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?सब कर सकती है माँ? मनु,,,,

मानक लाल*मनु*

मानक लाल*मनु*

कविता

May 14, 2017

?सब कर सकती है माँ?

एक नन्ही सी जिंदगी को बड़े आदमी में बदल सकती है माँ,,,,
एक कदम हम नही चल पाए मगर हजारो कदम चल सकती है माँ,,,,

बापू का रूप वो,भाई का स्वरूप वो,
बहिन का दुलार बन सकती है माँ,,,,

खुद दुख संकटो से लड़ भिड जाती है वो,
संघर्ष में किरपाल ढाल बन सकती है माँ,,,,

माँ की ममता कोई मोल नही सिक्को में,
दुआ में सारी दुनिया तौल सकती है माँ,,,,

माँ के एहसानों को कोई पूत क्या चुकाएगा,
दहाड़ से दुनिया को डोल सकती है माँ,,,,

दस सन्तानो जीवन सरल बना देगी वो,
सेवा करो तो जन्नतदर खोल सकती है माँ,,,,

मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा,चर्च दूर है न जाओ,
गीता,कुरान,बाइबिल,ग्रन्थ जानती है माँ,,,,

मनु तू क्या माँ पे कलम चलायेगा रे,
स्याही के हर रंग को घोल सकती है माँ,,,,

मानक लाल मनु,,,,
सरस्वती साहित्य परिषद,,,,

Author
मानक लाल*मनु*
सम्प्रति••सहायक अध्यापक2003,,, शिक्षा••MA,हिंदी,राजनीति,,, जन्मतिथि 15मार्च1983 पता••9993903313 साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,
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