Skip to content

== मां सरस्वती तेरी जय==

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

October 5, 2017


तू ही स्वर की दाता है,
तू ही वर्णों की ज्ञाता।
तू ही है मां बुद्धि विधाता,
तू वाणी की अधिष्ठात्री।
तू ही भोर तू ही रात्रि,
तेरे आगे नवाते शीष।
हे वीणा वादिनी मां,
दे दे हमें अपना आशीष।

—रंजना माथुर दिनांक 05/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Share this:
Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
Recommended for you