।। क्या होता है भाई माँ ।।

निःशब्द निरूत्तर पाई माँ।
है आज तलक घबराई माँ।
बच्चे का छोटा प्रश्न सुनो,
कहता क्या होता भाई माँ?

बहुत सुना मैंने शाला में,
यहाँ – वहाँ औ गौशाला में ।
हिंदु मुस्लिम सिक्ख ईसाई,
आपस में हम भाई – भाई ।
जाति धर्म के नाम ये सारे,
सबके अपने भगवन प्यारे ।
धर्म नाम पर लड़ते मरते,
ईर्ष्या द्वेष भाव ये करते ।
कोई नहीं किसी को भाता,
मुझे समझ में सब है आता ।
इक बात समझ नहि आई माँ ,
कहता क्या होता भाई माँ ?

मन आतुर माँ का कहने को,
दर्द छलकता है बहने को ।
सिसक सिसककर आँसू पोछे,
सोचे बेटा यह क्या पूछे ?
परिभाषित कर पाऊँ इसको,
कहते हैं हम भाई किसको ।
मन भीतर हैरानी जागी,
माता यहाँ-वहाँ फिर भागी ।
नहीं सूझता कोई उपाय ,
कैसे माता भाई दिखाय ।
नसबंदी इक में करवाई ,
कहता है क्या होता भाई ।

जस-तस रूप बदलकर बोली,
अपने हिय की गांठें खोली ।
तेरे बाद कोख में आता,
नन्हा जीवन इक मुस्काता ।
छायाप्रति तेरी ही होता ,
खुशियाँ घर में दुगनी बोता ।
दुग्ध पान करता वो मेरा ,
सुख देता वह भी बहुतेरा ।
संकट राहों में जब आता ,
तेरे कारण वह लड़ जाता ।
बात सभी हैं समझाई माँ,
कहता क्या होता भाई माँ

दुख के दिन है सब मिट जाते,
जब बढ़ भाई गले लगाते ।
और मनोबल रहता बढ़ता ,
डर पर जीत सदा है करता ।
मात-पिता की चिंता आधी,
घूमो – फिरो सभी आजादी ।
एक मिले सच्चा रखवाला,
भाई हो, वह किस्मत वाला ।
सुख-दुख दोनों साथ बिताएं ,
रिश्ता खून का भाई कहाए ।
चुन-चुन हर बात बताई माँ ,
सुन, क्या होता है भाई माँ ?

सुन ,बच्चा बहुत उदास हुआ ,
अब,रिश्ते का अहसास हुआ ।
सीने से माँ के लिपट गया ,
अहसासों में वह सिमट गया ।
नैनन अविरल जल धार बही ,
फिर कर विलाप इक बात कही ।
क्या रिश्ता भाई का दोगी ,
या फिर मुझको बहला दोगी ।
जैसे हर रिश्ता मार दिया ,
बिन रिश्तों का संसार दिया ।
हर वाक्य पे थी घबराई माँ ,
सुन, क्या होता है भाई माँ ??

बच्चे ने इक बात बताई,
मात नयन आँसू ले आई ।
कहा ! सुनो ऐ मेरी माई,
सुन लो क्या होता है भाई ।
मामा , चाचा, ताऊ , देवर ,
यह रिश्तों के प्यारे जेवर ।
बहना- जीजा खुशी मनाते,
घर में छोटा साला पाते ।
पूरन भ्रात से हो संसार,
इस रिश्ते को दो नहीं मार ।
अंत विनय खुद दोहराई माँ।
हर घर में हो दो भाई माँ।।

संतोष बरमैया #जय

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