।।मरहम नहीं।।

★★★★★
तू फलक का है खुदा तो हम जमीं पर कम नहीं।
वस्ल की हो रात कैसे गर जमीं पर हम नहीं।।
★★★★★
हम नहीं तो इश्क की हर इक गली सुनसान है।
हम सजा दें जिस गली को उस गली फिर गम नहीं।।
★★★★★
है बहुत तूफान पाले बादलों के झुण्ड ये।
बूँद आँसू सी, गिरा दे बादलों में दम नहीं।।
★★★★★
चाँद तन्हा रात में अब…. चाहता आगोश बस।
बेकरारी ये मिटा दे …है कहीं जानम नहीं।।
★★★★★
है दवा हर जख्म की बहते समय की धार में ।
जख्म दे दे हम वो भर ले है कहीं मरहम नहीं।।
★★★★★
धड़कनें लेकर जवाँ अब बढ़ चली सरिता कहाँ।
थम नहीं सकती, मिलेगा जब तलक हमदम नहीं।।
★★★★★
दे गवाही खंडहर औ पेड़ तन कर जो खड़े।
हम नहीं हों तो फ़िजां में बज सके सरगम नहीं।।
★★★★★
संतोष बरमैया #जय

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 3

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share