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--छप्पय छंद--

विधा- छप्पय छंद…प्रीतम कृत
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होठों पर मुस्कान,दिल में लेकर अरमान।
मंजिल मिलेगी रे,चलोगे यार तुम ठान।
हौंसलों की सदैव,होती है जीत सुनिए।
जिसने चाहा मिला,उसको है मीत सुनिए।
कोशिशें नाकाम न होती,सकारात्मक रहिए जी।
एकताल जीवन की बना,विचारात्मक बहिए जी।
************राधेयश्याम बंगालिया
************प्रीतम******कृत
परिभाषा
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रोला+उल्लाला=छप्पय छंद
छप्पय छंद में कुंडलिया छंद की तरह छह चरण होते हैं,
प्रथम चार चरण रोला छंद के जिसके प्रत्येक चरण में 24-24 मात्राएँ होती हैं,यति 11-13 पर होती है।
आखिर के दो चरण उल्लाला छंद के होते हैं,जिसके प्रत्येक चरण में 28-28 मात्राएँ होते हैं और यति 15-13 पर होती है।
छप्पय एक अर्द्ध सममात्रिक छंद है…जो अतिसुंदर है
राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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