गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ज़िन्दगी हादिसों की एक कड़ी

ज़िन्दगी हादिसों की एक कड़ी
मौत बस एक पल है एक घड़ी

करते-करते गिले भी, शिकवे भी
क्यों नज़र मेरी तुझसे देख लड़ी

मेरे दिल में उतर गई गहरे
नेक सूरत थी यार एक बड़ी

राह पे मुझको लाने की ख़ातिर
बाप ने तोड़ी थी वो एक छड़ी

ख़त्म होने लगी मिरी ताक़त
वक़्त की मार मुझपे देख पड़ी

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