Skip to content

॥माँसाहार मानव भोजन नहीं॥ हाइकु

Abhishek Parashar

Abhishek Parashar

हाइकु

June 30, 2017

माँसाहार का,
प्रभाव होता बुरा,
शरीर पर ॥1॥

नर हुआ है,
दानव निरा भूखा
खाता जीवों को॥2॥

सूझता नहीं,
उसे कुछ,मारता,
बेक़सूरों को॥3॥

पेट भरना,
कैसे भी हो अपना,
हिंसक हुआ ॥4॥

गाय या मुर्गा,
जीव सभी में एक,
बूझे, क्यों न ॥5॥

मृत हुआ है,
मन, तन भी है जो,
देवदुर्लभ॥6॥

निदर्शन है,
मानव, दानव का,
वर्तमान में॥7॥

ऐसा क्यों है?
सोचता नहीं, मानव,
सूनसान में ॥8॥

उपकृत है,
ईश्वर के प्रति जो,
कलेवर का॥9॥

करे प्रहार,
स्वजन पर क्यों न,
रहम आए ॥10॥
##अभिषेक पाराशर (9411931822)##

Author
Abhishek Parashar
शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।... Read more
Recommended Posts
चंद हाइकु
चंद हाइकु *अनिल शूर आज़ाद गांधी कहते सच अहिंसा श्रम मानव धर्म। बीता समय कल की हक़ीकत आज सपना। लघु पत्रिका अभाव ही अभाव पत्रिका... Read more
इस दानव को मानव कहलाने दो --- कविता
कविता इस दानव को मानव कहलाने दो मेरी तृ्ष्णाओ,मेरी स्पर्धाओ, मुझ से दूर जाओ, अब ना बुलाओ कर रहा, मन मन्थन चेतना मे क्र्न्दन् अन्तरात्मा... Read more
बोझ गधा ही ढोता क्यों है?
शेर नहीं मुँह धोता क्यों है? बोझ गधा ही ढोता क्यों है? मानव मानव का दुश्मन बन बीज जहर के बोता क्यों है? मनमानी मन... Read more
ईश्वर
भूमि, अग्नि, वायु, गगन, नीर के सम्मिश्रण के साथ ईश्वर सृष्टि के कण-कण में है व्याप्त मनुष्य इन्हीं पंचतत्वों का है मिलाप... कर्मों से है... Read more