Feb 17, 2019 · कविता
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【16】 भाग – दौड़ भरी दुनियाँ

इस भाग – दौड़ भरी दुनियाँ में, अब मैं भी भाग रहा हूँ
सोना तो मुझको खुलकर था, लेकिन अब जाग रहा हूँ
इस भाग- दौड़ ………..
{1} जीवन है अन्धकार मेरा, न प्रकाश की एक किरण है
लाखों हैं किरण के घर लेकिन, उनमें न कोई मेरा घर है
कहीं मुझसे जीत न जाये अन्धेरा, इसका मुझको डर है
इस डर को मिटाने के खातिर ही, मैं सुख त्याग रहा हूँ
इस भाग – दौड़ …………
{2} हर पल और हर एक डगर में, मुझको नई चुनौती आती
सुख से भरे संसार में मेरे, आके आग लगाती
जब तक न करूं कठिन परिश्रम, दूर न वो हो पाती
कठिन डगर पर मैं निश्चय से, कदम बढा रहा हूँ
इस भाग – दौड़ …………
{3} आँधी आयें तूफां आयें, मुझे रास्त नहीं बदलना है
कांटों से भरी है राह मेरी, मुझे खुश हो उस पर चलना है
जहाँ लडखडायेंगे कदम मेरे, मुझे वहाँ संभल कर चलना है
बहुत दूर मंजिल मेरी, मैं दूरियाँ मिटा रहा हूँ
इस भाग – दौड़ …………
{4} बिन मेहनत के कब मिलता, खुशहाली का संसार यहाँ
जो माली हाथ बांध बैठा, उजड़ा गुलशन बगिया वहाँ
जो कठिन परिश्रम करता गया, उसने पाया खुशहाल जहाँ
खुशियों से भरे पल पाने को, मैं आलस त्याग रहा हूँ
इस भाग – दौड़ …………
सीखः- भागदौड़ भरे दौर में हमें अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित करना चाहिए।
Arise DGRJ { Khaimsingh Saini }
M.A, B.Ed from University of Rajasthan
Mob. 9266034599

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Khaimsingh Saini
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