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??? हाय रे गर्मी???

Santosh Barmaiya

Santosh Barmaiya

हाइकु

April 23, 2017

तपता सूर्य।
चिलचिलाती धूप।
ऊफ, ये गर्मी।।1।।

भीषण आग।
झुलसता बदन।
हाय रे गर्मी।।2।।

सहमे तरु।
पथ तपती रेत।
जाय न गर्मी।।3।।

सरि निस्तेज।
बयार बहे तेज।
छाय है गर्मी।।4।।

जले यौवन।
पिघले हिम कण।
भाय न गर्मी।।5।।

संतोष बरमैया”जय”

Author
Santosh Barmaiya
मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया, ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, डी.ऐड,। पद- अध्यापक । साझा काव्य संग्रह - 1.गुलजार ,2.मधुबन, 3.साहित्य उदय,( प्रकाशाधीन ), पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे साहित्य-नवभारत... Read more
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