कविता · Reading time: 1 minute

फ़र्ज़

फ़र्ज़
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हमें हमेशा ही
अपने राष्ट्र से प्यार है,
इसका हमेशा बढ़ता गौरव
जन जन का समभाव है।
जब जब देश ने
आवाज लगाई,
सभी ने एकजुट हो
अपनी हाजिरी लगाई।
जब भी इसके लिए
हमारी जरूरत आई
बिना हिचक
अपनी जान देकर भी,
इसकी आन बचाई।
शहादत देकर भी
अमर जवान ज्योति की लौ
बन माँ के आँचल में
स्थाई जगह बनाई।
राष्ट्र रक्षा,राष्ट्र गौरव ही
जीवन का अंग है,
जन जन ही
भारत माँ के संग है।
जय हिंद, वंदेमातरम कहते कहते
हर भारतवासी ने
अपना अपना फर्ज निभाया,
माँ का मस्तक उँचा रख
सदा बेटे का फर्ज निभाया।
✍सुधीर श्रीवास्तव

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