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1 Jan 2019 · 1 min read

784 नए साल के नए पल

मुड़ के देखा तो समय का पंछी उड़ गया था।
कैसे बीता वह समा ,जो कल तक तो नया था।।

आने वाले दिनों की, सोचें थी, मन में तब कितनी।
कैसे बीता वो समा ,जो पहले आया भी ना था।।

यूँ हीं चलते चलते राहें बन गई।
यूं ही जीते जीते यादें बन गई।।

यह सामां जो बीता खट्टे मीठे अनुभवों से।
अच्छी बुरी यादों का ,किस्सा बन गया।।

दुआ है अब तो आए दिन खुशी के और बहार के।
हर किसी का समां बीते खुशियों से नए साल में।।

सोचे हम बस नये पलों के बारे में अब।
क्यों सोचे जो समा पंछी बन उड़ गया।।

6.33pm 31 Dec 2018 Monday

Language: Hindi
2 Likes · 1 Comment · 220 Views
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