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?? गुरु ग्यान का भंडार है

रागिनी गर्ग

रागिनी गर्ग

कविता

January 5, 2017

प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने वाला होता है गुरु,
तब से साथ देता है,
जब से होती है ज़िंदगी शुरू |
मोमबत्ती की तरह जलकर,
प्रकाशित करता है पथ शिष्य का।
मिटा देता है अंधकार अग्यान का,
जलाकर प्रकाश ग्यान का||
वर्तमान गुरु शिष्य संबंध हैं बहुत ही खराब,
आज का शिष्य गुरु की नहीं करता इज्जत ,
देता है जबाव|
धूमिल होती जा रही है अच्छे गुरूओं की छवि|
इसके लिए कुछ गुरु स्वयं ही हैं जिम्मेदार |
इन्होंने शिक्षा को बना दिया है व्यापार||
स्कूल में दिखावा है, ट्यूशन को बढ़ावा है|
जो आज शिष्य हैं ,
वही कल भविष्य बन आगे आएंगे |
जो आज सीखेंगे, वही भविष्य को सिखाएँगे|
अगर वर्तमान गुरु शिष्य का संबंध है सुधारना,
तो दोनों ओर से करना होगा प्रयास |
शिष्य को गुरू का करना होगा मान ,
गुरु को छोड़ना होगा पढ़ाई का व्यापार ,
निस्वार्थ भाव से देंगे शिक्षा,
तभी होगा अच्छा भविष्य तैयार |
कोई शक नहीं गुरू ग्यान का अथाह है भंडार|
जीवन में अगर अच्छा ,
गुरु नहीं तो ज़िंदगी है बेकार ||
अगर राधाकृष्णन जैसे होंगे गुरु,
तो जगेगा ग्यान का अलख|
हजारों शिक्षक रूपी मोमबत्ती से ,
प्रकाशमान होगा संसार |
क्योंकि गुरु शिष्य का अटूट नाता है,
गुरु ही शिष्य को सिखाता है,
गुरु की महानता है यह तो ,
कि वो गोविंद को बड़ा बताता है||
-रागिनी गर्ग

Author
रागिनी गर्ग
मैं रागिनी गर्ग न कोई कवि हूँ न कोई लेखिका एक हाउस वाइफ हूँ| लिखने में मेरी रुचि है| मेरी कोई रचना किसी भी साहित्य में प्रकाशित नहीं है| फेसबुक की पोस्ट पर कमेंट करती रहती थी| लोगों को पसंद... Read more
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