ज़िन्दगी तुझको जिया तेरा इशारा देखकर

ज़िन्दगी तुझको जिया तेरा इशारा देखकर
पग बढ़े केवल समय की बहती धारा देखकर

मन को बहलाने का था बस ये तरीका ,और क्या
माँगते जो हम रहे टूटा सितारा देखकर

सड़कें हैं वीरान, डर के साये में है आदमी
ज़िन्दगी हैरान है बदला नज़ारा देखकर

डर नहीं जाना मुसीबत में अकेले हो अगर
हाथ अपना रब बढ़ाता बेसहारा देखकर

राख में भड़काएंगी फिर आंधियां चिंगारियाँ
हो गया अंदाज़ था उसमें शरारा देखकर

हम मना कर देंगे उनको थी नहीं उम्मीद ये
सकपका सा वो गये हैं रुख हमारा देखकर

पार होने वाला है गम का समंदर ‘अर्चना’
हाथ अब मत छोड़ देना तुम किनारा देखकर

18-07-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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