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⁉क्या है तू ⁉

मानक लाल

मानक लाल "मनु"

कविता

January 28, 2017

⁉क्या है तू ⁉

रुह की प्यास बुझा दी है तेरी क़ुरबत ने।
तू कोई झील है,
झरना है,
घटा है,
क्या है तू?

नाम होटों पे तेरा आए तो राहत सी मिले।
तू तसल्ली है,
दिलासा है,
दुआ है,
क्या है तू?

तेरा सिवा ज़माने में कोई अच्छा न लगे।
तू पसंद है,
मकरन्द है,
गुलकंद है,
क्या है तू?

तेरी जुस्तजू मेरे दिल को बाग़ बाग़ करती है।
तू महक है,
गुल है,
पराग है,
क्या है तू?

मन मनु का हरदम तेरा होने को फ़ना है।
तू सपना है,
हकीकत है,
फ़साना है
क्या है तू?
मानक लाल मनु✍

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Author
मानक लाल
सम्प्रति••सहायक अध्यापक 2003,,, शिक्षा••MA,हिंदी,राजनीति,संस्कृत,,, जन्मतिथि 15 मार्च 1983 पता••9993903313 साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,
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