Dec 2, 2017 · कविता
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◆बेटा उनका अब कपूत हो गया◆

जिसे समझा था उन्होंने सपूत,
वो बेटा कपूत हो गया,
बूढ़े माँ बाप के सारे अरमान चूर कर गया।

न रही दया,न रही इज्जत मन में अब उसके,,
बेटा उनका अब बईमान हो गया।

बुढ़ापे की लाठी समझ जिसे बड़ी आस लगा के पाला था,
अब वो बेटा बड़ा खुदगर्ज मतलबी हो गया।

अपने लहू से सींच कर जो फूल खिलाये थे उन्होंने बाग़ में,
आज वही फूल(बेटा) उनकी राहों का शूल हो गया।

चलना सीखा था जिन उंगुलियों को पकड़कर, छोड़ उन्हें अब,
बेटा उनका बीवी का गुलाम हो गया।

*सोनू जैन मंदसौर*🖊🖊🖊🖊🖊

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Sonu Jain
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Govt, mp में सहायक अध्यापिका के पद पर है,, कविता,लेखन,पाठ, और रचनात्मक कार्यो में रुचि,,,... View full profile
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