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18 Jun 2021 · 1 min read

अतीत का साया

मैं जब भी अकेली होती हूं,
अपने ही ख्यालों में होती हूं।

ऐसे में वो चुपके से आता है,
ख्यालों में खलल डालता है ।

जो छोड़ आई बहुत पीछे मैं,
वह तराना याद दिलाता है।

वो सपने याद दिलाता है,
वो चाहते याद दिलाता है ।

कुछ कसमें याद दिलाता है ,
कुछ वायदे याद दिलाता है ।

वो पल जिसने मुझे रुलाया ,
वो पल जिसमे मुझे हंसाया ।

वो पिता का जिनका साथ छूटा ,
उनका स्नेह बहुत याद दिलाता है।

फूल और कांटे जिससे जो मिले,
दोस्त और दुश्मन याद दिलाता है।

उसे में अपना स्वर्ण युग कहूं या ,
दुर्भाग्य पूर्ण समझ नहीं आता है।

वर्तमान से असंतुष्ट होती हूं कभी ,
तो अतीत अपनी याद दिलाता है ।

मगर जब अतीत में खोती हूं तो ,
कोई जख्म उसका याद दिलाता है ।

कुछ गलतियां , कुछ नाफरमानियां,
कुछ जिद ,कुछ भूलें याद दिलाता है।

अतीत के साए मुझे जब जब घेरते है,
तब तब असंख्य दर्द उमड़ आता है ।

क्या कहूं मैं मुझे मेरा अतीत रह रह,
कर अपनी बहुत याद दिलाता है ।

कैसे दामन छुडायूं मैं इसके सायों से,
इसका मेरी जिंदगी से गहरा नाता है ।

Language: Hindi
3 Likes · 8 Comments · 600 Views
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