गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ज़िन्दगी को मोड़ दूँ

ज़िन्दगी को मोड़ दूँ
बंदिशें सब तोड़ दूँ

ये तो हो सकता नहीं
सोचना ही छोड़ दूँ

हाथ में मेरे नहीं
टूटे दिल को जोड़ दूँ

मत गँवा इसमें समय
किसको कैसे होड़ दूँ

‘अर्चना’अब क्या लिखूँ
मन को ही झंझोड़ दूँ

26-08-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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