Skip to content

?नारी जगत को समर्पित अल्फाज?

मानक लाल*मनु*

मानक लाल*मनु*

कविता

March 8, 2017

?नारी जगत को समर्पित अल्फाज?
दुनिया में मेरे आने का एक तुम ही बस जरिया हो नारी।।
माँ बनके आँचल दूध पिलाया तुम ही वो दरिया हो नारी।1।
लालन पालन न होता तो घुट घुट कर के मर जाता मैं,
ये अमृत पान किया तुम से बिन इसके न बढ़ पाता मैं,
घनी धूप से इस जीवन मै शीतल तुम ही वो बदरिया हो नारी।2।
संग खेला जिसके खेल कई,
जब देखा तब तुम लगी नई,
धागे में जिसके जीवन बंधा तुम ही वो बहनिया हो नारी।3।
गुड्डा गुड्डी का विवाह रचाया,
संग घर के कोने मै खाना खाया,
मेरी बचपन की साथी तुम ही वो सहलिया हो नारी।4।
कुछ कसमो कुछ रशमो के संग,
एक नया रूप और एक नया रंग,
मेरे जीवन में आई तुम ही वो पुतरिया हो नारी।5।
गोदी में आई बेटी बन,
खुशियों से भर दीना जीवन,
नन्हे कदमों में जिसके पारश तुम ही वो पथरिया हो नारी।6।
कितना मनु तेरा बखान करे
किन शब्दों में तेरा गान करे,
ये तन मन तुम्हे समर्पित है तुम ही वो डगरिया हो नारी।7।
✍�(मानक लाल मनु)✍

Share this:
Author
मानक लाल*मनु*
सम्प्रति••सहायक अध्यापक2003,,, शिक्षा••MA,हिंदी,राजनीति,,, जन्मतिथि 15मार्च1983 पता••9993903313 साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you