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??अवधूत बना बैठा यह मन ??

Abhishek Parashar

Abhishek Parashar

कविता

July 12, 2017

अवधूत बना बैठा यह मन,
करता नहीं चिन्तन विमल -विमल
निर्लज्ज वेश धारण करके,
करता यह कैसी उथल पुथल ।।1।।
ठगता यह मानव मन को,
करके यह उसकी बुद्धि भ्रमित,
मधुप चुनें ज्यों कुसुम मार्ग,
पर यह चुनता नीच मार्ग ।।2।।
करता यह पतन मानव मन का,
मिल जाए यदि कुसंग मार्ग,
उत्पन्न करें यह सहस्त्र हाथ,
जब मिले रसना का साथ।।3।।
लिए विशालता उदधि जैसी,
पर दर्शाता यह नीच भाव,
माखी जैसा करता व्यवहार,
कभी बैठे मल, कभी बैठे फल।।4।।
‘इन्द्रियाणाम् मनश्चामि’
मिला ऋषिकेश का वरदान,
पर दौड़े क्यों यह इधर उधर,
चुनता नहीं यह ईश मार्ग।।5।।
चंचल है मन, कृष्ण बड़ा,
करते यह अर्जुन करुण पुकार,
कृष्ण कहा, चुनो योग मार्ग,
वैराग्य शस्त्र से करो वार।।6।।
##अभिषेक पाराशर(9411931822)##

Author
Abhishek Parashar
शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।... Read more
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