00000 पतंग 00000

मेँ भी एक पतंग
बन जाऊ
छू लूँ
आसमान की
ऊँचाईयो को
उनमुक्त हो
रंग – बिरंगी
तितलियों की तरह
लहराऊँ मैं भी
लहर-लहर
खुले आकाश में
उड़ती रहूँ
अपने तरीके से
जब जी चाहे |

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