Nov 2, 2017 · कविता
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? शेरो का काम है?

*शेरो का काम है*

मेरे इस देश में गीदड़ों का कोई काम नही है,,
मुझे तो बस मेरे शेरो से ही काम बाकी किसी से काम नही है,,

गीदडो की आवाज न कान सुहाती है,,
मुझे तो बस सिंह की गर्जना ही भाती है,

गिदड़ो का तो कोई ठिकाना है न राज,,,
बब्बर शेर तो करते पूरे जंगल पर राज,,,

भारत के हर घर मे हम शेर देख आये,,,
विरल ही मिलते है कही जगह ये गीदड़ नजर आये,,,

सोनु जैन मंदसौर,,,

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Sonu Jain
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Govt, mp में सहायक अध्यापिका के पद पर है,, कविता,लेखन,पाठ, और रचनात्मक कार्यो में रुचि,,,... View full profile
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