.
Skip to content

????गुल ए गुलज़ार कर????

Abhishek Parashar

Abhishek Parashar

कविता

July 25, 2017

आती रहे तेरी याद कुछ ऐसे क़रार कर,
करता हूँ इन्तजार अब न बेक़रार कर।।
आती रहे………………
इतने दिनों से तेरी रहमत पर जी रहा हूँ,
इतने दिनों से अश्कों को घुट-2 के पी रहा हूँ।
बहुत हो गया अब, गुल-ए-गुलज़ार कर।।
आती रहे तेरी याद …………………..
सब्र इस तिफ़्ल का टूटा जा रहा है,
वक्त, बे-वक्त बनकर मुझको सता रहा है।
इतना तो बुरा नहीं हूँ, अब न तार तार कर।।
आती रहे तेरी याद …………………….
कुछ ऐसी करामात कर दे ”अभिषेक” के लिए,
जीता ही रहूँ बस तेरे दीदार के लिए।।
ऐसा इस गुलाम के लिए, रूख़ अख़्तियार कर।
आती रहे तेरी याद ……………………..

##अभिषेक पाराशर (9411931822)##

Author
Abhishek Parashar
शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।... Read more
Recommended Posts
तेरी याद सदा आती है
तेरी याद सदा आती है.... मुझको तू हरदम भाती है... रहता हूँ शांत भरोसों से ..... पर विकट व्यथित हूँ झरोखों से... है बहुत अधीर... Read more
तु भी माँ मैं भी माँ
माँ तेरी याद आती है जब बेटी को गुड़िया कह कर पुकारती हूँ तो तेरे मुहँ से अपने लिए मुनिया माँ। माँ तेरी याद आती... Read more
मुक्तक
होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी... Read more
ज़माने तेरी मिह्रबानी नहीं हूँ
शजर हूँ, तिही इत्रदानी नहीं हूँ चमन का हूँ गुल मर्तबानी नहीं हूँ ख़रा हूँ कभी भी मुझे आज़मा लो उतर जाने वाला मैं पानी... Read more