Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Apr 2018 · 2 min read

अंग्रेजी का जब से ये दौर चला

जब से अंॻेजी का दौर चला,कहने सुनने वालो का होता भला,न कह सकने वालों का हो गया बुरा,परदेश से आया और यहीं का हो चला,
भारत कि माटी में यह पला बढा,
हर गली कूचे में घुमा व खेला,
पर हमें ही अपनी जुबाँ से कर दुर चला,
आज हर राज्य में पढी लिखी,व बोली जाती है यह,
थी राज भाषा जो हम सबकी अपनी,
उसे ही बेगानी बना गयी है यह,
हिन्दी से करते हैं कुछ यों परहेज,
थोपी जा रही है हम पर,हमें स्वीकार नही,
अंग्रेजी कि है यह निराली कला,
अंग्रेजी का जब से ये दौर चला।
बढप्पन का मानक है आज अंॻेजी,
रोजगार की कुंजी भी है आज अंग्रेजी,
समाज मे सम्मान पाने का पैमाना है अंग्रेजी,
जो न पढ पाये हैं इसको,उनकी समस्या है अंग्रेजी,
पढ और गुन गये है जो इसको,,
उनकी भाग्यविधाता बन बैठी है अग्रेजी,
अंग्रेजी बन गई हैअब अभेद्य किला,
अंग्रेजी का जब से दौर चला ।
समारोहों में,सानो शौकत दिलाती है अंग्रेजी,
हिन्दी दिवस पर भी बोली जाती है अंग्रेजी,
जो होते हैं आमंत्रित कहने को हिन्दी,
उनकी जुबाँ पर बरबस अा जाती है अंग्रेजी,
अभिब्यक्ति कि हो चली है आसान कला,
अंग्रेजी का जब से यह दौर चला,
हैं भ्रम पाले मुझ जैसे अनेकों इंन्सान,
मानते हैं जो हिन्दी को अपनी जुबान,
कर गये जो हिन्दी के लिये अपनी जाँ कुर्बान,
तब जाकर रख पाये वह इसका मान,
प्रचारित करते रहे हिन्दी का ज्ञान,
वह दिनकर,जयशंकर और मैथली की थी माला,
सर्वेश्वर,शाही,महादेवी और निराला,
इन्होने हिन्दी को अपनी जान से ज्यादा है पाला,
उम्मीद पर इसकी कि कभी तो छटेगा ,अन्धेरा,
और आयेगा उजाला।

Language: Hindi
447 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Jaikrishan Uniyal
View all
You may also like:
गनर यज्ञ (हास्य-व्यंग्य)
गनर यज्ञ (हास्य-व्यंग्य)
दुष्यन्त 'बाबा'
हिचकियां
हिचकियां
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
कि दे दो हमें मोदी जी
कि दे दो हमें मोदी जी
Jatashankar Prajapati
जो खत हीर को रांझा जैसे न होंगे।
जो खत हीर को रांझा जैसे न होंगे।
सत्य कुमार प्रेमी
एक गुलाब हो
एक गुलाब हो
हिमांशु Kulshrestha
*कुछ रखा यद्यपि नहीं संसार में (हिंदी गजल)*
*कुछ रखा यद्यपि नहीं संसार में (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
चंदा मामा से मिलने गए ,
चंदा मामा से मिलने गए ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
चाहे जितना तू कर निहां मुझको
चाहे जितना तू कर निहां मुझको
Anis Shah
बीड़ी की बास
बीड़ी की बास
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन
bhandari lokesh
*नारी के सोलह श्रृंगार*
*नारी के सोलह श्रृंगार*
Dr. Vaishali Verma
आपसी समझ
आपसी समझ
Dr. Pradeep Kumar Sharma
“सबसे प्यारी मेरी कविता”
“सबसे प्यारी मेरी कविता”
DrLakshman Jha Parimal
Honesty ki very crucial step
Honesty ki very crucial step
Sakshi Tripathi
जैसे
जैसे
Dr.Rashmi Mishra
झूम रही है मंजरी , देखो अमुआ डाल ।
झूम रही है मंजरी , देखो अमुआ डाल ।
Rita Singh
Wishing you a Diwali filled with love, laughter, and the swe
Wishing you a Diwali filled with love, laughter, and the swe
Lohit Tamta
तुमको कुछ दे नहीं सकूँगी
तुमको कुछ दे नहीं सकूँगी
Shweta Soni
रहस्य
रहस्य
Shyam Sundar Subramanian
जी चाहता है रूठ जाऊँ मैं खुद से..
जी चाहता है रूठ जाऊँ मैं खुद से..
शोभा कुमारी
23/03.छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
23/03.छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
शाश्वत प्रेम
शाश्वत प्रेम
Bodhisatva kastooriya
क्या विरासत में हिस्सा मिलता है
क्या विरासत में हिस्सा मिलता है
Dr fauzia Naseem shad
■ विनम्र आग्रह...
■ विनम्र आग्रह...
*Author प्रणय प्रभात*
यह सुहाना सफर अभी जारी रख
यह सुहाना सफर अभी जारी रख
Anil Mishra Prahari
"ऐसा करें कुछ"
Dr. Kishan tandon kranti
संस्कार और अहंकार में बस इतना फर्क है कि एक झुक जाता है दूसर
संस्कार और अहंकार में बस इतना फर्क है कि एक झुक जाता है दूसर
Rj Anand Prajapati
में स्वयं
में स्वयं
PRATIK JANGID
दूब घास गणपति
दूब घास गणपति
Neelam Sharma
हिंदी दिवस पर एक आलेख
हिंदी दिवस पर एक आलेख
कवि रमेशराज
Loading...