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ज़िन्दगी को ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी करते रहे

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

गज़ल/गीतिका

June 11, 2017

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी करते रहे
बस यही इक काम था जो हर घड़ी करते रहे
:
मैं तो ग़म मे ड़ूब कर भी मौत से हारा नहीं
लोग खुशियों की हवस मे खुदकुशी करते रहे।
,
ख़त्म अपने प्यार का ये सिलसिला हो जाएगा
आप गर यूंही मुहब्बत में कमी करते रहे
:
आप ग़ाफ़िल ही रहे और देश सारा लुट गया
ये है मुजरिम वो है मुजरिम बस यही करते रहे
‘:
लो अमीरों के ये बच्चे घूम आये चाँद पर
मुफ़लिसों के बच्चे देखो काम ही करते रहे
:
मुल्क के अनपढ़ थे जितने सारे नेता बन गये
जो सियासत के थे क़ाबिल नौकरी करते रहे
:
आग यूं नफ़रत की फैली शहर सारा जल गया
तुम क़मर बस घर मे बैठे शायरी करते रहे

Author
मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी
Urdu and hindi peot writer Address sandila zila hardoi up Mo no 8957713974
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