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16 Nov 2018 · 2 min read

मेरी माँ

बहुत सरल और भोली -भाली
माँ की तो हर बात निराली

पापा जो कहते कर जाती ,
अपनी बुद्धि नहीं लगाती ।
जोर से कोई बात करे तो ,
घबड़ाकर नर्वस हो जाती ।

थक भी गई तो नहीं जताती ,
मुस्कान बिखेर दर्द छुपती ।
दिनभर सारा काम करे फिर ,
लोरी गाकर मुझे सुलाती ।

करुण भाव की मूरत है वो ,
सब कहते खूबसूरत है वो ।
लक्ष्मी की अवतार मेरी माँ ,
घर में सबकी ज़रूरत है वो ।

पीड़ पराया सदा बाँटती ,
बिन गलती किये क्षमा माँगती ।
नतमस्तक वो तब भी रहती ,
जब दादी माँ , उसे डाँटती ।

हृदय से उनकी करती पूजा ,
माँ होती जैसे अर्दूजा ।
सच ही सब कहते हैं जग में ,
माँ जैसी कोई ना दूजा ।

प्रतिभा स्मृति
दरभंगा (बिहार )

रचनाकार का घोषणा पत्र-

यह मेरी स्वरचित एवं मौलिक रचना है जिसको प्रकाशित करने का कॉपीराइट मेरे पास है और मैं स्वेच्छा से इस रचना को साहित्यपीडिया की इस प्रतियोगिता में सम्मलित कर रही हूँ।
मैं साहित्यपीडिया को अपने संग्रह में इसे प्रकाशित करने का अधिकार प्रदान करती हूँ|
मैं इस प्रतियोगिता के सभी नियम एवं शर्तों से पूरी तरह सहमत हूँ। अगर मेरे द्वारा किसी नियम का उल्लंघन होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ मेरी होगी।
साहित्यपीडिया के काव्य संग्रह में अपनी इस रचना के प्रकाशन के लिए मैं साहित्यपीडिया से किसी भी तरह के मानदेय या भेंट की पुस्तक प्रति का/की अधिकारी नहीं हूँ और न ही मैं इस प्रकार का कोई दावा करुँगी|
अगर मेरे द्वारा दी गयी कोई भी सूचना ग़लत निकलती है या मेरी रचना किसी के कॉपीराइट का उल्लंघन करती है तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मेरी है; साहित्यपीडिया का इसमें कोई दायित्व नहीं होगा|
मैं समझती हूँ कि अगर मेरी रचना साहित्यपीडिया के नियमों के अनुसार नहीं हुई तो उसे इस प्रतियोगिता एवं काव्य संग्रह में शामिल नहीं किया जायेगा; रचना के प्रकाशन को लेकर साहित्यपीडिया टीम का निर्णय ही अंतिम होगा और मुझे वह निर्णय स्वीकार होगा|

प्रतिभा स्मृति
दरभंगा (बिहार )

Language: Hindi
3 Likes · 1 Comment · 442 Views
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