Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 May 2020 · 3 min read

लॉक डाउन ने सबको अपने अपने काम मे लगा दिया

आज से 20 साल पहले कोई भी व्यक्ति बेरोजगार नही था । वरन यहाँ तक कि “बेरोजगारी” शब्द से ही लोग वाकिफ नही थे । सभी के पास अपना अपना खानदानी काम था । जैसे एक मिठाई बनाने वाले के बच्चे भी मिठाई ही बनाते थे और उस कला को आगे अपने वरसानो को भी सिखाते थे, इस सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था । परंतु जैसे ही ये आधुनिक जमाना आया सब कुछ बदल सा गया । आधुनिकता के तले लोग सब कुछ भूलते जा रहे । यहां तक कि मानवीय मूल्य भी हाशिये पर आ गए, इंसानियत विलीन होती प्रतीत हो रही है ।

लेकिन जब से ये लॉक डाउन लगा सब अपने वास्तविकता में आ गए है । जो शहर में बड़े ठाट बाट से ठसक से रहते थे वो भी गांव आ गए है । जिनका जो खानदानी काम था उसमे शहरी बाबू हाथ बंटाने लग गए है ।

मैं स्वयं भी अपने काम मे लग गया हूँ । लॉक डाउन के दरम्यान पता चला कि मेरे में जितने भी कामगार काम करते है वो एकदम निश्चिंत होकर करते है, कोई काम का इतना दबाव नही रहता है । सब लोग एकदूसरे से हँसी मजाक करते हुए अपनी मजदूरी का कार्य करते है । निस्वार्थ भाव से एकदूसरे का ख्याल रखा जाता है ।

इसी लॉक डाउन में हमारे गांव में पंचायत द्वारा पौधरोपण हेतु गड्ढे खोदने का काम निकला था । जिसमे आप जितने गड्ढे खोदेंगे उतने दाम मिलेंगे । परिणामस्वरूप मैं भी शौक से गेती, कुदाल लेकर चल दिया । पहले तो मैंने ऐसा काम किया नही था फिर भी लोगो के साथ प्लांटेशन के लिए चल दिया ।

सभी लोगो ने 12 बजे तक औसतन 10 से 12 गड्ढे खोद दिये परंतु मुझसे तीन ही गड्ढे खुदे वो भी टेढ़े मेढे आधे अधूरे । मैं बहुत थक चुका था, शरीर से पसीने की धारा रुकने का नाम ही नही ले रही थी । शाम को जब सभी के गड्ढे खुद चुके थे तभी मेरे गाँव के लोगो ने देखा कि मुझसे केवल तीन ही गड्ढे खुदे है तो उन सबने मेरे पास आकर गड्ढे खोदने लगे । लगभग सबने मिलकर 14 से 15 गड्ढे खोद दिए थे । और जब सचिव साहब हिसाब लिखने के लिये आये तो मेरे नाम पर लोगो ने 15 गड्ढे लिखवा दिए । मैं अवाक सा रह गया । जहाँ शहर में लोग एक दूसरे को पीछे धकेलकर खुद आगे बढ़ जाते है । दुसरो की परवाह भी नही करते । स्वार्थवश अपना ही फायदा सोचते है । लेकिन गांव आकर मुझे लगा कि वास्तव में गांव में ही श्रेष्ठ भारत बसता है । जहां एक दूसरे के प्रति प्रेम है, सादगी है, सहयोग की भावना है, निःस्वार्थ सेवाभाव है, इंसानियत है ।

मुझे अपने गांव आकर पता चला कि यहाँ एक दूसरे के आपसी संबंध कितने मधुर होते है । पूरा गांव अपने आप मे एक परिवार की तरह ही एक दूसरे के सुख दुख में आगे आता है । किसी भी समस्या का समाधान सारे लोग इकट्ठे होकर बहुमत से निकालते है । सच मे मुझे यहाँ आकर एक अलग ही अनुभव प्राप्त हुआ ।

अंत मे निम्न पंक्तियो से मैं कहना चाहता हु की सभी के सहयोग से कोरोना जैसी महामारी से निजात पाने के लिए भी ग्रामवासी बहुत जागरूक है । वे बखूबी सरकार के आदेशों का पालन कर रहे है ।

ले मशाले चल पड़े है, लोग मेरे गाँव के ।
अब अंधेरा जीत लेंगे, लोग मेरे गाँव के ।।

© गोविन्द उईके

Language: Hindi
Tag: लेख
2 Likes · 1 Comment · 329 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"सोच अपनी अपनी"
Dr Meenu Poonia
💐प्रेम कौतुक-474💐
💐प्रेम कौतुक-474💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
"मैं तुम्हारा रहा"
Lohit Tamta
■ आज की बात
■ आज की बात
*Author प्रणय प्रभात*
आओ जाओ मेरी बाहों में,कुछ लम्हों के लिए
आओ जाओ मेरी बाहों में,कुछ लम्हों के लिए
Ram Krishan Rastogi
असुर सम्राट भक्त प्रह्लाद – तपोभूमि की यात्रा – 06
असुर सम्राट भक्त प्रह्लाद – तपोभूमि की यात्रा – 06
Kirti Aphale
दलदल
दलदल
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
कुप्रथाएं.......एक सच
कुप्रथाएं.......एक सच
Neeraj Agarwal
Banaras
Banaras
Sahil Ahmad
* सहारा चाहिए *
* सहारा चाहिए *
surenderpal vaidya
जहाँ से आये हो
जहाँ से आये हो
Dr fauzia Naseem shad
खामोश रहेंगे अभी तो हम, कुछ नहीं बोलेंगे
खामोश रहेंगे अभी तो हम, कुछ नहीं बोलेंगे
gurudeenverma198
"मंजर"
Dr. Kishan tandon kranti
दूसरों के अनुभव से लाभ उठाना भी एक अनुभव है। इसमें सत्साहित्
दूसरों के अनुभव से लाभ उठाना भी एक अनुभव है। इसमें सत्साहित्
Dr. Pradeep Kumar Sharma
शुभ प्रभात मित्रो !
शुभ प्रभात मित्रो !
Mahesh Jain 'Jyoti'
मकसद ......!
मकसद ......!
Sangeeta Beniwal
माँ वो है जिसे
माँ वो है जिसे
shabina. Naaz
अपनी वाणी से :
अपनी वाणी से :
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
*जो कुछ तुमने दिया प्रभो, सौ-सौ आभार तुम्हारा(भक्ति-गीत)*
*जो कुछ तुमने दिया प्रभो, सौ-सौ आभार तुम्हारा(भक्ति-गीत)*
Ravi Prakash
*बारिश सी बूंदों सी है प्रेम कहानी*
*बारिश सी बूंदों सी है प्रेम कहानी*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
औरों के संग
औरों के संग
Punam Pande
ऋतुराज
ऋतुराज
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
मिट्टी के परिधान सब,
मिट्टी के परिधान सब,
sushil sarna
पत्नी की पहचान
पत्नी की पहचान
Pratibha Pandey
शिव मिल शिव बन जाता
शिव मिल शिव बन जाता
Satish Srijan
आदिपुरुष फ़िल्म
आदिपुरुष फ़िल्म
Dr Archana Gupta
उम्मीदें  लगाना  छोड़  दो...
उम्मीदें लगाना छोड़ दो...
Aarti sirsat
2463.पूर्णिका
2463.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
ਸ਼ਿਕਵੇ ਉਹ ਵੀ ਕਰਦਾ ਰਿਹਾ
ਸ਼ਿਕਵੇ ਉਹ ਵੀ ਕਰਦਾ ਰਿਹਾ
Surinder blackpen
ऊँचे जिनके कर्म हैं, ऊँची जिनकी साख।
ऊँचे जिनके कर्म हैं, ऊँची जिनकी साख।
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...