Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 May 2017 · 1 min read

ये अखबार… .

समय की अहमियत बताता ये अखबार
कैसे केवल एक दिन का मेजबान
दूसरी सुबह ही उसका काम तमाम!
सुबह होते ही आँखों की नजर में
दिन बीतते ही होता दरकिनार!
देश-विदेश,गली-मुहल्ले
हर रोज बताता सबका हाल
ये अखबार!
विज्ञापनों से पटा बलात्कारों
की खबरों से गुँथा हर रोज
अखबार!
मन सवाल करता हर रोज
सब अधूरा सा है!
बिन साहित्यिक परिशिष्ट के!
क्या एक पन्ना हर रोज देना
नहीं है सम्पादक को स्वीकार!
साहित्य छपे तो पैसे कहाँ
विज्ञापन छपे तो नोटों की
दरकार!
ऐसा हो गया है ये अखबार! फिर भी
एक प्याले चाय पर ना जाने
कितने शब्द समाहित हो जाते
मस्तिष्क में हर रोज!
घर बैठे दुनियाँ की
सैर करा देता अखबार!
सन्देश छोड़ता हम सबको!
करना है जो कुछ तुरन्त करो
वरना कल हो जाओगे मेरी तरह
तुम भी बेकार!
.
शालिनी साहू
ऊँचाहार, रायबरेली(उ0प्र0)

Language: Hindi
217 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*कबूतर (बाल कविता)*
*कबूतर (बाल कविता)*
Ravi Prakash
प्यार का रिश्ता
प्यार का रिश्ता
Surinder blackpen
बाकी है...!!
बाकी है...!!
Srishty Bansal
अकेले
अकेले
Dr.Pratibha Prakash
माँ सरस्वती
माँ सरस्वती
Mamta Rani
देश गान
देश गान
Prakash Chandra
'व्यथित मानवता'
'व्यथित मानवता'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
जमाने को खुद पे
जमाने को खुद पे
A🇨🇭maanush
देह अधूरी रूह बिन, औ सरिता बिन नीर ।
देह अधूरी रूह बिन, औ सरिता बिन नीर ।
Arvind trivedi
"उई मां"
*Author प्रणय प्रभात*
पशुओं के दूध का मनुष्य द्वारा उपयोग अत्याचार है
पशुओं के दूध का मनुष्य द्वारा उपयोग अत्याचार है
Dr MusafiR BaithA
वर्णमाला
वर्णमाला
Abhijeet kumar mandal (saifganj)
ग़ज़ल
ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
"बन्धन"
Dr. Kishan tandon kranti
शबे दर्द जाती नही।
शबे दर्द जाती नही।
Taj Mohammad
एक शख्स
एक शख्स
Pratibha Pandey
होली की हार्दिक शुभकामनाएं🎊
होली की हार्दिक शुभकामनाएं🎊
Aruna Dogra Sharma
पराये सपने!
पराये सपने!
Saransh Singh 'Priyam'
करती पुकार वसुंधरा.....
करती पुकार वसुंधरा.....
Kavita Chouhan
***
***
sushil sarna
झूठ भी कितना अजीब है,
झूठ भी कितना अजीब है,
नेताम आर सी
मीडिया पर व्यंग्य
मीडिया पर व्यंग्य
Mahender Singh
है जो बात अच्छी, वो सब ने ही मानी
है जो बात अच्छी, वो सब ने ही मानी
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बन्दिगी
बन्दिगी
Monika Verma
2477.पूर्णिका
2477.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कैसे हो हम शामिल, तुम्हारी महफ़िल में
कैसे हो हम शामिल, तुम्हारी महफ़िल में
gurudeenverma198
वक्त निकल जाने के बाद.....
वक्त निकल जाने के बाद.....
ओसमणी साहू 'ओश'
सुदूर गाँव मे बैठा कोई बुजुर्ग व्यक्ति, और उसका परिवार जो खे
सुदूर गाँव मे बैठा कोई बुजुर्ग व्यक्ति, और उसका परिवार जो खे
Shyam Pandey
तुम मेरी
तुम मेरी
Dr fauzia Naseem shad
पग न अब पीछे मुड़ेंगे...
पग न अब पीछे मुड़ेंगे...
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...