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ज़िन्दगी को मनाओ खुशी की तरह— गज़ल

निर्मला कपिला

निर्मला कपिला

गज़ल/गीतिका

July 21, 2016

ज़िन्दगी को मनाओ खुशी की तरह
झेलो’ गम को जरा दिल्लगी की तरह

कुछ इनायते’ मिली कुछ जलालत सही
वक्त आया गया रोशनी की तरह

रोज चलता रहा बोझ ढोता रहा
और तपता रहा दुपहरी की तरह

उसके’ दिल मे तो’ विष ही भरा होता’ है
बात होती मगर चाश्नी की तरह

ज़िन्दगी गांव मे औरतों की भी क्या
मर्द पीटे उसे ओखली की तरह

वादा अच्छे दिनों का कहाँ खो गया
लोग भूखे दुखी भुखमरी की तरह्

गांव के दूध का स्वाद भी याद है
अब न मिट्टी की’ उस काढनी की तरह

वक्त की मार सहते हुये जी लिया
रोज बजता रहा ढोलकी की तरह

जान बच्चे हैं’ मेरी वो ही ज़िन्दगी
वो सहारा मे’रा हैं छडी की तरह्

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Author
निर्मला कपिला
लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण... Read more
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