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★सरस्वती वंदना★

Sonu Jain

Sonu Jain

कविता

December 6, 2017

*सरस्वती वंदना*

हे मात सरस्वती,हे मात सरस्वती।
अज्ञानता को, तुम हमारे मिटाती।

तू श्वेतवर्णी कमल पर विराजती,
माँ वीणा वादिनी,तुम ही कहाती।
तुम ही अगम स्वर, ज्ञान को देती।
माँ मन बुद्धि पवित्र,तुम ही बनाती।
हे मात सरस्वती…………
अज्ञानता को तुम……….

संगीत की देवी ,तुम हो कहाती।
मैं हर शब्द तेरा,हर गीत गाती।
झूट और पाप को तुम ही मिटाती।
ज्ञान का दीपक, सदा माँ तुम ही जलाती।
हे मात सरस्वती……..
अज्ञानता को तुम…………

सात स्वर के तुम वरदान देती,
विधा की माँ तुम ही सरिता बहाती।
शरण तिहारे जो भी आता,
माँ तुम उसे पार लगती।
हे मात सरस्वती……..
अज्ञानता को तुम……..

*सोनू जैन मंदसौर*

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Author
Sonu Jain
Govt, mp में सहायक अध्यापिका के पद पर है,, कविता,लेखन,पाठ, और रचनात्मक कार्यो में रुचि,,, स्थानीय स्तर पर काव्य व लेखन, साथ ही गायन में रुचि,,,

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