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🎶 हृदय की वीणा के सुर 🎶

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

मुक्तक

October 3, 2017

न मुझमें कुछ मेरा प्रियतम,
न तुझमें कुछ तेरा।

दो श्वासें एकसार हो गईं,
वीणा ने सुर साथ बिखेरा।

विवाह की पावन वेदी पर,
थामा था तुमने हाथ मेरा।

आओ साथ करें अभिवादन,
सम्मुख है इक नया सवेरा।

– – – रंजना माथुर दिनांक 13 /12 /2016
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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