामूली चलता रहे , अपना कारोबार
अपना कारोबार , स्वास्थ्य मामूली पाएँ
मामूली सम्मान , खुशी या गम सब आएँ
कहते रवि कविराय ,चढ़ाना कभी न सूली
कभी न चाहें स्वर्ग , प्रभो रखना मामूली
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*सूली पर चढ़ाना =* फाँसी पर चढ़ाना ,अपार कष्ट देना
[08/01, 11:30 AM] Ravi Prakash: *दर्प (कुंडलिया)*
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कहलाता सबसे बुरा , जग में दुर्गुण दर्प
बिना बात फुफकारता ,विषवाला ज्यों सर्प
विषवाला ज्यों सर्प ,मनुज को यह दुत्कारे
माने खुद को भूप , रंक बाकी जन सारे
कहते रवि कविराय ,नाश से इसका नाता
आत्मविघातक रोग ,काल खुद में कहलाता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*दर्प =* अहंकार ,घमंड ,गर्व
[08/01, 11:10 PM] Ravi Prakash: *सिर के बाल (हास्य कुंडलिया)*
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बालों की वैरायटी , सिर के बाल कमाल
कुछ काले कुछ श्वेत हैं ,कुछ के दिखते लाल
कुछ के दिखते लाल ,बाल कुछ सीधे-सादे
कुछ में उलझन व्याप्त ,झाड़ियाँ जैसे लादे
कहते रवि कविराय ,बाल शोभा गालों की
रखिए बाल सँभाल , करें सेवा बालों की
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[10/01, 11:59 AM] Ravi Prakash: *विमूढ़ (कुंडलिया)*
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समझाना है मूर्खता , जो हैं लोग विमूढ़
बात समझते कब भला ,होती है जो गूढ़
होती है जो गूढ़ ,. बुद्धि जितनी बतलाएँ
करें न कोई तर्क , मूर्ख से पिंड छुड़ाएँ
कहते रवि कविराय ,ज्ञान मत व्यर्थ लुटाना
गुणी – जनों के बीच ,उचित रहता समझाना
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*विमूढ़ =* मूर्ख ,बेसुध ,ज्ञान रहित
[10/01, 5:46 PM] Ravi Prakash: *बर्फी रसगुल्ला – एक लव स्टोरी ( हास्य कुंडलिया )*
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रसगुल्ला करने लगा , बर्फी से जब बात
गरम जलेबा जल उठा , हलवा भरी परात
हलवा भरी परात , गोल लड्डू घबराया
बोला कालाजाम , रंग ने हमें हराया
कहते रवि कविराय ,युद्ध था खुल्लम-खुल्ला
जीता लेकिन प्यार ,अमर बर्फी रसगुल्ला
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*रचयिता :रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*परात =* मिठाई रखने का बड़ा पात्र
[11/01, 11:26 AM] Ravi Prakash: *ब्रह्म ( कुंडलिया )*
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तारा जिसने जीव को ,तारक – ब्रह्म महान
उसके कोई भी मनुज , होता नहीं समान
होता नहीं समान , सदा से मुक्ति प्रदाता
करना इसको प्राप्त ,सहज सबको आ जाता
कहते रवि कविराय , ध्यान है सबसे प्यारा
मिलता इससे ब्रह्म , इसी ने सबको तारा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*तारक* = तारने वाला ,पार लगाने वाला
*ध्यान* = मेडिटेशन ,ईश्वर को प्राप्त करने की एक सहज विधि
[11/01, 7:05 PM] Ravi Prakash: *उठाऊ-चूल्हा नेता (हास्य कुंडलिया)*
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नेता दलबदलू हुए , नेता धोखेबाज
किस दल के हैं यह सगे ,किस दल की आवाज
किस दल की आवाज , जहाँ है हलवा – पूरी
जाने को तैयार , वहीं जी करें हजूरी
कहते रवि कविराय , कार्यकर्ता दिल देता
टिका यही अविराम , उठाऊ – चूल्हा नेता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल_ 99976 15451
[11/01, 10:30 PM] Ravi Prakash: *हिमपात-दर्शन (हास्य कुंडलिया)*
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नीले सारे पड़ गए ,दस के दस नाखून
पहुँचे थे हिमपात में ,जब हम दे्हरादून
जब हम देह्रादून ,होंठ पर कंपन आता
बुरे फँसे इस बार ,बदन कहता ठिठुराता
कहते रवि कविराय , बर्फ के गोले मारे
था तो रंग सफेद , दिखे पर नीले सारे
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*देह्रादून =* देहरादून
[11/01, 10:30 PM] Ravi Prakash: *स्वागतम धरने (हास्य कुंडलिया)*
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धरने पर भी सोचिए ,बजट बने जब आम
कुछ पैसा रखिए जरा ,धरने के भी नाम
धरने के भी नाम ,लंच सरकार खिलाए
सुबह – शाम जलपान ,गुदगुदे सोफे लाए
कहते रवि कविराय ,काम हैं काफी करने
आवभगत हो भव्य ,स्वागतम करिए धरने
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[11/01, 10:32 PM] Ravi Prakash: *सुंदर नाखून (हास्य कुंडलिया)*
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कोई लंबे रख रही , कोई रखती न्यून
सुंदरियों के देखिए ,भाँति -भाँति नाखून
भाँति-भाँति नाखून ,नेल हैं पालिश वाले
हरे गुलाबी लाल , मस्त लगते मतवाले
कहते रवि कविराय , सुंदरी रहती खोई
नख-शिख तक सौंदर्य ,चाहती गाए कोई
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[11/01, 10:33 PM] Ravi Prakash: *कुल्हड़ वाली चाय (तीन हास्य कुंडलियाँ)*
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( *1* )
आती खुशबू मस्त है ,कुल्हड़ में जब चाय
साँसे जाती हैं महक ,दिल कहता है हाय !
दिल कहता है हाय ,काश ! रोजाना पी लें
नया चषक हर बार ,नए कुल्हड़ सँग जी लें
कहते रवि कविराय ,चाय जब कुल्हड़ पाती
बढ़ जाता आनंद , भले आधी ही आती

🍁🍁☘️☘️( *2* )☘️☘️🍁🍁
नखरे कुल्हड़ के बड़े , महँगी पड़ती चाय
इसमें पीते हैं वही , जिन की मोटी आय
जिनकी मोटी आय ,पिया फेंका बिसराया
कुल्हड़ ने सम्मान , टोकरी में बस पाया
कहते रवि कविराय ,दाम कुल्हड़ का अखरे
मन की रहती चाह , उठे पर कैसे नखरे

🍁🍁☘️☘️( *3* )☘️☘️🍁🍁
घर में कप में पी रहे , रोजाना ही चाय
मजबूरी में कौन सा ,इसके सिवा उपाय
इसके सिवा उपाय ,याद कुल्हड़ की आती
अहा ! महकती गंध ,चहकती क्या मस्ताती
कहते रवि कविराय ,काश कुल्हड़ हो कर में
मन में रहती चाह , चाय कुल्हड़ की घर में
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*कर में =* हाथ में
*चषक =* चाय आदि पीने का पात्र
[11/01, 10:33 PM] Ravi Prakash: *आँखें ( हास्य कुंडलिया )*
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आँखें बतलातीं सदा ,मन की सच्ची बात
जिह्वा शातिर है बड़ी ,दिन को कहती रात
दिन को कहती रात ,झूठ का जाल बिछाती
आँख बोलती सत्य , नहीं धोखा दे पाती
कहते रवि कविराय , मौन हैं लेकिन गातीं
आँखों में लो झाँक ,राज आँखें बतलातीं
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[11/01, 10:34 PM] Ravi Prakash: *धरना-केंद्र (हास्य कुंडलिया)*
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धरना – केंद्र बने हुए , सुंदर जैसे नीड़
तंबू ताने घूमती , सड़कों पर है भीड़
सड़कों पर है भीड़ ,मुफ्त में मिलता खाना
लोकतंत्र का अर्थ ,अराजकता तक जाना
कहते रवि कविराय ,न हालत अभी सुधरना
गुल खिलवाए और ,कौन जाने यह धरना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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नीड़ = आश्रय ,घर ,घोंसला
[11/01, 10:35 PM] Ravi Prakash: *सोशल मीडिया की दुनिया(हास्य कुंडलिया)*
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कहते उसको स्वर्ग कब ,कहते कब हैं नर्क
इस दुनिया से है परे ,उस दुनिया में फर्क
उस दुनिया में फर्क ,वहाँ के अलग नजारे
अलग वहाँ के चित्र ,मित्र इस जग से न्यारे
कहते रवि कविराय ,उसी में खोए रहते
बच्चे वृद्ध जवान ,मस्त उस जग को कहते
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[12/01, 11:09 AM] Ravi Prakash: *फूलों में मकरंद (कुंडलिया)*
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मृग में कस्तूरी बसी , फूलों में मकरंद
शशि के भीतर झाँकिए ,शीतलता है मंद
शीतलता है मंद ,अग्नि में ताप विराजा
निहित ढोल में ताल ,शौर्य से गाजा-बाजा
कहते रवि कविराय ,लाज नारी की दृग में
दिखे श्वान में सूँघ ,कुलाँचे भरना मृग में
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*मकरंद* = फूलों का रस ,फूलों का केसर
[12/01, 12:12 PM] Ravi Prakash: *मेरे प्रिय लेखक शरद जोशी*
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शरद जोशी (1931 – 1991) उन दिनों नवभारत टाइम्स में प्रतिदिन स्तंभ के अंतर्गत व्यंग्य लेख लिखते थे । अखबार के अंतिम पृष्ठ के ऊपरी कोने में उनका यह व्यंग्य छपता था । नपी-तुली शब्द संख्या रहती थी । जब अखबार आता था ,मैं सबसे पहले शरद जोशी का व्यंग्य पढ़ता था। एक साँस में सब कुछ पढ़ जाता था। अहा ! कैसा सुंदर प्रवाह रहता था । जैसे नाव नदी के तट से चली और कब उस पार पहुँच गई ,पता ही नहीं चलता था ।
अनेक वर्षों तक यह क्रम चलता रहा। फिर एक दिन पढ़ते-पढ़ते यह समाचार आया कि प्रतिदिन के स्तंभ लेखक शरद जोशी नहीं रहे । मैं रो पड़ा । मेरा प्रिय लेखक अब इस संसार में नहीं था ।
1986 में जब श्री विष्णु प्रभाकर मेरी पुस्तक का विमोचन करने के लिए रामपुर (उत्तर प्रदेश) पधारे थे ,तब मैंने बातों-बातों में उनसे यह जिक्र किया था कि शरद जोशी बहुत अच्छा लिखते हैं । विष्णु प्रभाकर जी ने इस पर टिप्पणी की थी “वह जितना अच्छा लिखते हैं , उससे कहीं ज्यादा अच्छा पढ़ते हैं ।” संकेत कवि सम्मेलनों अथवा गोष्ठियों में शरद जोशी जी द्वारा पढ़कर सुनाए जाने वाले व्यंग्य से था। उन जैसा लेखक व्यंग्य की दुनिया में दूसरा नहीं हुआ।
श्रद्धाँजलि स्वरूप प्रस्तुत है एक कुंडलिया :-
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*शरद जोशी (कुंडलिया)*
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*प्रतिदिन* चलते देखते ,व्यंग्य लेख के तीर
धनुष शरद जोशी लिए , अद्भुत योद्धा वीर
अद्भुत योद्धा वीर ,नाव ज्यों जल में चलती
लिए व्यंग्य की मार ,हास्य के भीतर पलती
कहते रवि कविराय ,शब्द चुनते थे गिन-गिन
लेखन-क्रम अविराम ,धन्य लिखते थे प्रतिदिन
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*प्रतिदिन* = नवभारत टाइम्स में प्रकाशित होने वाला शरद जोशी का दैनिक व्यंग्य स्तंभ
[12/01, 1:25 PM] Ravi Prakash: *वाह-वाह क्या दाँत (हास्य कुंडलिया)*
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गिरते – गिरते गिर गए ,बत्तिस दाँत तमाम
खाने लायक मुँह बचा ,सिर्फ पिलपिले आम
सिर्फ पिलपिले आम ,पोपला मुख जब पाया
बत्तीसी का सेट , एक नकली लगवाया
कहते रवि कविराय ,युवा अब होकर फिरते
देते मधु – मुस्कान , बिजलियाँ बनकर गिरते
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल 99976 15451*
[12/01, 4:06 PM] Ravi Prakash: *लाइक और कमेंट 【हास्य कुंडलिया】*
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पाता सोशल मीडिया ,लाइक और कमेंट
जिसको ज्यादा मिल गए ,महके जैसे सेंट
महके जैसे सेंट , नहीं मिलते घबराता
चकराता सिर घोर ,उतर मुखमंडल जाता
कहते रवि कविराय ,धन्य जीवन कहलाता
लाइक और कमेंट , ढेर जो भर – भर पाता
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल_ 99976 15451
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सेंट = इत्र
[12/01, 10:28 PM] Ravi Prakash: *भीड़तंत्र (कुंडलिया)*
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हो – हल्ला सबसे बड़ा , हाँके आज स्वराज
शोर – शराबा कह रहा ,हम जन की आवाज
हम जन की आवाज , भीड़ कानून बनाए
कैसा तर्क – वितर्क , भैंस लाठी ले जाए
कहते रवि कविराय , उसी का भारी पल्ला
जिस की चीख-पुकार ,कर रहा जो हो-हल्ला
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
_मोबाइल_ 99976 15451
[13/01, 1:13 PM] Ravi Prakash: *लक्ष्य (कुंडलिया)*
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रखते हैं जो हौसला , जिनमें है उत्साह
मंजिल पाने की जिन्हें , रहती गहरी चाह
रहती गहरी चाह , भले अंधड़ सौ छाते
उड़ – उड़ जाते पेड़ , ज्वार सागर में आते
कहते रवि कविराय ,सफलता वह जन चखते
चले सदा अविराम , लक्ष्य पर नजरें रखते
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रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 999761 5451
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अंधड़ = ऐसी आँधी जिससे वातावरण में अँधेरा और धूल छा जाए
[14/01, 11:33 AM] Ravi Prakash: *पुनः शाहीन बाग ( कुंडलिया )*
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धरने अपने देश में , हुए भयंकर रोग
नूतन एपीसोड यह , शाहिन बाग प्रयोग
शाहिन बाग प्रयोग , इन्हें हठधर्मी लानी
जिद पर अड़ियल भीड़ ,एक-सी वही कहानी
कहते रवि कविराय , नहीं देंगे कुछ करने
ज्यों ही दिखा सुधार , चलेंगे दिल्ली धरने
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल* 99976 15451
[14/01, 11:55 AM] Ravi Prakash: *धीर (कुंडलिया)*
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पाते मंजिल हैं वही , होते हैं जो धीर
संयम – गुण जिनमें बसा ,भीतर से जो वीर
भीतर से जो वीर , पराजय से कब डरते
लेकर नव – उत्साह , युद्ध में पुनः उतरते
कहते रवि कविराय ,कठिन क्षण सबके आते
जो स्वभाव के धीर ,सफलता वह ही पाते
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*धीर* = जो जल्दी विचलित न हो
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/01, 12:38 PM] Ravi Prakash: *मकर संक्रांति (कुंडलिया)*
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रेवड़ियाँ लड्डू गजक ,खिचड़ी उड़द अचार
सूर्य उत्तरायण चला ,खिलता व्योम अपार
खिलता व्योम अपार , पतंगे रंग – बिरंगी
मुस्काती है आग , मूँगफलियाँ बेढ़ंगी
कहते रवि कविराय ,थिरकती जीवन-लड़ियाँ
महक भरी संक्रांति , गा रहीं गुड़ रेवड़ियाँ
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[14/01, 3:46 PM] Ravi Prakash: *निर्धनता ( कुंडलिया )*
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निर्धनता सबसे बड़ा , जग में है अभिशाप
किसने इज्जत से कहा ,निर्धन को श्री-आप
निर्धन को श्री – आप , लताड़ा हरदम जाता
रिश्तेदार न पास , कभी उसको बैठाता
कहते रवि कविराय , बैर सुख से है ठनता
जीवन का उपहास , उड़ाती नित निर्धनता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/01, 11:31 AM] Ravi Prakash: *कनखी (कुंडलिया)*
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करती कनखी की नजर ,जादू भरा कमाल
इससे प्रिय को मिल गया ,दिल का सारा हाल
दिल का सारा हाल ,आँख कब सीधे लड़ती
चुपके से क्षण – मात्र ,लक्ष्य पर जाकर गड़ती
कहते रवि कविराय , चित्त में धैर्य न धरती
हुई आँख बेशर्म , क्रिया कनखी से करती
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*कनखी =* आँख की कोर , तिरछी निगाह से देखने की क्रिया ,आँख का इशारा , दूसरों की निगाह बचा कर किया जाने वाला संकेत
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,* बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[15/01, 12:10 PM] Ravi Prakash: *राम मंदिर निर्माण (कुंडलिया)*
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सबका मंदिर बन रहा , सबके हैं प्रभु राम
घट – घट वासी राम को , करिए सभी प्रणाम
करिए सभी प्रणाम , काम में हाथ बटाएँ
बनें श्रेष्ठ नल – नील , गिलहरी कुछ बन जाएँ
कहते रवि कविराय ,मिटा सब झगड़ा कब का
नमन अयोध्या – धाम , राम का मंदिर सबका
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[16/01, 11:21 AM] Ravi Prakash: *गिरि (कुंडलिया)*
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धरती के सागर चरण ,गिरि हैं शीश समान
नदियाँ झरने खुशनुमा ,इसकी देह महान
इसकी देह महान ,हिमालय गिरि का राजा
लगता जैसे उच्च , स्वर्ग का यह दरवाजा
कहते रवि कविराय ,झील शोभा मन-हरती
पाकर परम प्रसन्न , व्योम मेघों को धरती
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*गिरि* = पहाड़
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
*मोबाइल* 99976 15451
[16/01, 3:34 PM] Ravi Prakash: *ध्यान (कुंडलिया)*
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आओ चुपके से प्रभो , दो ऐसी सौगात
भीतर से लगने लगे , जैसे हुआ प्रभात
जैसे हुआ प्रभात ,जगे सब कुछ जो अपना
जगत लगे निस्सार , क्षुद्र हो जैसे सपना
कहते रवि कविराय , परम आनंद जगाओ
करूँ तुम्हारा ध्यान ,नाथ ! प्रियतम बन आओ
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[16/01, 6:38 PM] Ravi Prakash: *वार्ता का दौर : एक रिपोर्ट*
*(हास्य कुंडलिया)*
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आए बैठे फिर हुई , नए दौर की बात
हमने दिन को दिन कहा ,वह बोले फिर रात
वह बोले फिर रात ,सभी ने मुँह बिचकाया
हमने अपना भोज , उन्होंने अपना खाया
कहते रवि कविराय ,नहीं क्षण-भर मुस्काए
टेढ़े मुँह शुरुआत , लौट टेढ़े मुँह आए
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/01, 12:39 PM] Ravi Prakash: *प्राण – पखेरू (कुंडलिया)*
🦜🦜🦜🦜🦜🦜🦜
प्राण – पखेरू जानिए , जाते अपने नीड़
छोड़ – छाड़ चलते बने ,जग की सारी भीड़
जग की सारी भीड़ ,उड़े तो फिर कब आते
कर – कर के फिर याद ,मित्र-जन रोते जाते
कहते रवि कविराय , आत्म को रँगिए गेरू
सदा रहें तैयार , उड़ेंगे प्राण पखेरू
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🌻🌻🌻🌻
*पखेरू* = पक्षी चिड़िया
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*रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उत्तर प्रदेश)*
मोबाइल 99976 15451
[17/01, 1:21 PM] Ravi Prakash: *मकसद हाहाकार (कुंडलिया)*
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धरने आंदोलन बढ़े , चौतरफा मुठभेड़
खाने दौड़ा खेत ही ,अपनी खुद की मेड़
अपनी खुद की मेड़ ,बुद्धि से भरे-भराए
जिद पर अड़ा विपक्ष ,चुनी सरकार हराए
कहते रवि कविराय ,भीड़ से सड़कें भरने
मकसद हाहाकार , मचाने निकले धरने
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*मेड़* = खेत की चारदीवारी
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/01, 1:33 PM] Ravi Prakash: *लक्ष्मी वंदना (हास्य कुंडलिया)*
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देना माता लक्ष्मी , यह वरदान महान
एक छंद पढ़कर मिले , कंचन तोला दान
कंचन तोला दान ,सभी कवि धनिक बनाओ
हर श्रोता को कार , एक कोठी दे जाओ
कहते रवि कविराय , आप से वर यह लेना
सब को सौ – सौ लाख , बैंक खाते में देना
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*कंचन तोला* = एक तोला सोना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/01, 1:51 PM] Ravi Prakash: *सरस्वती वंदना (दो कुंडलियाँ)*
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( *1* )
दाता हे माँ शारदे , दो इतना वरदान
दुनिया में हो उच्चतम ,अपना देश महान
अपना देश महान , देश से तिमिर हटाओ
क्षुद्र लोभ की नीति ,स्वार्थपरता बिसराओ
कहते रवि कविराय ,करो निर्मल मन माता
सबको दो सद्बुद्धि , वादिनी वीणा दाता
( *2* )
पाएँ बुद्धि पढ़े – लिखे ,उनमें भरो विवेक
भीतर से अविरल बहें ,सद्विचार शुभ नेक
सद्विचार शुभ नेक ,नहीं रिश्वत अब खाएँ
हर फाइल नि:शुल्क ,सभी दफ्तर निबटाएँ
कहते रवि कविराय ,आलसी द्रुतगति लाएँ
सदा – सदा वरदान , शारदा माँ यह पाएँ
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/01, 2:31 PM] Ravi Prakash: *श्रमिक (कुंडलिया)*
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घर से चलते हैं श्रमिक , सुबह बजे जब आठ
दिन-भर श्रम का पढ़ रहे , रोजाना ही पाठ
रोजाना ही पाठ , ईंट सिर पर हैं ढ़ोते
मिलता तब ईनाम , मूल्य पाकर खुश होते
कहते रवि कविराय ,सदा यह खाली कर से
लेकर चलते साथ , शुष्क दो रोटी घर से
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*कर =* हाथ
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[17/01, 7:52 PM] Ravi Prakash: *अधूरापन (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🟡🟡
पूरी होती कब यहाँ ,किसकी मन की चाह
तनिक अधूरी रह गई ,सबकी मंजिल-राह
सबकी मंजिल-राह , तृप्त कब सब इच्छाएँ
कसक रही कुछ शेष ,आह बनकर तड़पाएँ
कहते रवि कविराय ,जरा – सी रहती दूरी
सुख सब किसके पास , अंत में खाना – पूरी
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[18/01, 1:09 PM] Ravi Prakash: *श्रद्धाँजलि पूर्व शिक्षक-विधायक श्री ओम प्रकाश शर्मा (कुंडलिया)*
🙏🙏🍃🍂🙏🍃🍂🙏🙏
गाथा जिनकी बन गई ,शिक्षा और समाज
अर्पित सौ – सौ बार है ,श्रद्धाँजलि है आज
श्रद्धाँजलि है आज ,पाँच दशकों की वाणी
हुआ न कोई और , आपका किंचित सानी
कहते रवि कविराय , उच्च करती है माथा
शिक्षक ओमप्रकाश ,नमन शर्मा की गाथा
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997 615451
[18/01, 9:28 PM] Ravi Prakash: *केवड़िया (कुंडलिया)*
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जोड़ा केवड़िया नगर , ट्रेनें वृहदाकार
दिल्ली मुंबइ चेन्नई , आई नई बयार
आई नई बयार , रेल से जुड़ता नाता
यह सरदार पटेल , मूर्ति को शीश नवाता
कहते रवि कविराय ,यत्न मत समझो थोड़ा
यह है नमन विशेष , देश को जिसने जोड़ा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
केवड़िया गुजरात के नर्मदा जिले का अल्प जनसंख्या वाला एक गुमनाम कस्बा था ।लौह पुरुष सरदार पटेल की संसार में सबसे ऊँची मूर्ति “स्टैचू ऑफ यूनिटी” की स्थापना ने उसे विश्व – भर के आकर्षण का केंद्र बना दिया ।
17 जनवरी 2021 ,रविवार को भारत भर के 8 बड़े नगरों से केवड़िया रेलवे स्टेशन का सीधा संपर्क ट्रेन द्वारा जोड़ दिया गया। अति विशिष्ट सुविधाओं से सुसज्जित यह ट्रेनें न केवल सफर को मनोहरी बनाती हैं, अपितु “स्टैचू ऑफ यूनिटी” को एक पर्यटन-स्थल तथा तीर्थ-धाम के रूप में भी प्रतिष्ठित करने में समर्थ हैं।
[19/01, 10:53 AM] Ravi Prakash: *भंगिमा (कुंडलिया)*
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जिसकी जैसी भंगिमा , वैसा मन का भाव
संकट में जानो पड़ी , डगमग चलती नाव
डगमग चलती नाव , खड़े टेढ़े जो पाते
नटखट तनिक विचार ,समझ लो उनमें आते
कहते रवि कविराय ,दुखी लेता है सिसकी
ध्यानावस्थित जीव , शांत मुद्रा है जिसकी
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*भंगिमा =* कलापूर्ण शारीरिक मुद्रा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[19/01, 12:00 PM] Ravi Prakash: *अग्रोहा (कुंडलिया)*
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अग्रोहा की यश – कथा ,एक राष्ट्र जन एक
अग्रसेन भगवान की , रचना सुंदर नेक
रचना सुंदर नेक , अठारह गोत्र रचाए
शुभ – विवाह अभिराम ,गोत्र से इतर कराए
कहते रवि कविराय , मानते थे सब लोहा
नहीं लोक में तीन , राज्य जैसा अग्रोहा
🪴🪴🍁🌱☘️☘️🌱🍁🪴🪴
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[19/01, 2:08 PM] Ravi Prakash: *साठ वर्ष की आयु (कुंडलिया)*
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पढ़ने वाले पढ़ लिए ,जीवन के सब पाठ
सबसे अच्छी आयु है ,सच मानो तो साठ
सच मानो तो साठ , उम्र सचमुच वरदाई
सही समझ. परिपक्व , साठ ने ही है पाई
कहते रवि कविराय ,चलो द्रुत गति से गढ़ने
लिखकर छंद विशेष ,जिंदगी-रण में पढ़ने
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[19/01, 8:31 PM] Ravi Prakash: *संसद की कैंटीन (हास्य कुंडलिया)*
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जाने कैसे हो गई ,यह सब्सिडी-विहीन
समझो अब श्रीहीन है ,संसद की कैंटीन
संसद की कैंटीन ,आमजन नजर लगाते
सभी मजे बेकार ,सब्सिडी तुरत हटाते
कहते रवि कविराय ,गए सांसद के माने
हुए आदमी आम ,दर्द कोई कब जाने
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[20/01, 10:35 AM] Ravi Prakash: *घट (कुंडलिया)*
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घट-घट वासी को को किया ,जिसने मन से याद
छूटा घट तो मोक्ष वह , पाता उसके बाद
पाता उसके बाद , कलुष मन के मिट जाते
आत्मा सब में एक , समझ कम ही यह पाते
कहते रवि कविराय , मृत्यु आ जाती चटपट
करते रहो प्रणाम , ब्रह्म जो वासी घट – घट
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*घट =* कलश ,घड़ा ,देह शरीर
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[21/01, 11:17 AM] Ravi Prakash: *चंपई (कुंडलिया)*
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रंगत उसकी चंपई , सोने जैसा गात
उजला – उजला लग रहा ,मानो शुभ्र प्रभात
मानो शुभ्र प्रभात , केश बिखरे हैं काले
जादू – भरी सुगंध , नयन लगते मतवाले
कहते रवि कविराय ,चार क्षण की भी संगत
जिसने पाई धन्य , हुई उस ही की रंगत
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*गात* = शरीर
*शुभ्र* = सफेद , उजला
*चंपई* = चंपा के फूल के रंग का , हल्का पीलापन लिए उज्ज्वल वर्ण जिससे नायिका के गौर वर्ण की उपमा दी जाती है।
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[21/01, 4:35 PM] Ravi Prakash: *राम-नाम (कुंडलिया)*
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झुठलाओ चाहे भले ,सत्य एक बस राम
गूँजेगा यह ही सदा , अर्थी के सँग नाम
अर्थी के सँग नाम ,जगत से पार लगाता
चिंतन वह अभिराम ,राम का जो हो जाता
कहते रवि कविराय ,राम जी के गुण गाओ
कहो राम हैं सार , जगत थोथा झुठलाओ
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 75451
[21/01, 4:58 PM] Ravi Prakash: *दान (कुंडलिया)*
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अपना धन बस वह हुआ ,हुआ राम के नाम
धन्य – धन्य शोभा हुई , आया प्रभु के काम
आया प्रभु के काम , यहीं वरना रह जाता
जाता खाली हाथ , एक निर्धन कहलाता
कहते रवि कविराय ,व्यर्थ संग्रह में खपना
जाते जब परलोक , दान जाता सँग अपना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[21/01, 5:06 PM] Ravi Prakash: *दुखी-संसार (कुंडलिया)*
🍃🌱🌿🍃🌱🌿🍃🌱🌿
पाया जग दुख से भरा ,पाए अश्रु-प्रपात
बीमारी सबको लगी , तन पाता आघात
तन पाता आघात , बुढ़ापे के सब मारे
मरणासन्न शरीर , थके जीवन से हारे
कहते रवि कविराय ,एक दिन ढहती काया
हुई अंत में मृत्यु , चार कंधों पर पाया
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[21/01, 9:27 PM] Ravi Prakash: *राष्ट्रपति जो बाइडन (कुंडलिया)*
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कर्मठ जीवन जी रहे , पिचहत्तर के पार
मंगल वंदन बाइडन , स्वीकारें शत बार
स्वीकारें शत बार , कार्य का भार निभाते
बूढ़ों में अहसास , युवावस्था का लाते
कहते रवि कविराय ,दिखा सक्रिय जीवन- हठ
अमरीका का ताज , पहनते हैं जो कर्मठ
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20 नवंबर 1942 को जन्मे *जो बाइडन* ने 78 वर्ष की आयु में अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया है। इससे पहले 81 वर्ष से अधिक आयु में *मोरारजी देसाई* 1977 में भारत के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। आयु के अंतिम चौथे चरण में सार्वजनिक सक्रियता के यह प्रेरणादायक उदाहरण हैं।
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[22/01, 1:01 PM] Ravi Prakash: *डाई वाले बाल (हास्य कुंडलिया)*
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डाई से काले हुए , सुंदर उर्मिल केश
बूढ़ों के मन से मिटे ,भीतर के सब क्लेश
भीतर के सब क्लेश ,अदा यौवन की लाते
चले अकड़ कर चाल ,बाल सब को दिखलाते
कहते रवि कविराय , बसंती अब अंगड़ाई
हुए साठ के बाल , तीस के रँगकर डाई
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
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*उर्मिल* = लहरों से युक्त ,जिसमें छोटी-छोटी तरंगे या लहरें उठती हैं
[22/01, 7:37 PM] Ravi Prakash: *बिजली-चोरी (हास्य कुंडलिया)*
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चोरी बिजली की करें ,इसमें मजे अपार
बिल कोई आता नहीं ,एसी चलते चार
एसी चलते चार , टैंक में रॉड डुबाएँ
सभी नलों में गर्म ,शीत में जल को पाएँ
कहते रवि कविराय ,सीखिए सीनाजोरी
कहें ठोंक कर ताल ,कौन रोकेगा चोरी
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[22/01, 11:34 PM] Ravi Prakash: *नेताजी सुभाष चंद्र बोस (कुंडलिया)*
🏹🏹🟣🟣🏹🏹🟣🟣🏹🏹
सेना लेकर चल पड़े ,किया देश आजाद
करो पराक्रम बल – भरे , नेताजी को याद
नेताजी को याद , युद्ध बंदूकों वाला
दिया रक्त का दान ,शौर्य दीखा मतवाला
कहते रवि कविराय ,भुला जय हिंद न देना
नेताजी का नाम , देश – प्रिय उनकी सेना
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[23/01, 11:06 AM] Ravi Prakash: *पराक्रम दिवस (कुंडलिया)*
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आज पराक्रम का दिवस , नेताजी की याद
हुआ कौन उन – सा प्रखर , सोचो पहले-बाद
सोचो पहले – बाद , रक्त देता बलिदानी
लिखी लिए बंदूक , हाथ में अमर कहानी
कहते रवि कविराय ,फौज का था अद्भुत श्रम
हुआ हिंद आजाद , नमन वह आज पराक्रम
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*पराक्रम* = शौर्य ,पुरुषार्थ ,साहसिक कार्य
*पराक्रम दिवस* = नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन 23 जनवरी
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[23/01, 11:46 AM] Ravi Prakash: *मैगलगंज की गुलाब जामुन (कुंडलिया)*
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आते – जाते लखनऊ , पड़ता मैगलगंज
यदि गुलाब जामुन नहीं , खाई तो है रंज
खाई तो है रंज , वाह क्या फोकी होती
खाते ही के साथ , स्वाद में जिह्वा खोती
कहते रवि कविराय ,रसिकगण इसको खाते
होता जीवन धन्य , लखनऊ आते – जाते
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*फोकी* = हल्की ,आसानी से मुँह में घुलने वाली
🌷🌷🌷🌹🌹🌹
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
🌹🌹🌹🌷🌷🌷
2015 -16 के आसपास हमने पहली बार मैगलगंज की गुलाब जामुन खाई थी। रामपुर से लखनऊ जाते समय मैगलगंज बीच में पड़ता है। छोटा सा कस्बा है । बाजार के नाम पर केवल गुलाब जामुन की दुकानें हैं । कई दर्जन दुकानें हैं। सड़क के दोनों तरफ खूबसूरत बोर्ड लगाकर सजी रहती हैं। मशहूर पुरानी गुलाब जामुन की दुकान का बोर्ड प्रायः सभी पर लगा रहता है।
गुलाब जामुन जब पहली बार खाई , मन प्रसन्न हो गया । एक गुलाब जामुन मुँह में रखी और रखते के साथ ही लापता हो गई।हम ढूँढते ही रह गए । फिर दूसरी रखी । वह भी गुमशुदा की श्रेणी में आ गई। इतनी फोकी होती है कि मुँह में रखते ही घुल जाती है । फिर उसके बाद तो जब भी लखनऊ जाना हुआ ,रास्ते में मैगलगंज की गुलाब जामुन जरूर खाई । लौटते समय खाई भी और हंडिया में पैक भी करवाईं।
कुछ समय बाद रामपुर से लखनऊ जाते समय बाईपास बन गया । मैगलगंज बीच में छूटने लगा । गुलाब जामुन की याद जब भी उस मोड़ से गुजरते ,तो आती थी । लेकिन देखते ही देखते फिर से बाईपास पर गुलाब जामुन की दुकानें सजने लगीं और एक नया मैगलगंज बाईपास पर निर्मित हो गया। वही स्वाद ,वही गुलाब जामुन । दुकानें पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी – चौड़ी होने लगीं। विभिन्न स्थान विभिन्न चीजों के लिए प्रसिद्ध होते हैं । मैगलगंज गुलाब जामुन का पर्याय बन गया है ।
[24/01, 11:58 AM] Ravi Prakash: *टटका (कुंडलिया)*
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टटका कितना था भला ,लगता प्यारा फूल
मुरझाया फिर जा गिरा ,खाई दिनभर धूल
खाई दिनभर धूल ,रूप अनुपम सब खोया
सोच-सोचकर काल ,विगत को कितना रोया
कहते रवि कविराय ,ध्यान उस ही में अटका
आता पुनि-पुनि याद ,मनोहारी वह टटका
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*टटका* = ताजा (फूल फल आदि), अभी का, हाल का (घटना समाचार आदि)
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[25/01, 10:57 AM] Ravi Prakash: *तिमिर और आलोक (कुंडलिया)*
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आते – जाते नित्य ही , तिमिर और आलोक
इनसे कैसा हर्ष है , इनसे कैसा शोक
इनसे कैसा शोक , रोज का आना – जाना
जग में रहो तटस्थ , मिले जो भी अपनाना
कहते रवि कविराय ,चार दिन सुख-दुख पाते
फिर होता बदलाव , दृश्य फिर नूतन आते
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*आलोक* = प्रकाश
*तिमिर* = अंधेरा ,अंधकार
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[25/01, 12:27 PM] Ravi Prakash: *मुकदमा (कुंडलिया)*
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जाता झगड़ा कोर्ट जब , लगते हैं सौ साल
चला मुकदमा मंद गति ,कछुए की ज्यों चाल
कछुए की ज्यों चाल ,सिर्फ तिथि पर तिथि पड़ती
बिना सजा के जेल , जिंदगी कुछ की सड़ती
कहते रवि कविराय , न्याय जल्दी कब आता
हुई अदालत व्यर्थ , रोज फरियादी जाता
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[25/01, 12:34 PM] Ravi Prakash: *अंतिम यात्रा (कुंडलिया)*
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पहने कपड़े कीमती , रेडीमेड तमाम
धरे रहे सब एक दिन ,आए तनिक न काम
आए तनिक न काम , बिना साबुन नहलाते
दर्जी का क्या काम ,कफन बिन-सिला उढ़ाते
कहते रवि कविराय , उतर जाते सब गहने
अर्थी पर निष्प्राण , देह चलती बिन पहने
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[25/01, 2:04 PM] Ravi Prakash: *राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी पर विशेष*
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*करो वोट से चोट (कुंडलिया)*
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बच्चे सब से कह रहे , डालो अपना वोट
मन में खोट भरी जहाँ ,करो वोट से चोट
करो वोट से चोट , निकल कर घर से जाओ
सही व्यक्ति दल नेक ,वोट से चुनकर लाओ
कहते रवि कविराय ,जिताएँ वह जो सच्चे
बड़ी बड़ों-से – बात , कह रहे हैं जो बच्चे
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[25/01, 2:34 PM] Ravi Prakash: *जिजीविषा (कुंडलिया)*
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जीने को प्रभु ने दिए ,सबको सौ – सौ साल
सुंदर भाव जिजीविषा , सुंदर रखिए ख्याल
सुंदर रखिए ख्याल , हास्य के मोती चुनिए
कभी निराशा हार , न अवसादों को चुनिए
कहते रवि कविराय , घूँट कड़वे पीने को
मिलें भले सौ बार , छोड़िए मत जीने को
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जिजीविषा = जीने की चाह

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[26/01, 10:28 AM] Ravi Prakash: *गणतंत्र (कुंडलिया)*
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रानी – राजा हो गए , किस्सों में सब कैद
लौह – पुरुष सक्रिय सजग ,गृहमंत्री मुस्तैद
गृहमंत्री मुस्तैद , नया भारत कहलाया
गई रियासत – राज , एक गणतंत्र बनाया
कहते रवि कविराय ,प्रजा ने लिखी कहानी
सब अब एक समान ,न कोई राजा – रानी
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*गणतंत्र* = ऐसी शासन प्रणाली जिसमें परंपरागत राजा या रानी के शासन के बजाय जनता द्वारा ही चुनाव प्रक्रिया के द्वारा शासक या प्रतिनिधि चुने जाते हैं ।
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[26/01, 3:37 PM] Ravi Prakash: *मिशन अराजकता (कुंडलिया)*
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फहराया झंडा गया , लाल किले पर आज
मिशन अराजकता लिए ,आए तनिक न बाज
आए तनिक न बाज , नहीं गणतंत्र मनाते
दिल्ली में उत्पात , देश में भय फैलाते
कहते रवि कविराय , तिरंगा इन्हें न भाया
नकली बने किसान , अलग झंडा फहराया
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[27/01, 10:33 AM] Ravi Prakash: *झंझावात (कुंडलिया)*
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आते हैं सौ – सौ घने , भयप्रद झंझावात
लगता जैसे फिर कभी , होगा नहीं प्रभात
होगा नहीं प्रभात , पेड़ मजबूत ढहाते
आँको कम मत खौफ ,साथ यह जो-जो लाते
कहते रवि कविराय , धीर पर कब घबराते
जीवन – पटल विराट , दृश्य चाहे जो आते
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*झंझावात* = तेज आँधी, अंधड़ , वह तेज आँधी
जिसके साथ बारिश भी हो
*धीर* = शांत स्वभाव वाला
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[28/01, 4:34 AM] Ravi Prakash: *वाह-वाह क्या बात ! (कुंडलिया)*
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आलू की टिकिया गरम ,दही-बड़ा विकराल
दाल मुरादाबाद की , अद्भुत वाह कमाल
अद्भुत वाह कमाल , गोलगप्पे अति प्यारे
खाई जी – भर चाट , हो गए वारे – न्यारे
कहते रवि कविराय , प्रभो ! रखना क्रम चालू
दही – रायता सोंठ , कचौड़ी पतले – आलू
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[28/01, 11:08 AM] Ravi Prakash: *हमजोली (कुंडलिया)*
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हमजोली जिनको मिले ,उनका भाग्य महान
इससे बढ़कर विश्व में , होता कौन समान
होता कौन समान , एक मन हैं दो काया
सोचें बैठें साथ , संग में खेले खाया
कहते रवि कविराय , मस्त है जिन की टोली
उनका जीवन धन्य , मिले जिनको हमजोली
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
*हमजोली* = जो प्रायः साथ रहते हों, साथी, सखा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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[29/01, 11:11 AM] Ravi Prakash: *काश हो उनसे मिलना (कुंडलिया)*
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मिलना उनसे चाहिए ,विशद भरे जो ज्ञान
जिनकी दृष्टि अमूल्य हो ,जैसे शुभ्र विहान
जैसे शुभ्र विहान ,सोच में ज्यों नभ दीखे
देखें आकर पास , लगें जो सिंधु सरीखे
कहते रवि कविराय ,पुष्प के जैसे खिलना
जिनके निर्मल हास ,काश हो उनसे मिलना
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*विशद* = व्यापक ,स्पष्ट ,लंबा-चौड़ा
*विहान* = सवेरा ,प्रातः काल
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[29/01, 12:22 PM] Ravi Prakash: *तंबू उखड़ा (कुंडलिया)*
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तंबू उखड़ा चल दिया ,धरना घर की ओर
अभी जहाँ थी जिंदगी ,पसरा मातम घोर
पसरा मातम घोर ,चार नेता बस बाकी
दीख रही है भीड़ ,बेंत के सँग में खाकी
कहते रवि कविराय , बने छोटू अब लंबू
हुए बड़े लाचार , याद करते हैं तंबू
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/01, 10:55 AM] Ravi Prakash: *शहीद (कुंडलिया)*
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भारत माता के लिए , अनगिन हुए शहीद
आजादी की तब जगी , भारत में उम्मीद
भारत में उम्मीद , तिरंगा तब फहराया
लाल किले ने गान ,देश जन-गण-मन गाया
कहते रवि कविराय ,याद बलिदान दिलाता
कहे एकजुट देश , धन्य हे भारत माता
🟡🌻🟡🍂🍃🍂🟡🌻🟡
*शहीद* = सत्य के लिए लड़ते हुए मरने वाला, कर्तव्य के लिए अपने को कुर्बान कर देने वाला

*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/01, 11:17 AM] Ravi Prakash: *नेता खुश हुआ (कुंडलिया)*
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हो – हल्ला फिर मच रहा ,गूँजा शोर अनंत
चालू नेता खुश हुआ , आया लौट बसंत
आया लौट बसंत , अराजकता फिर आई
देते सुर में ताल , परस्पर धन्य बधाई
कहते रवि कविराय ,झाड़कर अपना पल्ला
जिम्मेदार – विहीन , मचाते हैं हो – हल्ला
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/01, 11:52 AM] Ravi Prakash: *विपक्ष (कुंडलिया)*
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देश – विरोधी कार्य को , देता धार विपक्ष
यह प्रवृत्ति क्या है उचित ,प्रश्न आज है यक्ष
प्रश्न आज है यक्ष , अराजकता भड़काना
हो – हल्ले के साथ , दोषियों को उकसाना
कहते रवि कविराय ,देश का जन-जन क्रोधी
पूछ रहा है देश , सहन क्यों देश – विरोधी
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*यक्ष – प्रश्न* = महाभारत काल की प्रसिद्ध कथा जिसमें एक यक्ष ने पांडवों से कुछ कठिन प्रश्न पूछे थे
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997615451
[30/01, 2:16 PM] Ravi Prakash: *संयम (कुंडलिया)*
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गाथा अब उनकी लिखो ,संयम जिनका नाम
अपनों के सँग में किया , अपना वाला काम
अपना वाला काम , सामने थे दंगाई
धन्य पुलिस अभिराम , न गोली मगर चलाई
कहते रवि कविराय , पुलिस का ऊँचा माथा
जन – गण – मन हर साल , गीत गाएगा गाथा
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*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[30/01, 2:50 PM] Ravi Prakash: *गाँधीजी (कुंडलिया)*
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गोली से मरते नहीं ,किंचित कभी विचार
गाँधी जी जिंदा सदा ,हृदयों में साकार
हृदयों में साकार , देश – सेवा व्रतधारी
नतमस्तक यह देश ,आपका चिर आभारी
कहते रवि कविराय ,नमन वह मीठी बोली
लड़ा अहिंसक युद्ध , बिना चलवाए गोली
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*रचयिता : रवि प्रकाश* , बाजार सर्राफा रामपुर (उत्तर प्रदेश )
मोबाइल 99976 15451
[30/01, 10:07 PM] Ravi Prakash: *संस्मरण*
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*सर्राफा- हड़ताल वर्ष 2016*
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सर्वप्रथम एक *कुंडलिया* प्रस्तुत है :-

*धरने पर थे बैठते , सर्राफे के लोग*
*मिले एकजुटता बढ़ी ,मधुर सुखद संयोग*
*मधुर सुखद संयोग , दरी पर बैठा करते*
*आधी सड़क सँभाल ,गगन नारों से भरते*
*कहते रवि कविराय , प्रेम के बहते झरने*
*आए थे सब पास , याद आते हैं धरने*

वास्तव में 2016 में सोने के कारोबार पर एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने के कारण प्रतिबंध जैसी स्थिति आते देखकर अखिल भारतीय स्तर पर सर्राफा व्यवसायियों की ऐतिहासिक हड़ताल हुई थी । चालीस दिन तक बाजार बंद रहे । दुकानों पर ताले लटके रहे । कोई कारोबार नहीं हुआ । एक पैसे की न बिक्री ,न खरीद ,न आमदनी ।
रामपुर में भी रोजाना दरी बिछाकर आधी सड़क पर सब लोग बैठते थे । सर्राफा व्यवसाई चिंता में डूबे हुए थे । समस्या बड़ी और गहरी थी । चालीस दिन की हड़ताल ने रोजी-रोटी का संकट पैदा कर दिया था। लेकिन वास्तव में सरकार के कानून से जो भय व्याप्त हुआ था ,मूलतः रोजी – रोटी का संकट तो उसके द्वारा पैदा हुआ था। उसी से उबरने के लिए सब व्यापारी संघर्षरत थे। माइक-लाउडस्पीकर का इंतजाम रहता था और दिन – भर नारे लगते थे। समय-समय पर हम सब लोग अपने विचार व्यक्त करते रहते थे ।
व्यापारी संगठनों का भी बड़ा सहयोग रहा । शैलेंद्र शर्मा जी तो इस आंदोलन के एक अभिन्न अंग ही बन गए थे । प्रायः रोजाना हमारे धरने में रहते थे । बैठते थे, सलाह देते थे और अपने विचार प्रकट कर के आंदोलन को उत्साहित करते थे । संदीप सोनी जी, अनिल अग्रवाल जी ,कपिल आर्य जी आदि तमाम नाम ऐसे हैं जो समय-समय पर आंदोलन के समर्थन में जुटते रहे ।
धरने के साथ-साथ अनशन भी चले। व्यापारी-गण सुबह अनशन पर बैठते थे और शाम को अनशन तोड़ते थे। इस तरह भी वातावरण बनाया गया । बाइक रैली भी निकली । मशाल जुलूस भी निकाला गया। उत्साही बंधु चंद्र प्रकाश रस्तोगी जी मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी संभाले हुए थे । सब गतिविधियों को अपने रजिस्टर में नोट करते जाते थे । कुछ बंधु उत्साह में आकर ट्रेन रोकने की भी योजना बनाने लगे थे । लेकिन समझदार लोगों ने उनको कानून हाथ में लेकर कोई भी काम न करने की सलाह दी। सौभाग्य से वह मान गए ।
अपनी बात जितने मंच भी थे, उन सब पर हम लोगों ने कही । रामपुर – बरेली हाईवे पर जब केंद्रीय मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी के सामने एक छोटी – सी मीटिंग हुई जिसमें एक सौ के करीब व्यापारी इकट्ठा हुए थे । तब भी हमने अपनी पीड़ा को अभिव्यक्त किया था ।
स्थिति की भयावहता को दर्शाने के लिए एक बार हमारे बंधु सब्जी का ठेला ले आए थे और उस पर सब्जी ही बेचने का नाटक करने लगे थे। कुछ लोगों ने इसी भाव से बेरोजगार दफ्तर की ओर भी प्रस्थान किया था । हमने भी इन्हीं परिस्थितियों पर कुछ हास्य कविताएँ लिखकर उन दिनों सभा में सुनाई थीं।
इस पूरे दौर में नुकसान तो बहुत रहा लेकिन एक फायदा हुआ । सब व्यापारी दुख की इस घड़ी में एक दूसरे के ज्यादा करीब आए । उनमें आत्मीयता बढ़ी। सबका संग – साथ रोजाना होता था । सुबह से शाम तक दरी पर पास-पास बैठने के कारण चेहरे पहचानने में मदद होने लगी । एक दूसरे के स्वभाव से परिचित होने लगे । आंदोलन की वैचारिकता के साथ-साथ और भी बातें करते रहते थे। एक तरह से दुख की इस घड़ी में भी एक प्रकार की मस्ती थी । वह जो संग-साथ और संपर्क उन चालीस दिनों में गहरा बना ,वह अभी भी स्मृतियों में जीवित है । जब भी उस दौर का स्मरण करते हैं ,तो आँखों में चमक आ जाती है ।
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*लेखक : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[31/01, 10:43 AM] Ravi Prakash: *गरल (कुंडलिया)*
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पीना पड़ता है गरल , सबको सौ-सौ बार
अमृत केवल कल्पना , मरण सदा साकार
मरण सदा साकार ,कष्ट-दुख प्रतिदिन आते
यह जीवन-संगीत , जगत में जन सब पाते
कहते रवि कविराय ,कहाँ सुखमय है जीना
राजा हो या रंक , गरल पड़ता है पीना
🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡
*गरल* = विष, साँप का जहर
🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡🟡
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
[31/01, 12:08 PM] Ravi Prakash: *पलटते बाजी आँसू (कुंडलिया)*
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
आँसू जग में मानिए ,सर्वोत्तम हथियार
इसके आगे फेल हैं , बंदूकें – तलवार
बंदूकें – तलवार , वही इस जग में भारी
रखता हरदम साथ ,आँसुओं की तैयारी
कहते रवि कविराय , उसी के आँसू धाँसू
निकले कभी-कभार ,पलटते बाजी आँसू
🌸☘️🌸☘️🌸☘️🌸☘️🌸
*रचयिता : रवि प्रकाश* ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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