Feb 2, 2021 · कविता
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-:।। मोहब्बत ।।:-

मोहब्बत दिल की आह से ही होती है।
मोहब्बत विचारों की अभिव्यकति से ही होती है।
कभी अपने और पराए से मोहब्बत होती है।
आंखो से मोहब्बत दिल में तड़प होती है।
घर, परिवार, वतन, पशु-पंछी से मोहब्बत होती है।
कभी आदर्शो, पुस्तकों, विधालय से मोहब्बत होती है।
उपेक्षा से भी मौत से भी मोहब्बत होती है।
प्रातः चाय की प्याली से मोहब्बत होती है।
पेपर की खबरों से मोहब्बत होती है।
यारों से नहीं यारानां से मोहब्बत होती है।

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ओंकार मिश्र
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रि• रासायनिक अभियंता (लेखक एवं साहित्यकार) (प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण सहयोगी महासभा) प्रकाशित पुस्तक :- (६) View full profile
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