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≈≈≈ जैहिंद के छ: दोहे ≈≈≈

दिनेश एल०

दिनेश एल० "जैहिंद"

दोहे

November 14, 2017

जैहिंद के छ: दोहे
// दिनेश एल० “जैहिंद”

राम-किसन दोऊ स्तम्भ, भारत की हैं शान ।
हमरी कामना तो इहै, इन सदृश हों जवान ।।

मरदा के आगे होत, ____कब मेहरि के मोल ।
मरदा कबो नाहिं सुधरि, कतनो पिटबो ढोल ।।

सूट-बूट पहिन के तू, _ बन जइबै का जोग ।
ग्यान न होइहैं जबले, गुन गइहैं का लोग ।।

प्रीत करै सब लोगवा, प्रीत बिना जग ठूँठ ।
प्रीत जे होइ राम से, _ शेष प्रीत सब झूठ ।।

प्रीत मधुर होवै बड़ा, प्रीत हरै सब क्लेस ।
प्रीत-प्रीत में भेद पर, भार्या, कुटुम्ब, देस ।।

राम नाम है प्रतापी, ___ राम नाम बड़ तेज़ ।
मरा-मरा भी राम हुआ, कर ना राम का तेज ।।

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दिनेश एल० “जैहिंद”
10. 10. 2017

Author
दिनेश एल०
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का... Read more
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