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??दुख की माँ सिर धुनेगी??

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

October 1, 2017

सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद
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1..कुंडलिया
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हँस फूलों की तरह तू,खिल चाँद-सा भैया।
पार हो जाएगी रे, भव-सागर से नैया।।
भव-सागर से नैया,ज़िन्दगी सीख बनेगी।
प्रेरणा जग लेगा,दुख की माँ सिर धुनेगी।
सुन प्रीतम की बात,ज़िन्दगी में आए रस।
हरपल गुज़ारे गर,मीत मेरे तू हँस-हँस।
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2..कुंडलिया
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चमन हँसा मन बसा प्रिय,ज्यों तेरा रूप रे।
चेहरा गुलाब का गुल,तन चिलकत धूप रे।।
तन चिलकत धूप रे,सीरत ग़ज़ब की पाई।
एक नज़र मन हरे,सूरत लिए तरुणाई।
सुन प्रीतम की बात,तेरा संग है मधुबन।
बातें रसीली प्रिय,दीदार महकता चमन।
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3..कुंडलिया
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कल किसी के हाथ नहीं,बड़े बोल न बोलो।
सबका आदर करो तुम,अहं सहित न डोलो।।
अहं सहित न डोलो,काल की मार कड़ी है।
सामने कौन टिके,यह करे खाट खड़ी है।
सुन प्रीतम की बात,काल में है असीम बल।
आज की ख़बर रखो,छोड़ो तुम काल पर कल।
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4..कुंडलिया
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हर आदमी फ़नकारी,चोर डाकू जुआर।
गिरगिट-सा बदलता है,हँसता है मतिमार।।
हँसता है मतिमार,विश्वास किसपर करिए।
भाई-भाई शत्रु,कैसे प्यार में तरिए।
सुन प्रीतम की बात,फ़ौलादी करिए ज़िग़र।
हर स्थिति बस में रहे,हृदय में बस जाए हर।
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5..कुंडलिया
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दशहरा यूँ मनाइए,मन का रावण ढ़ले।
प्रेम के हवन-यज्ञ में,बुराई पूर्ण जले।।
बुराई पूर्ण जले,पावन हृदय हो जाए।
गले मिल आपस में,भ्रष्ट फ़रेब खो जाए।
सुन प्रीतम की बात,मानव हो जाए खरा।
सच में तब मनेगा,बंधु त्योहार दशहरा।
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6..कुंडलिया
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रिस्ता सबसे यूँ बना,ज्यों सूरज-रोशनी।
सभी के मन भाये है,ज्यों रागो-रागनी।।
ज्यों रागो-रागनी,सुन मिले आनंद घना।
चोली-दामन साथ,रहे मिसाल सदा बना।
सुन प्रीतम की बात,अहं काल तले पिस्ता।
तज जीवन से इसे,प्रेम का साधो रिस्ता।
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7..कुंडलिया
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मानव न कर्म बोलते,गुल बू से लुभाते।
जिंदगी आनी-जानी,वच अमर हो जाते।।
वच अमर हो जाते,दंभी नहीं मिसाल बन।
जग के अक्ष पर रे,भानु-सा बनके जा तन।
सुन प्रीतम की बात,सद् विचार रहते हैं नव।
मरता यहाँ शरीर,मरता नहीं है मानव।
********राधेयश्याम बंगालिया
प्रीतम कृत*********************

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