??आखिरी चाहत गजल??

जीने की मेरी औ आखिरी चाहत गजल।
जान भी निकले यहाँ, बस लिखते वक्त गजल।।

लेकर जा रहे हो, मुझको जब अंतिम सफर।
यात्रा में गाते हो सब मिले जन्नत गजल।

दफन करते वक्त पंच-मिट्टी हो हाथ सबके।
एक मतला एक मकता और बक्शे इज्जत गजल।।

चालीसवाँ मनाए जब होने साफ पाक।
एक एक शेर कह परोसे सभी दावत गजल।।

खुदा से कभी मांगो जब मेरे लिए “जय”।
खुदा के दर पे सजदा और इबादत गजल।।

संतोष बरमैया “जय”
कुरई, सिवनी, म.प्र.

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