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फ़रेब

Priyanka Soni

Priyanka Soni

कविता

January 12, 2018

“फ़रेब”

***@@****

लफ़्ज़ कितने जाया हुए मेरे
एक भी न छू सके दिल को तेरे,
शायद पत्थर था कोई
सीने में तेरे…
टकराकर चूर हुए सारे
हँसी जज़्बात मेरे….,
किरचों में मैंने समेटा
अपने जज्बातों को….
अश्कों से सजाया जिसने
मेरी तन्हा रातों को…..,

सुना था….
पत्थर पर भी फूल खिलते हैं
क़ायनात मुस्कुराती है
जब दो दिल संग – संग धड़कते हैं… ,
मधुर से अहसासों के नन्हें अंकुर
तब पनपते हैं. .
दिलों में फूल बनकर
वो सहसा ही खिल उठते हैं…,

पर क्या ज़रूरी था
तोड़कर बिखेरना उनको…
खुशबू बनकर तो बस
था महकना उनको….,

पर जाया नहीं होगा
उस फूल का खिलना…
जारी रहेगा बिखरकर भी
उसका महकना… ,
अब तो खुशबू बन कर
फ़िज़ा में वो बहेगी..
तेरे इर्द-गिर्द , तेरा अस्तित्व भी
खुद में समेटेगी…
तेरा ज़िस्म- ओ- लिबास
रूह तक महकेगा..
उसकी छुअन से
तेरा “फ़रेब” भी दम तोड़ेगा…
इत्र बनकर तेरे वज़ूद से
वो लिपट जाएगी…
अपने आग़ोश में लेकर तुझको
ख़ुद में समेट लायेगी…

***
प्रियंका सोनी

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Author
Priyanka Soni
💞 है यही मेरा अस्तित्व, और यही मेरा वजूद... विधाता का दिया ये जीवन मेरा, है अमृत की बूंद...।।💞 मैं मूलतः अम्बेडकर नगर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली हूँ । मैंने परास्नातक द्वय (हिन्दी साहित्य और समाजशास्त्र से) किया है... Read more
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