.
Skip to content

‼‼ याद करो भई हनुमत गर्जन ‼‼

Abhishek Parashar

Abhishek Parashar

मुक्तक

August 3, 2017

अनायास जब संकट घेरें, शत्रु बढ़े और मति फेरें,
और सतायें दुर्गुण का भय, याद करो भई हनुमत गर्जन ।1।
कोई काज न जब बन पाये, प्रति क्षण चिन्ता दें पीड़ायें,
और फँसो जब गह्वर में, याद करो भई हनुमत गर्जन।2।
विषादोन्मुख जब मन हो जाये, नेम करें कोई फल न आये,
विचित्र सी उलझन में फँस जाये,याद करो भई हनुमत गर्जन।3।
वाद-विवाद जब उलझाये, समय-समय पर रोग सताये,
विषय व्याधि जब टेर लगाये, याद करो भई हनुमत गर्जन।4।
जब पीड़ा दे वारि का भय, और सताये असमंजस का भय,
ऊँचा पर्वत भय उपजा दें, याद करो भई हनुमत गर्जन।5।
सुमति न आवे भय उपजावे, शक्तिहीनता पुनि तोहि सतावै,
ज्ञानहीन और बुद्धि भ्रमित हो, याद करो भई हनुमत गर्जन।6।
जबहिं सतावै सम्पत्ति का भय, हानि परे जब व्यापारन में,
और सतावै कन्दर्प का भय, याद करो भई हनुमत गर्जन।7।
राम नाम सुधि मन नहि आवे, चंचल मन यदि भजि चलि जावे,
योग न बने, न भजन बनावे,याद करो भई हनुमत गर्जन।8।

ऊपर लिखित कविता श्रद्धा का विषय है, अतः अधिक दिमाग का उपयोग न करें।(सब दिन रुरो परे पूरो जहाँ तहाँ ताहि,जाके हिय हुलसति हाँक हनुमान की)

##अभिषेक पाराशर##

Author
Abhishek Parashar
शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।आदर्श... Read more
Recommended Posts
झरना
झरना ✍✍✍ झरना हँसी का जो हसीन था नजरों से तेरी महक उठा बुलबुले जो बने पय से रूप निखर उठा मत निर्झरिणी सी तुम... Read more
??मुस्कुराया करो??
प्यार के गीत गुनगुनाया करो, हँसते जाओ तुम हँसाया करो ?? आँखो मा आसू तुम न लाया करो गम हमको अपने तुम बताया करो ??... Read more
बात- बात पर आँखें न भिगाया करो..................
बात- बात पर आँखें न भिगाया करो जैसे चलता है काम चलाया करो हमसे ना पूछो तुम हाल-ए-दिल अगर हाल -चाल अपने मगर सुनाया करो... Read more
खुद को इतना संत करो।
हिंदुस्तानी गरिमा को अब अक्षुण्ण और अनंत करो। कोई गाली दे जाये मत खुद को इतना संत करो। जब अभियान चलाया है तो भारत स्वच्छ... Read more