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ज़िन्दगी

विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव

गज़ल/गीतिका

December 17, 2017

जिन्दगी जलने लगी है इन सुखों की छांव में।
चैन ओ अमन तो आये अपने बूढ़े गांव में।।

शहर में सुख सब मिले पर मन परेशां ही रहा।
गांव में ग़म तो थे लेकिन जैसे पानी नाव में।।

हमने वफ़ा के नाम पर बस सीख ली आवारगी ।
कौन कब आकर फंसे रहते थे बस इस दांव में।।

कर गुजरना अपनी फितरत थी तो सब करते रहे।
काम अच्छे या बुरे आकर के झूठे ताव में।

हम सुधरने से लगे हैं आजकल कुछ रोज से।
कोई सांकल रोकती है पांव बांधे पांव में।।

विजय बेशर्म गाडरवारा
9424750038

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Author
विजय कुमार नामदेव
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
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