Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Jul 2019 · 1 min read

“अँखियाँ भेद कहे हैं ” !!

सेवा से संतोष मिले हैं ,
अँखियाँ भेद कहे है !!
बैठ झरोखे आज उमरिया ,
जल का पात्र गहे है !!

जीवन भर श्रम की गठरी ने ,
साथ नहीं है छोड़ा !
अपने कभी लगे अपने तो ,
कभी लगे मुंह मोड़ा !
कभी नयन से खुशी झलकती ,
नयना कभी बहे हैं !!

लोग हँसे हैं जर्जर काया ,
शीतल छाँह कहाँ है !
हमने तो इतना जाना है ,
चल दें , राह जहाँ है !
कभी समय ने थपकी दी है ,
उसमें मस्त रहे हैं !!

सुबह शाम की किचकिच से तो ,
अपना काज निराला !
सेवा संग है , रटन नाम की ,
नहीं हाथ है माला !
पल पल को हम रहे सहेजे ,
कुछ ना और चहे हैं !!

देह से जितना सध जाये है ,
उतना ही दम साधें !
देख रहे हैं झाँक झाँक छवि ,
मोहन राधे राधे !
मुस्कानें अब बनी संगिनी ,
चाहे सपन ढहे हैं !!

स्वरचित / रचियता :
बृज व्यास
शाजापुर ( मध्यप्रदेश )

Language: Hindi
Tag: गीत
2 Likes · 233 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कहो कैसे वहाँ हो तुम
कहो कैसे वहाँ हो तुम
gurudeenverma198
कैसे अम्बर तक जाओगे
कैसे अम्बर तक जाओगे
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
Harmony's Messenger: Sauhard Shiromani Sant Shri Saurabh
Harmony's Messenger: Sauhard Shiromani Sant Shri Saurabh
World News
बिन बोले ही  प्यार में,
बिन बोले ही प्यार में,
sushil sarna
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
प्रीत
प्रीत
Mahesh Tiwari 'Ayan'
सज्जन से नादान भी, मिलकर बने महान।
सज्जन से नादान भी, मिलकर बने महान।
आर.एस. 'प्रीतम'
विषय - पर्यावरण
विषय - पर्यावरण
Neeraj Agarwal
पानी से पानी पर लिखना
पानी से पानी पर लिखना
Ramswaroop Dinkar
😊#लघु_व्यंग्य
😊#लघु_व्यंग्य
*Author प्रणय प्रभात*
मर्यादा और राम
मर्यादा और राम
Dr Parveen Thakur
धोखा था ये आंख का
धोखा था ये आंख का
RAMESH SHARMA
एतमाद नहीं करते
एतमाद नहीं करते
Dr fauzia Naseem shad
Red is red
Red is red
Dr. Vaishali Verma
रुके ज़माना अगर यहां तो सच छुपना होगा।
रुके ज़माना अगर यहां तो सच छुपना होगा।
Phool gufran
शिक्षा मनुष्य के विकास की परवाह करता है,
शिक्षा मनुष्य के विकास की परवाह करता है,
Buddha Prakash
*चिकने-चुपड़े लिए मुखौटे, छल करने को आते हैं (हिंदी गजल)*
*चिकने-चुपड़े लिए मुखौटे, छल करने को आते हैं (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
धूप निकले तो मुसाफिर को छांव की जरूरत होती है
धूप निकले तो मुसाफिर को छांव की जरूरत होती है
कवि दीपक बवेजा
हिंदी शायरी का एंग्री यंग मैन
हिंदी शायरी का एंग्री यंग मैन
Shekhar Chandra Mitra
3160.*पूर्णिका*
3160.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
वक्त हालत कुछ भी ठीक नहीं है अभी।
वक्त हालत कुछ भी ठीक नहीं है अभी।
Manoj Mahato
आस्था होने लगी अंधी है
आस्था होने लगी अंधी है
पूर्वार्थ
स्वीकारोक्ति :एक राजपूत की:
स्वीकारोक्ति :एक राजपूत की:
AJAY AMITABH SUMAN
जनता के हिस्से सिर्फ हलाहल
जनता के हिस्से सिर्फ हलाहल
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
किताबें
किताबें
Dr. Pradeep Kumar Sharma
" भाषा क जटिलता "
DrLakshman Jha Parimal
"वो"
Dr. Kishan tandon kranti
छुपा है सदियों का दर्द दिल के अंदर कैसा
छुपा है सदियों का दर्द दिल के अंदर कैसा
VINOD CHAUHAN
* ऋतुराज *
* ऋतुराज *
surenderpal vaidya
दलित साहित्य / ओमप्रकाश वाल्मीकि और प्रह्लाद चंद्र दास की कहानी के दलित नायकों का तुलनात्मक अध्ययन // आनंद प्रवीण//Anandpravin
दलित साहित्य / ओमप्रकाश वाल्मीकि और प्रह्लाद चंद्र दास की कहानी के दलित नायकों का तुलनात्मक अध्ययन // आनंद प्रवीण//Anandpravin
आनंद प्रवीण
Loading...