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??? ????वो बूढ़ा है पर अब लाचार नहीं होगा

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? गजल ⭐
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वो बूढ़ा है पर अब लाचार नहीं होगा ।
कहता था बच्चों पर वो भार नहीं होगा ।
जिनको कन्धों पर लेकर नांचा हूँ अब तक ।
उन पर मेरा कोई अधिकार नहीं होगा ।
परिवार वही लेकिन वो बात नहीं होगी।
अब राम लखन जैसा अवतार नहीं होगा ।
जो जुल्फ झटककर उसने आज हमे देखा ।
कैसे कह दूँ अब मैं की प्यार नहीं होगा ।
जब हार चुके हों दिल मिलने की तमन्ना हो ।
स्वीकार मेरा तुमको क्यों हार नहीं होगा ।
चुपचाप हमें मिलने जब रात को आएगी ।
पायल से तेरी कैसे झंकार नहीं होगा ।
हम हाथ मिलाते हैं तुम घात लगाते हो ।
तुझ जैसा जमाने में गद्दार नहीं होगा ।
तू लाख करे कोशिश अब पाक मिटाने की ।
हस्ती जो मिटाये वो हथियार नहीं होगा ।
सर बाँध कफ़न निकले हम आज चढ़ाई पर ।
लाहौर तलक तेरा अधिकार नहीं होगा ।
हम शीश कटा देंगे कुर्बान हों सीमा पर ।
ए वीर कभी भी माँ लाचार नहीं होगा ।
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वीर पटेल

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Kavi DrPatel
Kavi DrPatel
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मैं कवि डॉ. वीर पटेल नगर पंचायत ऊगू जनपद उन्नाव (उ.प्र.) स्वतन्त्र लेखन हिंदी कविता...
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