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???? अधूरी बातें ????

Santosh Barmaiya

Santosh Barmaiya

गज़ल/गीतिका

June 17, 2017

*********** अधूरी बातें ***********

मेरी आँखों के सामने वो हर दिन सजती रही।
मेरी अधूरी बातें दिल को हर दिन डसती रही।।

लगुन से बड़ी हल्दी तक दरोज उसे हल्दी लगी,
उसकी हल्दी से तन पे मेरे आग लगती रही ।।

यूँ ही दिल में लगा के आग तप रोज काला हुआ,
नहाके रूप की ज्वाला वह हर दिन निखरती रही।।

अनकही बातों को लेकर रात दिन तड़पता रहा।
चेहरे पे उसके चमक हल्दी की दमकती रही।।

आज सोलह-श्रृंगार हो रहा अठरह की उम्र में।
तोड़ गई ना समझ दिल मिरा खग सी चहकती रही।।

मैं खून ले हथेली पर मण्डप उसके खड़ा रहा।
पर सामने कुमकुम से मांग उसकी भरती रही।।

क्यूँ आजतक अधूरी बातें पूरी न कहा तुमने,
भरके आँखों में आँसू दो बिदाई कहती रही।।

संतोष बरमैया “जय”

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Author
Santosh Barmaiya
मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया, ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, डी.ऐड,। पद- अध्यापक । साझा काव्य संग्रह - 1.गुलजार ,2.मधुबन, 3.साहित्य उदय,( प्रकाशाधीन ), पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे साहित्य-नवभारत... Read more

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