।।चल एक छोटा सा घर बनाते है।।

चल एक छोटा सा घर बनाते हैं

इस लाल काले हरे नीले आसमान के नीचे,
पेड़ों की पत्तियों के झुरमुट के पीछे,
चल एक छोटा सा घर बनाते है,
तेरे मेरे प्यार के इस बड़े जहान को,
दिल मे पल रहे प्यारे से अरमान को,
चल दोनों मिल के सजाते है।।
चल एक छोटा सा घर बनाते है।।

तू रंग कहते जा मैं रंग चुरा कर लाता हूँ।
तू सपने बुनते जा, मैं रंग भरते जाता हूँ।
सपनो में रंग प्यार के भरते जाते हैं ।
इक गली हो प्यार की,
इक नजर एतबार की।
चल गलियों में चलते जाते हैं।।
चल एक छोटा सा घर बनाते है।।

तुझ संग जीवन है बिताना।
अरमाँ पल-पल तुझको पाना।
लेकर हाथों में हाथ चलते जाते हैं।
बने सुहाना जीवन सारा।
सुंदर जहाँ हो प्यारा-प्यारा।
जीवन पथ पर बढ़ते जाते है।।
चल एक छोटा सा घर बनाते है।।

संतोष बरमैया #जय

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