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?किसानो की लाश देख व्यथित मन से निकले सब्द,,,,?

मानक लाल*मनु*

मानक लाल*मनु*

कविता

June 7, 2017

??किसानो की लाश देख व्यथित मनु के मन से निकले सब्द,,,,??

ये भारत मप्र के इतिहास का काला दिन हो जायेगा,,,,
किसान की मौत और किसान सदा याद आयेगा,,,,

वीर किसान ने गोली पीठ पर नही सीने पर खाई है,,,
जय किसान जय जवान की बात आज निभाई है,,,,
जुल्म सितम का वक़्त पर करारा जबाब दिया जायेगा,,,,

कर्मठता की पहचान किसान है,,,,
देश की आनबान किसान है,,,,
चंद नोटो की गड्डियों से दर्द वो न भुलाया जायेगा,,,,

मरते कृषक मिटते खेत,,,,
फसलों के नित घटते रेट,,,,
कैसे अन्नदाता मुसुकुरायेगा,,,,,

बड़ा व्यथित और उद्देलित है मन मेरा,,,,
कैसे आज पड़ा है पालनकर्ता मेरा,,,,
मनु ये बलिदान व्यर्थ नही जायेगा,,,,,
मानक लाल मनु,,,,

Author
मानक लाल*मनु*
सम्प्रति••सहायक अध्यापक2003,,, शिक्षा••MA,हिंदी,राजनीति,,, जन्मतिथि 15मार्च1983 पता••9993903313 साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,
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