Jun 14, 2016 · मुक्तक
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.? बसंती ओढ़कर चूनर , धरा ससुराल जाती है “

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गगन के संग मगन देखो, बड़ी खुशहाल जाती है ।

विविध रंगों के सुमनों से , सजाये बाल जाती है ।

धरा साड़ी हरित पहने , किये श्रृंगार सोलह सब,

बसंती ओढ़कर चूनर , सजी ससुराल जाती है ।

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वीर पटेल

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Kavi DrPatel
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मैं कवि डॉ. वीर पटेल नगर पंचायत ऊगू जनपद उन्नाव (उ.प्र.) स्वतन्त्र लेखन हिंदी कविता... View full profile
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