कविता · Reading time: 1 minute

?कविता?दुनियां बस एक तमाशा है ।

कविता । जीवन तो जिज्ञासा है ।

यह जीवन तो जिज्ञासा है ।
दुनियां बस एक तमाशा है ।
निज कर्मो की लगा बाजिया ,हम रहते है राम भरोसे ।

रिस्तों की सब नाव बनाते ।
कष्टों के तूफ़ान ढहाते ।
जीवन सागर, दुःख की थाली, ले आकरके रोज परोसे ।

जल असंख्य तारों से मन मे ।
इस जीवन रूपी उपवन मे ।
पुनः एक दिन बुझ जाते है, आशाओं के दीप झरोखें ।

बना स्वार्थी ताना बाना ।
सच्चाई को भूल न जाना ।
सतपथ की सुखमय छाया मे , दर्द नही दे पाते धोखे ।

सुख दुख के वह महल बनाता ।
कोशिश मे जीवन ढह जाता ।
प्रतिफल पाता निज कर्मो का , चाहे जितना विधि को कोसे ।

राम केश मिश्र

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